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This Article is From Jul 29, 2024

आज सावन के दूसरे सोमवार के दिन इस तरह करें शिव पूजा संपन्न, मान्यतानुसार मिलता है पूजा का फल

पहला सावन सोमवार बीत जाने के बाद अब दूसरे सावन सोमवार का व्रत रखा जाएगा. यहां जानिए दूसरे सावन सोमवार की पूजा विधि.

आज सावन के दूसरे सोमवार के दिन इस तरह करें शिव पूजा संपन्न, मान्यतानुसार मिलता है पूजा का फल
सावन सोमवार में महादेव की पूजा की जाती है.

Second Sawan Somwar: देवों के देव महादेव (Lord Shiva) का प्रिय माह सावन शुरू हो चुका है और पहला ही दिन सोमवार का दिन था जिसकी शुरुआत 22 जुलाई से हुई थी.  मान्यतानुसार सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि इस माह महादेव की पूरे मनोभाव से पूजा-आराधना की जाए तो भक्तों को भोलेनाथ की कृपा मिलती है. श्रावण के महीने में सावन सोमवार (Sawan Somwar) का खास महत्व होता है. पहला सावन सोमवार बीत जाने के बाद अब दूसरे सावन सोमवार का व्रत रखा जाएगा. यहां जानिए सावन का दूसरा सोमवार किस दिन है और कैसे की जा सकती है सावन सोमवार की पूजा. 

सावन के दूसरे सोमवार का महत्व 

सावन के महीने में हर सोमवार का विशेष महत्व होता है और इस बार तो सावन में चार नहीं बल्कि 5 सोमवार पड़ रहे हैं और दूसरा सोमवार 29 जुलाई 2024 के दिन मनाया जाएगा. इस दिन मां पार्वती और महादेव की साथ में पूजा करने का विशेष महत्व होता है‌. जिन साधकों के विवाह में अड़चन आ रही है वो सावन सोमवार का व्रत करके विवाह की अड़चनों को दूर कर सकते हैं और अच्छे वर की प्राप्ति के लिए भोलेनाथ और मां गौरी से प्रार्थना कर सकते हैं. 

सावन सोमवार व्रत पूजा विधि 

सावन के दूसरे सोमवार पर व्रत करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ या नए कपड़े पहनें. इसके बाद अपने मंदिर की सफाई करें, गंगाजल का छिड़काव करें. फिर भगवान शिव और मां पार्वती के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें. भगवान शिव का गुड़, दही, गंगाजल, दूध, घी और शक्कर आदि चीजों से रुद्राभिषेक करें. इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर उन्हें बेलपत्र, चंदन, अक्षत, फल आदि समर्पित करें. इस दौरान भगवान भोलेनाथ को सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं. इसके अलावा आप आलवा, दही, पंचामृत, भांग का भोग भी लगा सकते हैं. घी या सरसों के तेल का दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें, भगवान भोलेनाथ के मंत्रों का उच्चारण करें और आरती (Shiv Aarti) करके उनकी पूजा संपन्न करें. पूजा के बाद भगवान भोलेनाथ का प्रसाद सभी घर वालों को बांटे और खुद भी ग्रहण करें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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