रोहतास जिले के आयरकोठा थाना क्षेत्र अंतर्गत पडुहार गांव से शुक्रवार (27 मार्च) को एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बीच अवैध शराब कारोबार का विरोध करना एक व्यक्ति को इतना भारी पड़ गया कि उसकी बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान 43 वर्षीय राजेश कुमार राम के रूप में हुई है, जो पडुहार गांव के ही निवासी थे. घटना के बाद से पूरे गांव में तनाव का माहौल है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
शराब बिक्री का विरोध बना जानलेवा
मृतक के परिजनों के अनुसार पूरा विवाद उनकी निजी जमीन पर अवैध शराब बिक्री को लेकर शुरू हुआ था. आरोप है कि गांव के कुछ दबंग किस्म के लोग उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर शराब का अवैध धंधा चला रहे थे. इस पर जब राजेश कुमार राम ने आपत्ति जताई और इसका विरोध किया, तो आरोपी भड़क उठे.
लाठी डंडों से ताबड़तोड़ हमला
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने पहले गाली-गलौज की और फिर देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया. लाठी-डंडों से लैस हमलावरों ने राजेश कुमार राम पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और उन्हें बुरी तरह पीटकर अधमरा कर दिया. घटना के वक्त आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन दबंगों के डर से कोई बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा सका.
इलाज के दौरान तोड़ा दम
घटना की सूचना मिलते ही परिजन गंभीर रूप से घायल राजेश कुमार राम को आनन-फानन में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. हालांकि उनकी हालत बेहद नाजुक थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. मामले में परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि अवैध शराब कारोबार और दबंगई की शिकायत पहले भी प्रशासन से की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उल्टा, आरोप है कि पुलिस ने दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय मृतक के छोटे भाई को ही जेल भेज दिया, जिससे आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए.
परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने सख्ती दिखाई होती, तो आज राजेश कुमार राम जिंदा होते.
घटना के बाद आयरकोठा थाना की पुलिस हरकत में आई और शव को कब्जे में लेकर सासाराम स्थित सदर अस्पताल भेज दिया. जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपा जाएगा. पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है. दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है. आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.
कानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून के प्रभाव और जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां एक ओर सरकार अवैध शराब कारोबार पर सख्ती का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रही हैं. फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
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