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बंगाल चुनाव: अधीर रंजन चौधरी के प्रचार में हंगामा, कांग्रेस-TMC कार्यकर्ताओं में जमकर हुई हाथापाई

मुर्शिदाबाद में प्रचार कर रहे कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को प्रचार करने से रोकने की कोशिश की गई है. दावा किया जा रहा है कि जब वह प्रचार कर रहे थे, तब टीएमसी कार्यकर्ताओं ने आकर हंगामा किया. मुर्शिदाबाद से गोपाल ठाकुर की रिपोर्ट.

बंगाल चुनाव: अधीर रंजन चौधरी के प्रचार में हंगामा, कांग्रेस-TMC कार्यकर्ताओं में जमकर हुई हाथापाई
  • मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी के चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हुई
  • हाथापाई की घटना पुलिस की मौजूदगी में बहरामपुर के वार्ड नंबर 19 में हुई, जिससे इलाके में तनाव फैल गया
  • अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ तीन क्रिमिनल केस दर्ज हैं, जिनमें से दो मुर्शिदाबाद और एक मालदा में है
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए जोर-शोर से प्रचार जारी है. इस बीच मुर्शिदाबाद में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के प्रचार के दौरान हाथापाई होने की खबर है. बताया जा रहा है कि जब अधीर रंजन चौधरी प्रचार कर रहे थे, तभी कांग्रेस और तणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हो गई. कांग्रेस और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच ये हाथापाई पुलिस की मौजूदगी में हुई. इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया है.

जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह कांग्रेस उम्मीदवार अंधीर रंजन चौधरी अपने समर्थकों के साथ बहरामपुर के वार्ड नंबर 19 में चुनाव प्रचार कर रहे थे. तभी यहां टीएमसी पार्षद भीष्मदेव करमाकर कुछ कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे और कथित तौर पर अधीर रंजन चौधरी को चुनाव प्रचार करने से रोकने की कोशिश की. इसके बाद कांग्रेस और टीएमसी कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई और बात हाथापाई तक पहुंच गई.

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बहरामपुर से चुनाव लड़ रहे हैं अधीर रंजन

कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर से टिकट दिया है. उन्होंने अपने एफिडेविट में अपने पास 48.40 लाख रुपये की चल संपत्ति घोषित की है. 2024 के मुकाबले ये 9.05 लाख रुपये ज्यादा है. 

हलफनामे के अनुसार, उनके पास 94,500 रुपये, जबकि उनकी पत्नी अतासी के पास 7.25 लाख रुपये नकद हैं. उनकी पत्नी अतासी के पास 1.27 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है. 

अधीर रंजन चौधरी ने अपने हलफनामे में अपने ऊपर 3 क्रिमिनल केस दर्ज होने की जानकारी दी है. इनमें से दो मुर्शिदाबाद और एक मालदा में दर्ज है. 

उन्होंने पहली बार 1991 में मुर्शिदाबाद के नबग्राम से विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 1996 में उन्होंने यह सीट जीत ली. अगले तीन दशकों में उन्होंने खुद को कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित किया. उन्होंने बहरामपुर लोकसभा सीट लगातार 5 बार जीती. 2024 के लोकसभा चुनाव में वह टीएमसी के यूसुफ पठान से हार गए थे.

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