सोचिए, एक महिला जो कल तक स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी और घर पर दो बच्चों की परवरिश करती थी, आज वो दुनिया के सबसे खतरनाक F1 सर्किट्स पर फेरारी कार को 300 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ा रही है. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि पुणे की डायना पुंडोले की असली दास्तान है. डायना ने फेरारी सीरीज में कदम रखकर इतिहास रच दिया है और वो भारत की पहली 'फेरारी गर्ल' बन गई हैं.

कौन हैं डायना पुंडोले?
डायना पुंडोले महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली हैं. वह एक पूर्व टीचर हैं और दो बच्चों की मां भी हैं. आम तौर पर समाज में माना जाता है कि शादी और बच्चों के बाद महिलाएं अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन डायना ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया. उन्होंने रेसिंग ट्रैक को अपना नया ठिकाना बनाया और आज वह देश की महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी हैं.
कैसे बनीं भारत की पहली 'फेरारी गर्ल'?
डायना ने 'फेरारी सीरीज' में हिस्सा लिया है. इस रेसिंग सीरीज में हिस्सा लेने वाली वह भारत की पहली महिला रेसर बन गई हैं. इसी ऐतिहासिक कामयाबी के कारण उन्हें अब पूरे देश में 'फेरारी गर्ल' के नाम से पुकारा जा रहा है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके हौसलों में उड़ान है, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.

F1 ट्रैक पर सुपरकार का रोमांच
इस रेसिंग सीरीज के दौरान डायना ने दुनिया के सबसे मशहूर इंटरनेशनल फॉर्मूला वन (F1) सर्किट्स पर अपनी गाड़ी दौड़ाई. उन्होंने बेहद शक्तिशाली और तेज रफ्तार वाली 'फेरारी 296 चैलेंज' (Ferrari 296 Challenge) कार को पायलट किया और रफ्तार के सबसे बड़े इंटरनेशनल मंच पर तिरंगा लहराकर उन्होंने खेल जगत में भारत का नाम ऊंचा किया है. आज पूरा देश उनकी इस सफलता पर उन्हें बधाई दे रहा है.
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