विज्ञापन
This Article is From May 02, 2020

RJD नेता शिवानंद तिवारी ने बिहार के CM नीतीश कुमार पर कसा तंज- हेमंत सोरेन तो बाजी मार ले गए!

देश के दूसरे हिस्सों में फंसे बिहार के प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. आपको बता दें कि काफी उहापोह की स्थिति के बाद नीतीश कुमार भी कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के बीच प्रवासियों को टिकाने के इंतजाम में जुट गए हैं.

RJD नेता शिवानंद तिवारी ने बिहार के CM नीतीश कुमार पर कसा तंज- हेमंत सोरेन तो बाजी मार ले गए!
आरजेडी नेता ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की तारीफ की है.
पटना:

देश के दूसरे हिस्सों में फंसे बिहार के प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. आपको बता दें कि काफी उहापोह की स्थिति के बाद नीतीश कुमार भी कोरोना वायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के बीच प्रवासियों को टिकाने के इंतजाम में जुट गए हैं. इससे पहले वह इनके किसी भी आवागमन का विरोध कर रहे थे. लेकिन केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी मिल गई है. दूसरी ओर तेलंगाना से एक स्पेशल ट्रेन प्रवासियों को लेकर झारखंड पहुंच गई है. इन्हीं सब मुद्दों पर आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर बिहार के सीएम पर निशाना साधा है. 

क्या कहा शिवानंद तिवारी ने
'हेमंत सोरेन तो बाजी मार ले गए! तेलंगना से आए सभी श्रमिकों को उनके उनके शहर में सरकार द्वारा पहुंचा दिया गया. स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हटिया स्टेशन पर जाकर सारी तैयारी का जायजा लिया था. आपने प्रशासन के लोगों को ताकीद किया और उसी के अनुसार रांची से अलग-अलग जिलों में या कस्बों में सारे श्रमिकों को पहुंचा दिया गया है. इस मामले में नीतीश कुमार और सुशील मोदी से हेमंत सोरेन ज्यादा कुशल मुख्यमंत्री साबित हुए. मालूम होगा कि झारखंड में गठबंधन की सरकार है और उस सरकार में राष्ट्रीय जनता दल भी शामिल है.

कोरोना, नेतृत्व की भी परीक्षा ले रहा है. कौन किस प्रकार इसकी चुनौती का मुकाबला कर रहा है, देश की इस पर नजर है. एक समय देश नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री की संभावना देख रहा था. लेकिन आज की मौजूदा चुनौती में नितीश कुमार कहीं नजर नहीं आ रहे हैं. बल्कि पहली दफा मुख्यमंत्री बने अनुभवहीन उद्धव ठाकरे अपने कर्म से आज प्रशंसा के पात्र बन गए हैं.

दरअसल नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी जोखिम उठाने का साहस नहीं दिखाया है. आज देख लीजिए, जब से कोरोना का मामला सामने आया है, मुख्यमंत्री की कोठी के चौखट के बाहर उन्होंने पैर नहीं रखा है. बगल में हेमंत सोरेन को देख लीजिए या ममता बनर्जी को देख लीजिए. सामने खड़ा होकर ये लोग चुनौती का मुकाबला करते दिखाई दे रहे हैं.

नीतीश जी भाषा और शब्दों के चयन के मामले में बहुत सतर्क रहते हैं. वैसे अपने विरोधियों पर अपने प्रवक्ताओं से अपशब्दों का इस्तेमाल करवाने में उनको परहेज नहीं है. लेकिन याद कीजिए. लॉक डाउन के बाद जो भगदड़ मची थी उसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से खबर आई थी वे लोगों को बस में बैठा कर बिहार की सीमा तक पहुंचा देंगे. इससे नितीश जी के अहं को चोट पहुंची थी. उनको लगा कि हमारे नियम कायदे में हस्तक्षेप करने वाला  यह कौन होता है !और तैश मैं उन्होंने कह दिया था कि हम उनको बिहार में घुसने नहीं देंगे. इस शब्द को प्रवासी भूले नहीं है.

आज नीतीश कुमार कह रहे हैं कि आने वाले प्रवासियों को उनके हुनर के मुताबिक काम दिया जाएगा! नक्शा खींचने में नीतीश जी का कोई जोड़ नहीं है. भले ही वह नक्शा कागज पर ही रह जाए, जमीन पर कहीं नजर नहीं आए. अगर नीतीश जी की सरकार में यही क्षमता होती तो बिहार के लोग पलायन कर रोजी रोटी के तलाश में दूसरे देश में क्यों जाते!'

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Coronavirus, Nitish Kumar, Shivanand Tewari, RJD
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com