
दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा और इसके संसदीय बोर्ड के सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे इस वर्ष मई में बोर्ड से पूर्व राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी के निष्कासन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर अपना जवाब दें।
भाजपा और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी सहित संसदीय बोर्ड के सदस्यों को नोटिस जारी करते हुए संयुक्त रजिस्ट्रार हिमानी मल्होत्रा ने 30 जनवरी 2014 तक जेठमलानी की याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मल्होत्रा ने कहा, ‘प्रतिवादियों (भाजपा और बोर्ड सदस्यों) को स्पीड पोस्ट या कूरियर के माध्यम से समन जारी किया जाएगा।’ जेठमलानी की तरफ से उपस्थित होते हुए वकील अशोक अरोड़ा ने कहा कि पार्टी में कई लोग हैं जो प्रधानमंत्री पद की आकांक्षा रखते हैं और उनके मुवक्किल एवं मशहूर वकील के कारण वे सफल नहीं हो सके और असंतुष्ट हो गए। उन्होंने कहा कि जेठमलानी 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी का समर्थन कर रहे थे।
अरोड़ा ने कहा, ‘मोदी को मेरे पुरजोर समर्थन के कारण उन्होंने (बोर्ड सदस्यों ने) मेरे खिलाफ मीडिया एवं अन्य सार्वजनिक मंचों पर बयान जारी किए।’ वकील ने कहा कि बोर्ड के कुछ सदस्य जेठमलानी से जूनियर हैं और उनके व्यवहार अवांछित थे।
उनके हलफनामे पर संयुक्त रजिस्ट्रार ने जेठमलानी के वकील से पूछा कि क्या उन्होंने पार्टी के साथ मुद्दे पर सुलह का प्रयास किया था।
भाजपा संसदीय बोर्ड से 50 लाख रुपये का मुआवजा मांगने के अलावा जेठमलानी ने अदालत से मांग की कि वह बोर्ड के निर्णय को ‘खारिज’ करे। जेठमलानी ने याचिका में भले ही वाजपेयी और मोदी को पक्षकार बनाया है, लेकिन उन्होंने उनसे कोई मुआवजा नहीं मांगा है।
जेठमलानी ने अपनी याचिका में 26 नवम्बर 2012 को पार्टी की तरफ से जारी कारण बताओ नोटिस को यह कहते हुए चुनौती दी कि ‘यह वादी (जेठमलानी) की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।’ वरिष्ठ वकील सह नेता को इस वर्ष मई में पार्टी से तब निकाल दिया गया था जब उन्होंने सुषमा स्वराज और अरुण जेटली सहित बोर्ड के कुछ सदस्यों की खुलेआम आलोचना की थी।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं