चण्डीगढ़:
पंजाब में पिछले चार दशकों में जो नहीं हुआ वह शिरोमणि अकाली दल (एसएडी)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन ने कर दिखाया। सत्ता विरोधी रुझानों को दरकिनार करते हुए इस गठबंधन ने लगातार दूसरी बार पंजाब की सत्ता पर कब्जा जमाया है।
राज्य की 117 सीटों में से अकाली-भाजपा गठबंधन ने 68 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है जबकि कांग्रेस तमाम कोशिशों के बावजूद 46 सीटों पर आकर सिमट गई। अकाली दल को 56 सीटों पर विजय हासिल हुई है तो भाजपा को 12 सीटों पर फतह मिली है।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जहां जीत पर खुशी जताई है, वहीं कांग्रेस ने चुनाव नतीजों पर 'हैरानी' जताई है।
निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अकाली दल-भाजपा गठबंधन राज्य की 117 सदस्यीय विधानसभा में 68 सीटें जीत चुका है जबकि कांग्रेस 46 सीटों पर जीत चुकी है। तीन सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई हैं।
कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए यह गठबंधन लगातार दूसरी बार राज्य की सत्ता में वापस आया है। यह अपने आप में एक इतिहास है। पिछले करीब चार दशक में कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज होने में कामयाब नहीं रही।
चुनाव परिणाम से बेहद खुश दिख रहे प्रकाश सिंह बादल (84) ने गांव बादल में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, "मैं पंजाब की जनता को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझमें दोबारा विश्वास दिखाया। उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। उनकी वजह से हमें इतनी बड़ी जीत मिली है।"
पुत्र व अकाली दल के अध्यक्ष तथा राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ प्रकाश सिंह बादल ने कहा, "हमारी जीत के दो कारण हैं। हम राज्य में शांति एवं विकास का एजेंडा लेकर लोगों के पास गए। मैं खुश हूं कि हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। नई सरकार में हम और मेहनत से काम करेंगे।"
प्रकाश सिंह बादल ने यह भी कहा कि वह बुधवार को पूरे परिवार के साथ हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) मत्था टेकने जाएंगे।
लाम्बी विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कांग्रेस उम्मीदवार व अपने चचेरे भाई महेशिंदर सिंह बादल को 24,739 मतों से पराजित किया जबकि जलालाबाद सीट से उनके बेटे व अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल 50,246 मतों से जीत हासिल की। सुखबीर ने निर्दलीय उम्मीदवार हंसराज जोसान को पराजित किया।
क्रिकेट की दुनिया से राजनीति में आए भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने अमृतसर पूर्व से जीत हासिल की है। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सिमरप्रीत कौर को 7099 मतों से हराया। पूर्व ओलिंपिक खिलाड़ी परगट सिंह भी जीत गए हैं। उन्होंने अपने निकटमत कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी जगबीर सिंह बरार को 6798 मतों से हराया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोरंजन कालिया भी जीत गए हैं। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार राजिंदर बेरी को 1065 मतों से हराया।
अमरिंदर सिंह पटियाला शहरी विधानसभा क्षेत्र से 42,000 मतों के अंतर से जीत गए, जबकि उनके बेटे रनिंदर सिंह समाना सीट से चुनाव हार गए। उन्हें अकाली दल के सुरजीत सिंह रखरा ने सात हजार से अधिक मतों ने हराया।
पंजाब में नई सरकार के शपथ-ग्रहण से पहले गुरुवार को अकाली दल और भाजपा के बीच बैठक की सम्भावना भी है।
उधर, कांग्रेस ने चुनाव में हार स्वीकार कर ली है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने यहां अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, "हमने हार स्वीकार कर ली है। हम देखेंगे कि कहां गलती हुई।"
चुनाव नतीजों पर हैरानी जताते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। नतीजे चौंकाने वाले हैं।"
दरअसल, कांग्रेस को उम्मीद थी कि राज्य के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के अकाली दल से अलग होने के कारण सत्ताधारी गठबंधन कमजोर होगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अकाली दल से अलग होकर पंजाब पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का गठन करने वाले मनप्रीत स्वयं मौर और गिदड़बाहा, दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव हार गए। पीपीपी एक भी सीट नहीं जीत सकी है और इस हार से यह साफ हो गया है पंजाब में तीसरा मोर्चा फिलहाल दूर की कौड़ी है।
