- बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में विधायकों के वोट से सांसद चुने जाते हैं, जो राजनीतिक ताकत दिखाता है
- एनडीए के पास विधानसभा में दो सौ से ज्यादा विधायक हैं, इसलिए चार सीटें जीतना लगभग निश्चित माना जा रहा है
- महागठबंधन को राज्यसभा चुनाव में अपनी एक सीट बचाने के लिए पूरी एकजुटता और हर वोट की आवश्यकता होगी
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. यह चुनाव भले ही आम जनता के वोट से नहीं होता, लेकिन इसका असर बिहार और दिल्ली दोनों की राजनीति पर पड़ता है. राज्यसभा चुनाव में विधायकों के वोट से सांसद चुने जाते हैं, इसलिए विधानसभा में किस गठबंधन की कितनी ताकत है, वही सबसे अहम होता है. साल 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में एनडीए की स्थिति बहुत मजबूत है. क्या तेजस्वी यादव राज्यसभा जाएंगे, ये सवाल भी खड़ा हो रहा है.
विपक्ष बिखरा... तो NDA 5वीं सीट पर भी कर देगी खेला
भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए के पास 200 से ज्यादा विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 40 से 45 विधायकों के वोट की जरूरत होती है. इस हिसाब से एनडीए के लिए चार सीटें जीतना लगभग तय माना जा रहा है. कुछ नेताओं का कहना है कि अगर विपक्ष में पूरी एकजुटता नहीं रही, तो एनडीए पांचवीं सीट पर भी दावा कर सकता है. एनडीए के भीतर उम्मीदवारों को लेकर अंदरखाने चर्चा चल रही है. भाजपा और जदयू दोनों ही अपने वरिष्ठ नेताओं को राज्यसभा भेजना चाहते हैं. इसके साथ ही सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है. माना जा रहा है कि भाजपा को दो सीटें और जदयू को एक या दो सीटें मिल सकती हैं. अंतिम फैसला दिल्ली और पटना स्तर पर बातचीत के बाद होगा.
महागठबंधन को पूरी तरह एकजुट रहना होगा, वरना!
दूसरी ओर महागठबंधन की स्थिति कमजोर मानी जा रही है. राजद, कांग्रेस और वाम दलों को मिलाकर भी विधायकों की संख्या इतनी नहीं है कि वे आसानी से एक सीट निकाल सकें. इसके लिए महागठबंधन को पूरी तरह एकजुट रहना होगा और हर वोट संभालना पड़ेगा. थोड़ी सी भी टूट से एकमात्र संभावित सीट भी हाथ से जा सकती है.
क्या तेजस्वी यादव राज्यसभा जाएंगे?
राजद खेमे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तेजस्वी यादव राज्यसभा जाएंगे. तेजस्वी यादव इस समय बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं और विधानसभा के बाहर उनकी मौजूदगी पार्टी को कमजोर भी कर सकती है. इसलिए पार्टी के भीतर इसे लेकर मतभेद बताए जा रहे हैं. कुछ नेता चाहते हैं कि तेजस्वी विधानसभा की राजनीति में ही सक्रिय रहें, जबकि कुछ का मानना है कि राज्यसभा से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत मंच मिलेगा.
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राज्यसभा चुनाव से जाएगा बड़ा मैसेज
राज्यसभा चुनाव का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ेगा. अगर एनडीए चार या पांच सीटें जीत लेता है, तो यह संदेश जाएगा कि बिहार में उसकी पकड़ पूरी तरह मजबूत है. इससे विपक्ष पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी. वहीं, अगर महागठबंधन एक सीट भी बचाने में सफल रहता है, तो वह इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करेगा. इससे विपक्ष को यह कहने का मौका मिलेगा कि वह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और अब भी राजनीतिक लड़ाई में बना हुआ है.
कुल मिलाकर, बिहार की पांच राज्यसभा सीटों का चुनाव सिर्फ सांसद चुनने तक सीमित नहीं है. यह चुनाव तय करेगा कि बिहार की राजनीति में ताकत का संतुलन किस ओर झुका हुआ है और आने वाले समय में कौन-सा गठबंधन ज्यादा मजबूत स्थिति में रहेगा.
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