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आज का पंचांग: ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर दुर्लभ शुभ संयोग, दान-जप और व्रत से मिलेगा विशेष पुण्य फल

ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा इस बार बेहद खास मानी जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान, जप, व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है. यह दुर्लभ संयोग सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का विशेष अवसर लेकर आया है.

आज का पंचांग: ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पर दुर्लभ शुभ संयोग, दान-जप और व्रत से मिलेगा विशेष पुण्य फल
आज का पावन दिन, पूजा-पाठ और दान से मिलेगी सुख-समृद्धि

Aaj ka Panchang 30 May 2026: ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शनिवार को पड़ रही है. मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया दान, जप और व्रत अन्य पूर्णिमाओं की तुलना में कई गुना अधिक कल्याणकारी माना जाता है.

अधिकमास का दुर्लभ संयोग

पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि अधिकमास का आगमन हर तीन साल में केवल एक बार होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है.

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ग्रहों की स्थिति और शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार शनिवार के दिन सूर्य वृषभ राशि में और चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा.

सर्वसिद्धिदायिनी पूर्णिमा का प्रभाव

अधिकमास की पूर्णिमा सर्वसिद्धिदायिनी होती है यानी कि यह हर तरह की मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाली है. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर व्रत रखने, पवित्र नदियों में स्नान करने और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करने से साधक को सामान्य दिनों के मुकाबले कई हजार गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

भगवान नारायण को समर्पित है यह तिथि

यह तिथि भगवान नारायण यानी भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन उपवास रखने और सत्यनारायण कथा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है.

विशेष पूजा विधि

इस दिन विशेष पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म स्नान करें. यदि संभव हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इसके बाद स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण कर घर के मंदिर पर गंगाजल का छिड़काव करें और वहां एक चौकी रखें. उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. अब श्री हरि को फूल, फल, चंदन, अक्षत, धूप-दीप अर्पित करें और भोग में तुलसी पत्ती जरूर शामिल करें. इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें. साथ ही विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें.

इन वस्तुओं का दान है महापुण्यदायी

ज्येष्ठ का महीना होने के कारण गर्मी बहुत होती है. इसलिए अधिकमास की पूर्णिमा पर जल से भरी मटकी यानी घड़ा, सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र या अन्न का दान महापुण्यदायी माना जाता है. किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर दें.

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