बिहार के कटिहार जिला अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले एक हत्याकांड में फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) सुनील कुमार सिंह की अदालत ने अपनी ही मां की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी बेटे मुकेश नोनिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने दोषी पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है.
10 साल बाद मिला इंसाफ
यह सनसनीखेज मामला बारसोई थाना क्षेत्र के बलसर गांव का है. घटना साल 2016 की है, जब आरोपी मुकेश नोनिया ने मामूली विवाद में अपनी मां हेमसरी देवी पर कुदाल से हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था. अपर लोक अभियोजक (एपीपी) पंचानंद सिंह ने बताया कि मृतका एक भिखारी थी, जिसने भीख मांगकर अपने बेटे को पाला-पोसा था. लेकिन शराब की लत के कारण बेटे ने ममता का कत्ल कर दिया.
ट्रायल के दौरान पेश हुए 8 गवाह
पुलिस ने घटना के तुरंत बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, जो पिछले 10 वर्षों से न्यायिक हिरासत में था. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाहों को अदालत में पेश किया. इनमें जांच अधिकारी (IO), डॉक्टर और चश्मदीद शामिल थे. सभी गवाहों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने मुकेश को फांसी के तहत दोषी पाया.
शराब की लत ने बना दिया हैवान
अदालत में यह बात सामने आई कि मुकेश शराब पीने का आदी था. जिस मां ने दाने-दाने की मोहताज होकर उसे बड़ा किया, उसे ही उसने कुदाल से काटकर मार डाला. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय श्रीवास्तव ने पैरवी की, लेकिन साक्ष्यों की मजबूती के सामने आरोपी का अपराध साबित हो गया.
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