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बिहार: 20 साल में 392 प्रतिशत तक बढ़ी अपहरण दर, चौंकाने वाले आंकड़े के पीछे ये सबसे बड़ी वजह

सरकार ने बताया कि 2004 में 3 हजार 413 अपहरण हुए थे, जबकि 2024 में 19 हजार 768 मामले दर्ज किए गए. आंकड़ों के मुताबिक 2004 में प्रति दस लाख 3.9 अपहरण के मामले दर्ज किए जबकि 2024 में प्रति दस लाख यह बढ़कर 15.3 पर पहुंच गया. यानी प्रति दस लाख आबादी पर अपहरण की दर में 392% की वृद्धि हुई. 

बिहार: 20 साल में 392 प्रतिशत तक बढ़ी अपहरण दर, चौंकाने वाले आंकड़े के पीछे ये सबसे बड़ी वजह
प्रतीकात्मक तस्वीर.
पटना:

बिहार में बीते 20 साल में संज्ञेय अपराध, चोरी और अपहरण की दर बढ़ी है. प्रति दस लाख अपहरण में 392 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह जानकारी बिहार विधान परिषद में सरकार ने एक सवाल के जवाब में दी. RJD के विधान पार्षद अब्दुल बारी सिद्दीकी ने पूछा कि 2004 के मुकाबले 2024 में अपराध में कितनी वृद्धि हुई है. इस सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि 2004 में 3 हजार 413 अपहरण हुए थे, जबकि 2024 में 19 हजार 768 मामले दर्ज किए गए. इसी तरह चोरी के मामले 11 हजार 113 से बढ़कर 47 हजार 548 पर पहुंच गई.

अपहरण की दर 392% बढ़ी, प्रेम प्रसंग के सबसे ज्यादा

आंकड़ों के मुताबिक 2004 में प्रति दस लाख 3.9 अपहरण के मामले दर्ज किए जबकि 2024 में प्रति दस लाख यह बढ़कर 15.3 पर पहुंच गया. यानी प्रति दस लाख आबादी पर अपहरण की दर में 392% की वृद्धि हुई. 

अपहरण का यह आंकड़ां चौंकाने वाला है. लेकिन इस चौंकाने वाले आंकड़े के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है. दरअसल अपहरण के इस खतरनाक आंकड़ों के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला सबसे बड़ी वजह है. प्रेम विवाह के लिए घर से निकले लड़के-लड़कियों के परिजन अपहरण का मामला दर्ज कराते हैं. इससे अपहरण के आंकड़ों में वृद्धि दिखाई देती है.

गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में 19 हजार 768 अपहरण के मामले दर्ज हुए. इनमें प्रेम प्रसंग में घर से फरार होने के 6 हजार 35 और शादी की नियत से अपहरण के 8 हजार 27 मामले दर्ज हैं. यानी कुल 14 हजार 62 मामले सिर्फ शादी और प्रेम प्रसंग से जुड़े हैं. यह कुल मामलों का 70% है.

गृह विभाग का तर्क, "रिपोर्टिंग बढ़ी, इसलिए आंकड़ों के इजाफा"

जवाब में गृह विभाग में यह बताया है कि मौजूदा समय में थानों तक आम लोगों की पहुंच बढ़ी है. कोई भी व्यक्ति बिना डरे किसी घटना से संबंधित मामला दर्ज कर सकता है. E-FIR, जीरो FIR जैसी सुविधाओं के कारण ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना आसान हुआ है. मिसिंग केसेज में 24 घंटे के अंदर मामला दर्ज कराना अनिवार्य है. इसलिए दर्ज किए जा रहे मामलों की संख्या बढ़ी है.

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