Bihar News: बिहार के बेगूसराय से साहस की एक ऐसी दास्तां सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का दिल जीत लिया है. एक बेटी, जिसने न केवल अपने पिता को आंखों के सामने दम तोड़ते देखा, बल्कि खुद भी हमलावरों की गोली का शिकार हुई, उसने 7 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार जीत हासिल कर ली है.
पढ़ाई के बीच गूंजी गोलियां
यह 5 सितंबर 2019 को दोपहर करीब दो बजे की बात है, जब पवन राय अपने घर के दरवाजे पर चौकी पर आराम कर रहे थे. उनकी बेटी दीपिका पास बैठकर पढ़ाई कर रही थी. तभी पहले से घात लगाए बैठे प्रकाश राय ने हमला कर दिया. दीपिका की आंखों के सामने पिता को गोली मार दी गई. जब दीपिका ने विरोध किया तो अपराधी ने उसे भी पीठ में गोली मार दी. रास्ते में पिता की मौत हो गई जबकि दीपिका जिंदगी और मौत से लड़ती रही. पवन राय स्कूली बच्चों को मैजिक वैन से लाने ले जाने का काम करते थे जिससे परिवार का गुजारा चलता था.

सात साल की अदालती लड़ाई
गोली लगने के बावजूद दीपिका ने हार नहीं मानी. लंबे इलाज के दौरान भी वह पिता के हत्यारे को सजा दिलाने का संकल्प लेकर चली. सात वर्षों तक अदालतों के चक्कर गवाहियां डर और मानसिक तकलीफ सहन करते हुए वह लड़ती रही. परिवार का पूरा साथ मिला. मुख्य आरोपी प्रकाश राय पर मुकदमा चला. दीपिका की गवाही सबसे अहम साबित हुई.
कोर्ट का फैसला और संतुष्टि
अंत में एडीजे-11 की अदालत ने प्रकाश राय को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना न चुकाने पर 9 महीने अतिरिक्त कैद होगी. धारा 307 में 10 साल और धारा 27 में 3 साल की सजा भी दी गई. फैसला सुनकर दीपिका की आँखें नम हो गईं. एक तरफ पिता खोने का दर्द दूसरी तरफ न्याय मिलने की खुशी. परिवार ने कोर्ट का आभार जताया.
"अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है"
फैसला आने के बाद दीपिका की आंखों में आंसू थे, जो पिता को खोने के गम और इंसाफ मिलने की खुशी, दोनों का संगम थे. हालांकि, दीपिका का कहना है कि इस हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों का सलाखों के बाहर होना उसे खटक रहा है. उसने संकल्प लिया है कि जब तक पिता को 'पूरा' न्याय नहीं मिल जाता, उसका संघर्ष जारी रहेगा.
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