- पूर्णिया के देवीनगर में रिश्ते के साले ने दस हजार रुपये के कर्ज के विवाद में जीजा की निर्मम हत्या की
- मो समीर ने पूर्वनियोजित योजना से मो शफीक को खेत में बंधक बनाकर कुदाल और रॉड से सिर पर वार कर मार डाला
- हत्यारोपी ने शव को खेत के गड्ढे में दफनाया और फिर ट्रैक्टर से जुताई कर सुराग छुपाने का प्रयास किया
यह रिश्ते और भरोसे का कत्ल था, जब रिश्ते के साले ने महज 10 हजार रु के लिए जीजा की निर्मम तरीके से हत्या कर दिया. मामला पूर्णिया जिला के श्रीनगर थाना क्षेत्र के खुट्टी हसैली पंचायत के देवीनगर का है जहां मखाना कारोबार से जुड़े मो शफीक (50) की लाश 8 जनवरी की देर शाम गांव से थोड़ी दूर खेत के गड्ढे से बरामद हुई. मोबाइल लोकेशन के आधार पर जब हत्यारे की शिनाख्त हुई तो परिजनों को भी सहसा विश्वास नही हुआ कि रिश्तेदार ही भरोसे का क़ातिल साबित होगा. हत्यारे की पहचान जगैली पंचायत के चरैया रहिका निवासी मो समीर (40) के रूप में हुई जो मृतक का रिश्ते में साला बताया जाता है. अब वह सलाखों के पीछे है. मृतक तब 4 जनवरी की शाम बाजार गया था और 08 जनवरी की शाम उसकी लाश बरामद हुई.गायब होने से शव बरामद होने तक पुलिस के रवैये को लेकर परिजनों में असंतोष है.
कर्ज के 10 हजार रु वापस करने के लिए फ़ोन कर साला ने जीजा को बुलाया
हत्यारोपी मो समीर ने मृतक शफीक से 10 हजार रु कर्ज ले रखा था. शफीक के परिजनों की माने तो उन्होंने दूसरे से रु कर्ज लेकर समीर को उधार दिया था. वजह यह थी कि शफीक समीर पर काफी भरोसा करता था. तय समय-सीमा बीत जाने पर भी जब समीर ने रुपए वापस नही किया तो शफीक रुपये वापसी का दवाब बनाने लगा. रुपए वापस करने में अक्षम समीर ने एक खौफनाक फैसला करते हुए शफीक को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का निर्णय लिया. पूर्वनियोजित साजिश के तहत जब शफीक 4 जनवरी को सब्जी खरीदने बाजार ठाय था तो उसे फ़ोन कर रुपये वापस करने की बात कहकर बुलाया और फिर इस हत्याकांड को अंजाम दिया.
पहले किया निर्मम हत्या, फिर गड्ढा खोद किया जमींदोज और बाद में कर डाली खेत की जुताई
शफीक की निर्मम तरीके से हत्या समीर ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर किया. समीर ने पुलिस को दिए स्वीकारोक्ति बयान में बताया कि बातचीत के बहाने शफीक को मुख्य सड़क से दूर खेत की ओर ले गया और फिर दोनों सहयोगियों की मदद से उसे बंधक बनाकर कड़ाके की ठंड में उसके कपड़े उतारकर उसी से बांध डाला. फिर, कुदाल के डंडे और रॉड से उसके सिर पर प्रहार कर उसकी हत्या कर दिया. इसके बाद तीनों ने मिलकर एक गढ्ढा खोद ,शफीक की लाश को उसी गड्ढे में ठिकाने लगा दिया. हैरानी की बात यह रही कि जिस खेत मे गढ्ढे को बनाकर शफीक को जमींदोज किया गया वह खेत किसी और का था लेकिन, समीर ने अगली सुबह लाश दफन लिए हिस्से की जुताई ट्रैक्टर से करवा दिया ताकि किसी को कोई शक नही हो. बाद में इसी तीन फीट गहरे से शव को बरामद किया गया.
नशेड़ी है हत्यारोपी समीर, कर्ज में है डूबा हुआ
मिली जानकारी अनुसार, समीर स्मैक और शराब पीने का आदी रहा है. इस वजह से वह लगातार कर्ज में डूबता चला गया. नशे के शौक को पूरा करने के लिए वह अपनी अधिकांश पैतृक संपत्ति भी बेच चुका है. शफीक उसके नशेड़ी होने की बात से वाकिफ था लेकिन, नजदीकियां की वजह से उसने उसे कर्ज दे दिया। सलीम ने माना कि हत्या को अंजाम देने से पहले उसने नशे का सेवन किया था.
बेटे तस्लीम ने कहा ,काश! अब्बू ने उनकी बात मानी होती
वारदात के दिन शाम में शफीक जब सब्जी खरीदने बाजार गए थे तो साथ मे उनका बेटा तस्लीम भी थी. गांव के पास पीपल टोला नया चौक पर शफीक ने अपनी पसंद की सब्जी की खरीदारी किया. उसने यह कहकर सब्जी देकर बेटे को वापस कर दिया कि 'आज अम्मी को जल्दी खाना बनाने कहना, मुझे भूख लगी है. मैं चाय पीकर जल्दी घर वापस आता हूँ'. हालांकि, तस्लीम ने असहमति जताते हुए कहा कि 'काफी ठंड है, साथ ही चलिए '. लेकिन, शफीक ने बात नही मानी और समीर के एक फ़ोन कॉल के बाद अपराध की एक ऐसी पटकथा लिखी गई जो शफीक की जीवन-यात्रा का अंतिम पन्ना साबित हुआ. बीते हुए लम्हे को याद कर लंबी सांस भरते हुए तस्लीम कहते हैं कि ' काश! अब्बू ने मेरी बात मान ली होती तो हम आज यतीम नही होते.
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