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3 KM दूर जाने पर बुझती है प्यास, बिहार के इस गांव में लोग नल से महरूम, कागजों में दावे

बिहार के रोहतास के तेलकप पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या एक में रहने वाले गांव के लोग साफ पानी को तरस रहे. लोगों को 3 किलोमीटर दूर सोन नदी का पानी लाने जाना पड़ता है. अबतक इस गांव में नल तक नहीं है. सारी दावे कागजी साबित हो रहे हैं.

3 KM दूर जाने पर बुझती है प्यास, बिहार के इस गांव में लोग नल से महरूम, कागजों में दावे
  • रोहतास के तेलकप पंचायत के वार्ड एक में पेयजल की गंभीर समस्या, ग्रामीणों को 3 किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं
  • 15 वर्ष पूर्व क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण रसूलपुर टंकी से जलापूर्ति बंद, ल-जल योजना का लाभ नहीं मिला
  • इलाके में 80 फीट तक का भूजल फ्लोराइड युक्त है, स्वास्थ्य समस्याएं जैसे चर्म रोग और जोड़ों में दर्द बढ़ रहे
रोहतास:

रोहतास प्रखंड के तेलकप पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या एक के लोगों के लिए पेयजल आज भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है. गांव में समुचित जलापूर्ति व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को लगभग तीन किलोमीटर दूर बह रही सोन नदी का पानी लाने को मजबूर होना पड़ता है. हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारी कागजों में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था होने का दावा कर रहे हैं,जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है.

15 वर्ष पहले बंद हुई टंकी की आपूर्ति,नल-जल योजना भी अधर में

पूर्व पैक्स अध्यक्ष सुरेश सिंह यादव और पंचायत की मुखिया अनीता टोप्पो ने बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व रसूलपुर गांव स्थित पानी टंकी से इस वार्ड में जलापूर्ति की जाती थी। लेकिन एनएच-119 के निर्माण के दौरान पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इसके बाद से आज तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई. मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का लाभ भी इस वार्ड को अब तक नहीं मिल सका है.

80 फीट तक फ्लोराइड युक्त पानी,स्वास्थ्य के लिए खतरा

ग्रामीणों के अनुसार इस इलाके में 80 फीट की गहराई तक का भूजल फ्लोराइड युक्त है,जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। पहले जब पीपीसीएल कंपनी यहां संचालित थी, तब फ्लोराइड की अधिकता के कारण कंपनी सोन नदी से पानी लिफ्ट कर गांव में आपूर्ति कराती थी। कंपनी बंद होने के बाद यह व्यवस्था भी समाप्त हो गई और तब से गांव पेयजल संकट से जूझ रहा है।

साइकिल से नदी तक पानी लाने की मजबूरी

ग्रामीण अनिल कुशवाहा,धरमु पासवान और पवन कुमार बताते हैं कि उन्हें रोजाना साइकिल से तीन किलोमीटर दूर सोन नदी जाना पड़ता है. गर्मी हो या बरसात,बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को इसी पानी पर निर्भर रहना पड़ता है.ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप का पानी पीने से चर्म रोग,जोड़ों और घुटनों में दर्द की शिकायत बढ़ गई है.

एक साल पहले बना प्राक्कलन,अब तक नहीं पहुंचा पानी

जानकारी के अनुसार सोन नदी से लिफ्टिंग कर गांव तक पानी पहुंचाने का प्राक्कलन लगभग एक वर्ष पूर्व ही तैयार कर लिया गया था. बावजूद इसके आज तक नल का जल ग्रामीणों को उपलब्ध नहीं कराया जा सका है.इससे लोगों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ते जा रहे हैं.

विधानसभा तक पहुंचा मामला,जांच दल गठित

तीन दिन पूर्व स्थानीय विधायक मुरारी गौतम ने इस गंभीर समस्या को विधानसभा में मजबूती से उठाया. इसके बाद विभाग की ओर से तीन सदस्यीय जांच दल का गठन कर स्थल जांच भी कराई गई है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब शायद उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकले.

आरटीआई से खुली पोल,कई बार सौंपा गया ज्ञापन

आरटीआई कार्यकर्ता अमरदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने एक वर्ष पूर्व सूचना के अधिकार के तहत लोक सूचना पदाधिकारी से नल-जल योजना की स्थिति की जानकारी मांगी थी.जवाब में संतोषजनक तथ्य सामने नहीं आए. उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी सौंपा गया,लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी?

कनीय अभियंता अबू बकर का कहना है कि जनप्रतिनिधि गांव में बोरिंग कराने को तैयार नहीं हैं. उनकी मांग है कि सोन नदी से लिफ्टिंग कर ही शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए.अभियंता के अनुसार नदी से पानी लाने में अधिक खर्च आ रहा है,जिसकी जानकारी विभाग को दे दी गई है.इसी कारण मामला लंबित है.

ग्रामीणों की मांग-तुरंत मिले शुद्ध पेयजल

वार्ड संख्या एक के लोग अब केवल आश्वासन नहीं,बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं. उनका कहना है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें यूं भटकना न पड़े. प्रशासन और सरकार से उनकी एक ही मांग है,जल्द से जल्द सोन नदी से लिफ्टिंग योजना को धरातल पर उतार कर उन्हें शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए.
 

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