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EXCLUSIVE: 'मां के गहने गिरवी रखकर खेलना शुरू किया', सम्मान ना मिलने पर डबल्स वर्ल्ड चैंपियन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी का छलका दर्द

NDTV EXCLUSIVE Sathwiksairaj Rankireddy: NDTV से EXCLUSIVE से बातचीत में डबल्स वर्ल्ड चैंपियन सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी ने बताया, “डेनमार्क से लौटते वक्त एयरपोर्ट पर 5,000-10,000 लोग थे. किसी ने पहचाना तक नहीं, बुरा लगा.

EXCLUSIVE: 'मां के गहने गिरवी रखकर खेलना शुरू किया', सम्मान ना मिलने पर डबल्स वर्ल्ड चैंपियन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी का छलका दर्द
NDTV EXCLUSIVE Sathwiksairaj Rankireddy: 

NDTV EXCLUSIVE Sathwiksairaj Rankireddy: इस वक्त जब पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों में देश की राय बंटी हुई दिख रही है, IPL ने पूरे देश को मदहोश कर रखा है. करीब महीने भर से चल रहे आईपीएल के ताबड़तोड़ क्रिकेट के बीच भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने चुपचाप एक और इतिहास रच दिय. डेनमार्क के होर्सेन्स में भारतीय बैडमिंटन टीम ने थॉमस कप का ब्रॉन्ज़ मेडल जीत लिया. बैडमिंटन के इस टीम वर्ल्ड चैंपियनशिप या क्रिकेट से तुलना करें तो बैडमिंटन के वर्ल्ड कप में 2022 में GOLD मेडल जीतने वाली टीम ने दूसरी बार पोडियम फ़िनिश करते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल या कांस्य पदक पर अपने नाम की मुहर लगा दी. 

IPL और चुनाव के बीच भारतीय बैडमिंटन टीम की ऐतिहासिक कामयाबी की ख़बर चुपचाप दबे पांव आई. इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद जब विजेता बैडमिंटन टीम वापस वतन लौटी तो ना तो रास्ते में, ना एयरपोर्ट पर और ना ही भारत पहुंचने पर उनका कोई ख़ास स्वागत-सम्मान हुआ. ज़ाहिर है इन चैंपियन खिलाड़ियों का दर्द छलक पड़ा और NDTV से EXCLUSIVE बात करते हुए उन्होंने कई उदाहरण दिए कि कैसे चैंपियन खिलाड़ियों की भारत में कोई कद्र नहीं होती. उन्होंने अपने मुताबिक इसकी वजहें भी बताईं.  

‘कोई मान-सम्मान नहीं!'

NDTV से EXCLUSIVE से बातचीत में डबल्स वर्ल्ड चैंपियन सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी ने बताया, “डेनमार्क से लौटते वक्त एयरपोर्ट पर 5,000-10,000 लोग थे. किसी ने पहचाना तक नहीं. बुरा लगा. हमें कुछ बड़ा नहीं चाहिए – बस ‘हाय' बोल दो. हम टीम टी-शर्ट में थे, जिस पर इंडियन फ्लैग और ‘Thomas Cup' लिखा था. ये एचएस प्रणॉय का आइडिया था कि सब एक जैसे दिखें. फेडरेशन की टी-शर्ट के अलावा ये हमने खुद प्रिंट करवाई थीं.” मगर इन सबके बावजूद इक्का-दुक्का लोग ही इन्हें कभी-कभी पहचानते या इनकी कामयाबी पर बात करते दिखे. 

‘हमने भी मां के गहने गिरवी रखकर खेल की शुरुआत की'

पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 सात्विक ने अपने सफ़र के बारे में बताते हुए कहा, “जब मैंने बैडमिंटन शुरू किया, मम्मी-पापा के पास पैसे नहीं थे. माँ की ज्वेलरी (गहना) गिरवी रखकर लोन लिया. हम सब स्ट्रगल करके यहाँ आए हैं.” सात्विक ये भी कहते हैं, “मैं एक सिंपल आदमी हूं. अभी अपने बाइक पर हूं. मुझे या मेरी टीम को कुछ बड़ा नहीं चाहिए. बस हमारी मेहनत और संघर्ष को छोटा ना बनायें.” 

