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बिहार में एक और पुल हुआ ध्वस्त, 35 साल पुराने ब्रिज के टूटने से पूर्वी चंपारण मुख्य मार्ग बाधित

पुल की जर्जर स्थिति को लेकर दो माह पहले जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हो गई. (बेतिया से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

बिहार में एक और पुल हुआ ध्वस्त, 35 साल पुराने ब्रिज के टूटने से पूर्वी चंपारण मुख्य मार्ग बाधित
बेतिया में गिरा पुल (NDTV)

बिहार में पुल गिरने की कहानी थम नहीं रही है. जहां एक ओर पुल बनाए जा रहे हैं, दूसरी ओर पुल ध्वस्त हो रहे हैं. इसका मुख्य कारण है प्रशासनिक अव्यवस्था है जो जर्जर पुलों की न तो मॉनेटरिंग कर रही है. न ही उनका आकलन कर सरकार को जानकारी दी जा रही है. हाल ही में भागलपुर के विक्रमशिला पुल गिरा था, जिससे सीमांचल से संपर्क बुरी तरह से टूटा था. हालांकि दो महीने युद्ध स्तर पर काम कर इसे फिर से चालू किया गया है. अब ताजा मामला बेतिया जिले से आया है. जहां मझौलिया प्रखंड में सोमवार (8 जून) एक बड़े हादसा हुआ. यहां धनौती नदी पर बना करीब 35 साल पुराना गोडा पुल अचानक से ध्वस्त हो गया.

बताया जा रहा है कि पुल का करीब 10 फीट हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया. इस घटना के बाद बखरिया चौक NH-27 से लालसरैया होते हुए करमवा और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया. वहीं कई गांव का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है.

महीनों से जर्जर हालत में पुल

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पुल पिछले कई महीनों से जर्जर हालत में था. पुल के बीच बड़ा गड्ढा बन चुका था तथा उसकी रेलिंग भी टूट चुकी थी. बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. लोगों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को पुल की खराब स्थिति की सूचना दी गई, लेकिन समय रहते मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण यह बड़ी दुर्घटना हुई.

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कहां क्या बढ़ी परेशानी

बता दें कि पुल ध्वस्त होने से बखरिया, करमवा, लालसरैया, राजभार समेत करीब दस गांवों और आधा दर्जन पंचायतों का संपर्क प्रभावित हो गया है. पश्चिमी चंपारण से पूर्वी चंपारण जाने वाले लोगों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है. सबसे अधिक दिक्कत किसानों, छात्रों, मरीजों और सब्जी विक्रेताओं को हो रही है. मजबूरी में कई लोग पुल के किनारे से होकर नदी पार कर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं.

प्रशासनिक उदासीनता

करमवा पंचायत के ग्रामीणों ने बताया कि धनौती नदी पर बने इस पुल का निर्माण लगभग 35 वर्ष पूर्व कराया गया था. पुल की जर्जर स्थिति को लेकर दो माह पहले जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हो गई.

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए. लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जल्द से जल्द वैकल्पिक आवागमन व्यवस्था करने और नए पुल के निर्माण की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते पुल की मरम्मत कराई गई होती, तो इतनी बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं होती.

बिहार में लगातार पुलों के धंसने और गिरने की घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं. यह हादसा एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं और पुलों के रखरखाव पर सवाल खड़े कर रहा है.

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