युवाओं में बाइक को अपने हिसाब से मॉडिफाई करने का चलन काफी बढ़ गया है. खासकर Royal Enfield और स्पोर्टी बाइक्स में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं. इनमें तेज आवाज करने वाले साइलेंसर और पटाखे जैसी आवाज निकालने वाले मॉडिफाइड एग्जॉस्ट भी शामिल हैं. लेकिन अगर आपने अपनी बाइक के कंपनी वाले साइलेंसर को हटाकर कोई फैंसी या मॉडिफाइड एग्जॉस्ट लगाया है, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है.
हाल ही में महाराष्ट्र के जलगांव में पुलिस ने अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैफिक पुलिस ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर रही है और सड़कों पर विशेष जांच अभियान चलाकर भारी चालान काटे जा रहे हैं. RTO नियमों के मुताबिक, बिना अनुमति वाहन के डिजाइन या कंपनी से मिले साइलेंसर में बदलाव करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है. ऐसे में आपको काफी जुर्माना भरना पड़ सकता है.
#WATCH | Maharashtra | Jalgaon Police initiates strict action against modified silencers that produce loud noise.
— ANI (@ANI) August 25, 2026
Under the direction of Superintendent of Police Shrikant Dhivare, a large-scale campaign is being conducted to remove such silencers from vehicles and destroy them… pic.twitter.com/vAa7smjetb
साइलेंसर बदलना पड़ सकता है भारी
जब कंपनियां बाइक तैयार करती हैं, तो उसमें लगे साइलेंसर में नॉइज और एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए खास फिल्टर और कैटेलिटिक कन्वर्टर दिए जाते हैं. ये साइलेंसर सरकार की तय नॉइज लिमिट और BS6 इमिशन स्टैंडर्ड को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं. लेकिन जब आप मार्केट से कोई लोकल या तेज आवाज वाला साइलेंसर लगाते हैं, तो इससे न सिर्फ जरूरत से ज्यादा शोर होता है, बल्कि हानिकारक गैसें भी सीधे एनवायरमेंट में जाने का खतरा बढ़ जाता है.
ऐसे साइलेंसर से निकलने वाली अचानक तेज आवाज सड़क पर दूसरे वाहन चालकों का ध्यान भटका सकती है और हादसे का खतरा भी बढ़ा सकती है. इसी वजह से भारत में इस तरह के मॉडिफाइड साइलेंसर को लेकर सख्ती की जाती है. इसको लेकर कड़ा नियम भी है. आइए आपको बताते हैं कि मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने पर कितने रुपये का जुर्माना लग सकता है.
लग सकता है हजारों रुपये का जुर्माना
अगर जांच के दौरान आपकी बाइक में मॉडिफाइड साइलेंसर पाया जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत कार्रवाई की जा सकती है. पहली बार नियम तोड़ने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, अगर बाइक से तय लिमिट से ज्यादा आवाज निकलती है या साइलेंसर पटाखे जैसी तेज आवाज करता है, तो साउंड पॉल्यूशन के लिए जुर्माना 10 हजार तक पहुंच सकता है. कुछ राज्यों में पुलिस मौके पर ही कार्रवाई करते हुए मैकेनिक से मॉडिफाइड साइलेंसर निकलवा सकती है. कुछ मामलों में ऐसे साइलेंसर को सड़क रोलर से नष्ट करने की कार्रवाई भी सामने आई है.
जब्त भी हो सकती है बाइक
मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने का नुकसान सिर्फ चालान तक सीमित नहीं है. अगर बाइक में लगा साइलेंसर शोर से जुड़े नियमों का गंभीर उल्लंघन करता पाया जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस बाइक को जब्त भी कर सकती है. वाहन जब्त होने के बाद आपको कोर्ट या आरटीओ के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं. इसके बाद बाइक में कंपनी का ओरिजिनल साइलेंसर दोबारा लगवाना होगा और आरटीओ अधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद ही वाहन वापस मिल सकता है.
बाइक में क्या करना चाहिए?
अगर आप ट्रैफिक चालान और कोर्ट-कचहरी की परेशानी से बचना चाहते हैं, तो बाइक में कंपनी का ओरिजिनल एग्जॉस्ट ही रखना सबसे सुरक्षित ऑप्शन है. अगर बाइक के लुक या आवाज में बदलाव करना चाहते हैं, तो केवल ब्रांडेड और ऑथोराइज्ड एग्जॉस्ट का इस्तेमाल करें. हालांकि, सबसे बेहतर ऑप्शन कंपनी की तरफ से दिया गया स्टॉक साइलेंसर ही है.
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