बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा राज्य की सड़कों और बड़े पुलों पर टोल वसूली की तैयारी को लेकर रही. इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पशुपालन और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई बड़े फैसले भी लिए गए. राज्य सरकार ने बड़े पुलों और महत्वपूर्ण सड़कों पर टोल वसूलने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. इसके लिए सलाहकार कंपनी की सेवाएं लेने की मंजूरी दी गई है. इस काम पर करीब 30.95 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
47 पुलों और 55 सड़कों पर टोल की तैयारी
पहले चरण में 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 बड़े पुलों और 55 राज्य उच्च पथों को चिन्हित किया गया है. टोल व्यवस्था लागू करने से पहले ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा. वाहनों की संख्या, उनके आने-जाने के मार्ग और टोल प्लाजा के स्थान का अध्ययन किया जाएगा. फास्टैग आधारित टोल वसूली की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी.
क्रेडिट कार्ड योजना 5 साल बढ़ी
कैबिनेट ने बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी है. अब 2026-27 से 2030-31 तक छात्रों को इस योजना का लाभ मिलता रहेगा. इसके तहत विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ेगी.
स्वास्थ्य और उद्योग को भी बढ़ावा
अरवल में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने के लिए 25 एकड़ सरकारी जमीन स्वास्थ्य विभाग को मुफ्त देने का फैसला लिया गया है. वहीं बेगूसराय के बरौनी में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए 700 एकड़ सरकारी जमीन उद्योग विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी. मुजफ्फरपुर और सीवान में नए ग्रिड सब-स्टेशन बनाने के लिए भी जमीन हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है.
न्यायालय, आश्रय गृह और संग्रहालय के लिए फैसले
राज्य के व्यवहार न्यायालयों में कर्मचारियों के पदों का पुनर्गठन किया जाएगा. इसके तहत ग्रेड-1, ग्रेड-2 और ग्रेड-3 के हजारों पदों को मंजूरी मिली है. पूर्णिया और गया में दिव्यांग तथा मानसिक रूप से बीमार महिलाओं और पुरुषों के लिए दो नए आश्रय गृह खोले जाएंगे. पटना संग्रहालय के रखरखाव और संचालन के लिए 40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं.
शहरी विकास और पशुपालन पर फोकस
15वें वित्त आयोग की सिफारिश के तहत राज्य के नगर निकायों को 9,169 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना को भी 2030-31 तक बढ़ा दिया गया है. पशुपालन क्षेत्र में महिला सहकारी संघ के गठन, हिफर पालन केंद्रों की स्थापना और पशु अस्पतालों के पुनर्गठन जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है. इसके साथ ही सीतामढ़ी में 110 करोड़ रुपये से अधिक लागत का रेलवे ओवरब्रिज बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है.
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