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रेस्तरां में सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर को तवज्जो

डबल वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक विजेता, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप गोल्ड मेडल विजेता 25 साल के सात्विक कहते हैं, “सोशल मीडिया पर लोग कहते हैं कि सिर्फ गोल्ड जीतने पर सेलिब्रेट करेंगे. लेकिन ये अचीवमेंट भी बहुत बड़ी है. दुख तो तब होता है जब हैदराबाद में ही एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को रेस्तरां में मुझसे – खेल रत्न अवॉर्डी से – पहले टेबल मिल जाती है.” 

सात्विक ज़ोर देकर कहते हैं कि ऐसा उनके साथ हैदराबाद के रेस्तरां में हो चुका है. उनके पहुंचने पर कहा गया कि रेस्तरां फुल है. उसी वक्त एक सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर के आने पर जगह बना दी गई. ये उनके लिए ज़ाहिर तौर पर दर्द भरा साबित हुआ. वो कहते हैं, “ऐसे में खेलरत्न या अर्जुन पुरस्कार के क्या मायने रह जाते हैं.”

सात्विक 2022 की गोल्ड टीम का भी हिस्सा थे. वो कहते हैं, “तब लोग नहीं जानते थे कि थॉमस कप क्या है. लेकिन  4 साल बाद फिर मेडल लाए, फिर भी कुछ नहीं बदला. हमें प्राइज मनी नहीं चाहिए. बस लोग ये मानें कि इंडियन बैडमिंटन टीम भी है. क्रिकेट ही नहीं, बैडमिंटन भी देखो और देश के लिए खुश हो जाओ. बस पहचान दे दो.”

'भारतीय क्रिकेट टीम का बहुत बड़ा फ़ैन हूं'

सात्विक अपना स्टैंड साफ़ करते हुए कहते हैं, “मैं टीम इंडिया का बड़ा फैन हूँ. क्रिकेट से तुलना नहीं कर रहा – उसका शेड्यूल, व्यूअरशिप सेट है. लेकिन बैडमिंटन को टीवी और OTT पर जगह नहीं मिलती. यही बदलना चाहिए.” वो कहते हैं, “मैं भी क्रिकेट पसंद करता हूं. लेकिन अगर आईपीएल देखना है तो मुझे पता है कि 7 बजे कहां टॉस देखना है, 7:30 बजे रात में कहां मैच देखूंगा. लेकिन कई बार तो अपने माता-पिता को अपने मैच को देखने के लिए मुझे बैडमिंटन के मैच देखने के लिए लिंक भेजना पड़ता है. ये बदलना चाहिए.”

‘बच्चों को कोई खेल खेलने के लिए ज़ोर नहीं लगाऊंगा'  

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार विजेता सात्विक कहते हैं, “मैं किसी खेल के लिए फोर्स नहीं करूँगा. वो मजे के लिए खेलें. लेकिन 4 साल में हालात नहीं बदले – कब बदलेंगे? स्पोर्ट्स करियर छोटा होता है – 8-10 साल का. बैडमिंटन में और भी मुश्किलें हैं. 3 महीने नहीं खेले तो रैंकिंग गिर जाती है. टॉप 32 में रहना पड़ता है वरना ऑल इंग्लैंड, वर्ल्ड चैंपियनशिप में एंट्री नहीं मिलती. इंजरी हुई तो वापसी बहुत मुश्किल होती है. डबल्स में तो रास्ता ही नहीं था. सिंगल्स में गोपीचंद सर, प्रकाश सर, साइना दीदी, सिंधु दीदी, श्रीकांत भैया और कश्यप भैया रहे. डबल्स में हमें सब कुछ जीरो से बनाना पड़ा.” 

चिराग शेट्टी और सात्विक ट्रेलब्लेज़र हैं. एशियन गेम्स गोल्ड, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड फॉर फास्टेस्ट स्मैश जैसे कामयाबियों को हासिल करनेवाली भारत की पहली वर्ल्ड नंबर 1 चिराग और सात्विक की जोड़ी से दुनिया भर की टॉप बैडमिंटन जोड़ियां ख़ौफ़ खाती हैं. इन्हें अभी हतोत्साहित करना या देखना एशियाड 2026 से लेकर लॉस एंजेल्स 2028 के ओलिंपिक मेडल की उम्मीदों को ख़तरे में डालना होगा.आगे इस खेल को जो बड़ा नुकसान पहुंचनेवाला ख़तरा है, उसकी सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है.

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