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शादी के कार्ड बंटे, होटल भी बुक... मिडिल ईस्‍ट में फंसा रिजवान क्‍या अपनी शादी के लिए पहुंच पाएगा भारत?

बिहार के रिजवान का निकाह 30 मार्च को है, लेकिन ईरान-इजरायल युद्ध के कारण कतर में फंसे रिजवान की फ्लाइट दो बार कैंसिल हो चुकी है.

शादी के कार्ड बंटे, होटल भी बुक... मिडिल ईस्‍ट में फंसा रिजवान क्‍या अपनी शादी के लिए पहुंच पाएगा भारत?
  • रिजवान का निकाह 30 मार्च को होना है, लेकिन ईरान और इजरायल के युद्ध के कारण वह घर नहीं आ पाए हैं
  • कतर में फंसे रिजवान की दो फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं, जिससे परिवार और गांववाले चिंतित हैं
  • शेरघाटी अनुमंडल के लगभग सौ युवक रोजी रोटी के लिए खाड़ी देशों में हैं और युद्ध के कारण घर नहीं लौट पा रहे हैं
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गया:

रिजवान का निकाह 30 मार्च को होना है. पूरे गांव में शादी के कार्ड बंट चुके हैं, बस, होटल, बावर्ची सब बुक हो चुके हैं. रिश्‍तेदारों ने नए कपड़े भी शादी के लिए खरीद लिए हैं. अब बस रिजवान के घर आने का इंतजार है. रिश्‍तेदारों और गांव के लोग यही पूछ रहे हैं कि रिजवान कब आएगा? क्‍या रिजवान अपनी शादी की तारीख से पहले घर पहुंच पाएगा? रिजवान, बिहार के गयाजी जिले के रहने वाले हैं और इस समय मिडिल ईस्‍ट में जारी जंग के बीच कतर में फंसे हुए हैं.

2 बार फ्लाइट हुई कैंसिल

ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण पूरे मिडिल ईस्‍ट पर संकट के बादल छाए हुए हैं. कतर, बहरीन, यूएई, सऊदी अरब पर ईरान लगातार ड्रोन और मिसाइल अटैक कर रहा है. ऐसे में इन देशों के एयर स्‍पेस को कमर्शियल फ्लाइट्स के लिए कई बार बंद किया जा चुका है. रिजवान ने अपने निकाह में शामिल होने के लिए 17 मार्च 2026 को फ्लाइट का टिकट बुक किया था. लेकिन, वह फ्लाइट कैंसिल हो गई और रिजवान अपने घर नहीं आ सका. उसके बाद परिवार के लोगों के कहने पर रिजवान ने दूसरी बार 20 मार्च 2026 को कतर से नई दिल्ली के लिए टिकट बुक किया. लेकिन, दूसरी बार भी रिजवान की फ्लाइट कैंसिल हो गई. अब परिवार और पूरे गांववालों की चिंता बढ़ गई. मस्जिद में रिजवान की सही सलामत आने की दुआ मांगी जा रही हैं. 

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शेरघाटी के 100 युवक खाड़ी देशों में
 

गया जिले के शेरघाटी अनुमंडल में खण्डेल, बहेरा, सपा बिगहा सहित कई गांव के लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए 100 से अधिक युवक अपने देश को छोड़कर खाड़ी देशों में गए हुए हैं. खण्डेल गांव के लगभग 25 से अधिक युवक क़तर, सऊदी और अरब देशों में गए हुए हैं. इन सभी लोगों को ईद मनाने के लिए बीते दिनों घर आना था, लेकिन युद्ध के चलते नहीं आ पाए. समस्‍या यही है कि ईरान की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है, जिसकी वजह से खाड़ी देशों के लिए उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं. 

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500 कार्ड बंट चुके हैं, लड़की वाले भी आ गए 
 

दूल्हे रिजवान के भाई जहांगीर आलम ने बताया, "मेरा छोटा भाई कतर में काम करता है. मेरे भाई रिजवान का निकाह इसी महीने में 30 मार्च 2026 को होना है. निकाह की पूरी तैयारी हो चुकी है, लेकिन मेरे भाई रिजवान का आने का अभी कुछ पता नहीं है, क्योंकि वहां पर ईरान और इजरायल के बीच युद्ध चल रहा है. इसके चलते सभी फ्लाइट बंद हैं. हम लोग इंतजार कर रहे है कि अगर रिजवान बारात वाले दिन भी अगर घर पहुंच जाता है, तो निकाह करवा देंगे. बारात वाले दिन भी अगर नहीं आ पता है, तो निकाह की डेट आगे बढ़ानी होगी. रिजवान से पूरे परिवार की बात हो रही है और वह भी आने के लिए तैयार है. वह अपने निकाह में शामिल होने के लिए तीन बार टिकट बुक करवा चुका है. रिजवान के निकाह के 500 कार्ड बंट चुके हैं. अब हमलोग ईश्‍वर के भरोसे हैं कि रिजवान घर आ जाए और तय तारीख पर निकाह हो जाए." रिजवान के चाचा ने बताया कि लड़की वाले दिल्ली से निकाह के लिए आ चुके हैं. उन्‍होंने भी निकाह की पूरी तैयारी कर ली है. हम लोगों ने भी रिजवान की निकाह की तैयारी पूरी कर ली है. लेकिन रिजवान के कतर में फंसे होने के कारण घर के लोग बहुत परेशान हैं. 

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दुबई में ऐसे हैं हालात? 

गांव के रहने वाले राजीव खान ने बताया कि वह भी दुबई में ही थे. वह पिछले कई सालों से वहां काम करते हैं. उन्‍हें ईद पर घर आना था. लेकिन युद्ध का ऐसा सिलसिला चला की वहां से इंडिया आने वाली फ्लाइट सभी कैंसिल हो गईं. हमारी तीन फ्लाइट जब कैंसिल हुईं, तो हमने चौथी फ्लाइट में टिकट बुकी, उसके बाद बहुत ही मुश्किल से हम दिल्ली पहुंचे. दुबई में इन दिनों हालात बेहद खराब हैं. दिन में वहां सब ठीक रहता था और हमलोग काम के लिए ऑफिस भी जाया करते थे.  लेकिन जैसे ही शाम होती थी, तो वहां के हालात बहुत ख़राब हो जाते थे. सिर्फ धमाकों की आवाज आती थी. कभी मिसाइल आती थी कभी ड्रोन. बहुत करीब से हमलोगों ने इस युद्ध को देखा है. रात में डर लगता था, नींद नहीं आती थी. धमाकों की आवाज सोने ही नहीं देती थी. इंडिया के बहुत सारे लोग अभी वहां फंसे हुए हैं. वे भी अपने वतन वापस आना चाहते हैं, लेकिन युद्ध के चलते मुमकिन नहीं हो पा रहा है. हमारे गांव के काफी लोग फंसे हुए हैं और उसमें से कुछ 15 से 20 लोग ऐसे हैं जो गांव आने वाले थे. 

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