Bihar Crime News: बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले एक युवक की बेगूसराय स्थित ससुराल में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में इंसाफ हो गया है. बेगूसराय के मंझौल कोर्ट के एडीजे संजय कुमार सिंह ने मृतक महेश्वर राय की पत्नी रानी कुमारी उर्फ रानी राज और उसके प्रेमी मोहम्मद शहजाद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सजा के साथ-साथ अदालत ने दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. अपर लोक अभियोजक राकेश कुमार के अनुसार, दोषियों को धारा 302/34 और 302/120 (बी) के तहत यह सजा सुनाई गई है. यदि वे जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें एक-एक साल की अतिरिक्त कैद काटनी होगी. इस फैसले पर मृतक के पिता रामप्रवेश राय ने संतोष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है.
अनपढ़ पति, ग्रेजुएट पत्नी और 10 हजार फॉलोअर्स का टशन
इस हत्याकांड के पीछे की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है, लेकिन इसका अंत बेहद दर्दनाक रहा. मृतक महेश्वर राय समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना क्षेत्र के नरहन का निवासी था, जबकि उसकी पत्नी रानी कुमारी बेगूसराय के खोदाबंदपुर थाना क्षेत्र के फफौत गांव की रहने वाली थी. रानी कुमारी स्नातक (ग्रेजुएट) थी, जबकि महेश्वर अनपढ़ था और मजदूरी कर परिवार चलाता था. रानी को सोशल मीडिया पर रील्स बनाने का जुनून था और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उसके करीब 10 हजार फॉलोअर्स थे. वह 2021 से ही लगातार वीडियो अपलोड कर रही थी और कई युवकों के साथ वॉट्सऐप चैटिंग में मशगूल रहती थी. महेश्वर अपनी पत्नी के इस व्यवहार और सोशल मीडिया के प्रति दीवानगी का विरोध करता था, जिसे लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था.
प्रेमी से बात कर रही थी पत्नी, पति ने बना लिया था वीडियो
महेश्वर और रानी की शादी वर्ष 2017 में हुई थी और उनका 7 साल का एक बेटा सुशांत भी है. बच्चे के जन्म के बाद से ही रानी अपने ससुराल में रहने को तैयार नहीं थी और अक्सर मायके में ही रहती थी. महेश्वर को शक था कि उसकी पत्नी का किसी अन्य युवक के साथ अवैध संबंध है, और जांच में यह सच साबित हुआ. रानी का प्रेम प्रसंग समस्तीपुर के ही नरहन निवासी मोहम्मद शहजाद के साथ चल रहा था. पति द्वारा प्रेमी से बात करने और वीडियो बनाने पर रोक लगाने की जिद ही उसकी मौत का कारण बन गई.
घर के बाहर पड़ी थी लाश, ससुराल वाले फरार
वारदात 7 जनवरी 2024 की है. महेश्वर 10 जनवरी को मजदूरी के लिए कोलकाता जाने वाला था. जाने से पहले रानी ने उसे अपने मायके फफौत बुलाया. रात करीब 10 बजे खाना खाने के बाद जब महेश्वर सो गया, तब रानी ने अपने प्रेमी शहजाद को घर बुलाया. दोनों ने मिलकर रानी के ही दुपट्टे से महेश्वर का गला घोंट दिया. घटना के महज आधे घंटे बाद जब कोलकाता में रह रहे महेश्वर के भाई रुदल ने उसे फोन किया, तो किसी और ने फोन उठाया और पीछे से हंगामे की आवाजें आ रही थीं. रुदल ने तुरंत अपने पिता को सूचना दी. जब पिता रामप्रवेश राय रात में ही फफौत गांव पहुंचे, तो ससुराल वाले फरार थे और महेश्वर की लाश बाहर पड़ी थी. वहां मौजूद कुछ संदिग्ध लड़कों ने लाश को अस्पताल ले जाने के बहाने ठिकाने लगाने की कोशिश की, लेकिन पिता ने उन्हें रोककर तुरंत पुलिस को सूचना दी.
सबूत के अभाव में मां-बहन बचे, 2 साल बाद मिला इंसाफ
बेगूसराय के तत्कालीन एसपी योगेंद्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और रानी कुमारी व उसके प्रेमी शहजाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पुलिस ने रानी की मां और बहनों पर लगे साजिश के आरोपों की भी जांच की, लेकिन उनके खिलाफ सबूत न मिलने पर केवल पत्नी और प्रेमी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. ट्रायल के दौरान सूचक, डॉक्टर और जांच अधिकारी समेत कुल 7 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को साजिश के तहत हत्या का दोषी पाया और अब इस चर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाकर समाज में एक कड़ा संदेश दिया है.
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