पिछले दो दिनों के दौरान बिहार भाजपा के दो से अधिक नेताओं ने एक राग छेड़ा हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की सत्ता में पंद्रह वर्ष रह लिए, इसलिए उन्हें बिहार की गद्दी की कमान अब भाजपा नेता ख़ासकर सुशील मोदी को सौंप कर दिल्ली चले जाना चाहिए. मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने शनिवार को रांची में झारखंड के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. जहां उन्होंने शराबबंदी पर रघुबर दास सरकार को घेरा और बताया कि कैसे बिहार हर मामले में झारखंड से आगे निकल चुका हैं.
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इसके बाद सोमवार को भाजपा के विधान पार्षद संजय पासवान ने एक बयान से राजनीतिक विवाद की शुरुआत की. उन्होंने कहा, ''बहुत हुआ नीतीश कुमार. अब उन्हें दिल्ली की राजनीति में जाना चाहिए और बिहार की गद्दी भाजपा नेताओं को देना चाहिए.'' पासवान ने अपनी पसंद का मुख्यमंत्री सुशील मोदी को भी बताया. जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने इसके जवाब में कहा कि जब जनता ने नीतीश कुमार को जनादेश दिया हैं तब इस मांग की क्या ज़रूरत हैं.
@NitishKumar is the Captain of NDA in Bihar & will remain its Captain in next assembly elections in 2020 also.When Captain is hitting 4 & 6 & defeating rivals by inning where is the Q of any change.
— Sushil Kumar Modi (@SushilModi) September 11, 2019
इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉक्टर सीपी ठाकुर ने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर एनडीए को लड़ना चाहिए. उनका कहना हैं कि नरेंद्र मोदी का क़द नीतीश कुमार से काफ़ी बड़ा हैं और हाल के समय में जैसी लोकप्रियता बढ़ी हैं वैसे में उनके नाम और चेहरे पर लड़ने में ज़्यादा फ़ायदा होगा.
इसपर जवाब देने उतरे जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी जिन्होंने साफ-साफ कहा कि भाजपा के बयान भी नेताओं को अपने बड़बोले बयान से बचना चाहिए है और पार्टी पदाधिकारी बनाती है लेकिन नेता हमेशा जनता बनाती है. त्यागी ने यह तक कह दिया कि भाजपा के नेताओं को समझ लेना चाहिए कि नीतीश कुमार किसी के रहम-ओ-करम पर नहीं है बल्कि जनता के जनादेश पर मुख्यमंत्री बने हैं, इसलिए पता नहीं उनके हाशिये पर खरे नेताओं के बीच नीतीश कुमार को लेकर बैचेनी क्यों हो जाती है.
लेकिन जानकारों का मानना है कि भले उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यह बात साफ़ कर दी थी कि NDA में नेतृत्व को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर ठाकुर और संजय पासवान जैसे नेता ऐसे बयान दे रहे हैं. दरअसल भाजपा के नेता अपने निजी बयानों के आड़ में यह टटोलने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बयानों का क्या असर होता है. साथ ही साथ भाजपा की रणनीति यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे कर दे और जनता दल युनाइटेड को बैकफुट पर लाया जाए, जिससे सीटों के तालमेल में कुछ ज़्यादा तोल-मोल ना करे. हालांकि भाजपा नीतीश कुमार को लेकर एक बात साफ हैं कि इनके साथ ज़्यादा छेड़छाड़ ना किया जाये तो बेहतर हैं.
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