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पुलवामा हमले में संलिप्तता का लगाया आरोप, फिर डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड शिक्षक से ठगे 6.20 लाख रुपये

ठगों ने व्हाट्सएप पर आरबीआई का फर्जी नोटिस भी भेजा और मोबाइल बंद करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी. भय के कारण पीड़ित लगातार उनके संपर्क में रहा और ठगी का शिकार हो गया.

पुलवामा हमले में संलिप्तता का लगाया आरोप, फिर डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड शिक्षक से ठगे 6.20 लाख रुपये
प्रतीकात्मक फोटो
Bihar News:

नालंदा जिले में साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड शिक्षक को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर 6.20 लाख रुपये की ठगी कर ली. शातिरों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और जज बताकर शिक्षक पर पुलवामा हमले में संलिप्तता का झूठा आरोप लगाया और बैंक खातों की जांच के नाम पर उनसे रुपये ट्रांसफर करा लिए. पीड़ित हरनौत थाना क्षेत्र के मुढ़ारी गांव निवासी 61 वर्षीय कृष्ण कुमार ने साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है.

24 घंटे वर्चुअल निगरानी में रखा

पीड़ित ने बताया कि बीते 31 मार्च को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी और जज बताते हुए कहा कि आप पर देशद्रोह का आरोप है और पुलवामा हमले में आपकी संलिप्तता सामने आई है. साथ ही यह भी कहा गया कि आपके बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकियों के साथ लेनदेन में हुआ है, इसलिए खातों की जांच होगी. इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” कर घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी. शातिरों ने उन्हें आठ दिनों तक 24 घंटे वर्चुअल निगरानी में रखा और डर-धमकी देकर दो किस्तों में कुल 6.20 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर करा लिए.

ठगों ने व्हाट्सएप पर आरबीआई का फर्जी नोटिस भी भेजा और मोबाइल बंद करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी. भय के कारण पीड़ित लगातार उनके संपर्क में रहा और ठगी का शिकार हो गया.

पुलिस नहीं करती कभी डिजिटल अरेस्ट

साइबर डीएसपी राघवेंद्र मिण त्रिपाठी ने बताया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी किसी व्यक्ति को ऑनलाइन गिरफ्तार नहीं करती है. बिना एफआईआर के कोई भी जज ऑनलाइन सुनवाई नहीं करता. उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कोई व्यक्ति खुद को सीबीआई, एनआईए या न्यायालय का अधिकारी बताकर डराए या पैसे मांगे, तो तुरंत नजदीकी थाना या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें. विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि वे ऐसे मामलों में ज्यादा निशाना बन रहे हैं.

जिले में बढ़ रहे हैं ऐसे मामले

नालंदा जिले में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. पिछले साल फरवरी में हरनौत के रेल कोच कारखाना के एक कर्मचारी से भी इसी तरह 1.60 लाख रुपये की ठगी की गई थी. उस मामले में भी ठगों ने खुद को साइबर क्राइम और सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया और पैसे ट्रांसफर करा लिए थे. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी या बैंक डिटेल साझा न करें और सतर्क रहें.

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