राज्य की 117 सीटों में से अकाली-भाजपा गठबंधन ने 68 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है जबकि कांग्रेस तमाम कोशिशों के बावजूद 46 सीटों पर आकर सिमट गई। अकाली दल को 56 सीटों पर विजय हासिल हुई है तो भाजपा को 12 सीटों पर फतह मिली है।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जहां जीत पर खुशी जताई है, वहीं कांग्रेस ने चुनाव नतीजों पर 'हैरानी' जताई है।
निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अकाली दल-भाजपा गठबंधन राज्य की 117 सदस्यीय विधानसभा में 68 सीटें जीत चुका है जबकि कांग्रेस 46 सीटों पर जीत चुकी है। तीन सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई हैं।
कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए यह गठबंधन लगातार दूसरी बार राज्य की सत्ता में वापस आया है। यह अपने आप में एक इतिहास है। पिछले करीब चार दशक में कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज होने में कामयाब नहीं रही।
चुनाव परिणाम से बेहद खुश दिख रहे प्रकाश सिंह बादल (84) ने गांव बादल में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, "मैं पंजाब की जनता को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझमें दोबारा विश्वास दिखाया। उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। उनकी वजह से हमें इतनी बड़ी जीत मिली है।"
पुत्र व अकाली दल के अध्यक्ष तथा राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ प्रकाश सिंह बादल ने कहा, "हमारी जीत के दो कारण हैं। हम राज्य में शांति एवं विकास का एजेंडा लेकर लोगों के पास गए। मैं खुश हूं कि हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। नई सरकार में हम और मेहनत से काम करेंगे।"
प्रकाश सिंह बादल ने यह भी कहा कि वह बुधवार को पूरे परिवार के साथ हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) मत्था टेकने जाएंगे।
लाम्बी विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कांग्रेस उम्मीदवार व अपने चचेरे भाई महेशिंदर सिंह बादल को 24,739 मतों से पराजित किया जबकि जलालाबाद सीट से उनके बेटे व अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल 50,246 मतों से जीत हासिल की। सुखबीर ने निर्दलीय उम्मीदवार हंसराज जोसान को पराजित किया।
क्रिकेट की दुनिया से राजनीति में आए भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने अमृतसर पूर्व से जीत हासिल की है। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सिमरप्रीत कौर को 7099 मतों से हराया। पूर्व ओलिंपिक खिलाड़ी परगट सिंह भी जीत गए हैं। उन्होंने अपने निकटमत कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी जगबीर सिंह बरार को 6798 मतों से हराया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोरंजन कालिया भी जीत गए हैं। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार राजिंदर बेरी को 1065 मतों से हराया।
अमरिंदर सिंह पटियाला शहरी विधानसभा क्षेत्र से 42,000 मतों के अंतर से जीत गए, जबकि उनके बेटे रनिंदर सिंह समाना सीट से चुनाव हार गए। उन्हें अकाली दल के सुरजीत सिंह रखरा ने सात हजार से अधिक मतों ने हराया।
पंजाब में नई सरकार के शपथ-ग्रहण से पहले गुरुवार को अकाली दल और भाजपा के बीच बैठक की सम्भावना भी है।
उधर, कांग्रेस ने चुनाव में हार स्वीकार कर ली है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने यहां अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, "हमने हार स्वीकार कर ली है। हम देखेंगे कि कहां गलती हुई।"
चुनाव नतीजों पर हैरानी जताते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। नतीजे चौंकाने वाले हैं।"
दरअसल, कांग्रेस को उम्मीद थी कि राज्य के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल के अकाली दल से अलग होने के कारण सत्ताधारी गठबंधन कमजोर होगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अकाली दल से अलग होकर पंजाब पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का गठन करने वाले मनप्रीत स्वयं मौर और गिदड़बाहा, दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव हार गए। पीपीपी एक भी सीट नहीं जीत सकी है और इस हार से यह साफ हो गया है पंजाब में तीसरा मोर्चा फिलहाल दूर की कौड़ी है।
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