दुनिया में हीरे आमतौर पर धरती की गहराई में 150 से 250 किलोमीटर नीचे अत्यधिक दबाव और तापमान में बनते हैं. इन्हें ढूंढना आसान नहीं होता. लेकिन, अफ्रीका के नामीबिया में एक ऐसा इलाका है, जहां समुद्र तट और आसपास की जमीन हीरों से इतनी समृद्ध है कि इनकी कीमत कई शहरों से भी ज्यादा मानी जाती है.

जर्मनों ने क्यों बनाया प्रतिबंधित क्षेत्र?
1908 में नामीबिया के ल्यूडरिट्ज़ इलाके के पास एक रेलवे कर्मचारी ऑगस्ट स्टाउच को हीरे मिले. इस खोज के बाद जर्मन औपनिवेशिक सरकार ने पूरे इलाके को स्पेर्गेबिट (प्रतिबंधित क्षेत्र) घोषित कर दिया. इसका उद्देश्य हीरों के खनन पर नियंत्रण रखना और अवैध खुदाई को रोकना था. इस क्षेत्र में केवल खनन से जुड़े लोगों को ही प्रवेश की अनुमति थी. प्रथम विश्व युद्ध के बाद भी यह प्रतिबंध जारी रहा, जब 1915 में दक्षिण अफ्रीका ने इस क्षेत्र का नियंत्रण संभाला. बाद में यहां की खनन गतिविधियां विभिन्न कंपनियों और नामीबिया सरकार की साझेदारी में जारी रहीं.

कैसे बने ‘डायमंड बीच'?
शुरुआत में हीरे जमीन से निकाले जाते थे, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों को तट के पास हीरे युक्त कंकड़ और मिट्टी मिली. दरअसल, लाखों वर्षों तक ऑरेंज नदी दक्षिणी अफ्रीका के अंदरूनी हिस्सों से हीरों को बहाकर अटलांटिक महासागर तक लाती रही. सन डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 1950 के दशक से समुद्र के भीतर व्यावसायिक खनन शुरू हुआ, जिसे 1980 के दशक में आधुनिक तकनीक के साथ बड़े स्तर पर बढ़ाया गया. वर्ल्ड डायमंड काउंसिल के मुताबिक, 1961 से 1970 के बीच समुद्र की सतह से केवल 20 मीटर नीचे से ही 15 लाख कैरेट हीरे निकाले गए थे. आज नामीबिया में समुद्र के नीचे 90 से 150 मीटर गहराई तक विशेष जहाजों की मदद से खनन किया जाता है. अनुमान है कि यहां 80 लाख कैरेट से अधिक समुद्री हीरों का भंडार मौजूद है. यही कारण है कि इस प्रतिबंधित तटीय क्षेत्र के बीच देश के कई शहरों से ज्यादा मूल्यवान माने जाते हैं.

अब पर्यटन के लिए क्या खुला है
आज यह इलाका त्साउ खाएब नेशनल पार्क का हिस्सा है और कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंधों में ढील दी गई है. यहां का कोलमैनस्कोप घोस्ट टाउन पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है, जहां रेत से भरी जर्मन काल की इमारतें देखने को मिलती हैं. इसके अलावा पोमोना और एलिजाबेथ बे जैसे पुराने खनन कस्बे, डियाज़ पॉइंट का लाइटहाउस और 55 मीटर ऊंचा बोगेनफेल्स रॉक आर्च भी खास परमिट के साथ देखा जा सकता है. आज भी खनन, पर्यटन, मछली पालन और कृषि नामीबिया की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं, लेकिन समुद्र तटों के नीचे छिपे हीरे इस देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा माने जाते हैं.
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