भारत आने वाले विदेशी पर्यटक अक्सर यहां की संस्कृति, खान-पान और मेहमाननवाज़ी की तारीफ करते नजर आते हैं. इस बार एक यूक्रेनी कंटेंट क्रिएटर भारतीय सिनेमाघरों के अनुभव से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इसकी तुलना यूरोप के थिएटरों से कर दी. उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उनकी पोस्ट पर अब लोग तरह-तरह के कमेंट भी कर रहे हैं.
भारतीय सिनेमाघरों ने कर दिया हैरान
यूक्रेन की कंटेंट क्रिएटर सैंड्रा ऑन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने भारतीय और यूरोपीय सिनेमाघरों के अनुभव की तुलना की. सैंड्रा ने कहा कि भारत में मिलने वाली सुविधाएं और मेहमाननवाजी उन्हें पूरी तरह चौंका दिया.
सीट पर बैठकर मंगाया खाना
सैंड्रा ने आगे लिखा कि भारत में फिल्म देखते समय दर्शक अपनी सीट पर बैठे-बैठे मोबाइल ऐप के जरिए खाना ऑर्डर कर सकते हैं. कुछ ही देर में खाना सीधे उनकी सीट तक पहुंच जाता है. उन्होंने कहा कि यूरोप में आमतौर पर सिर्फ पॉपकॉर्न, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक जैसे स्नैक्स ही मिलते हैं, जबकि भारत में सिनेमाघरों में रेस्तरां जैसे पूरे मेन्यू उपलब्ध होते हैं. यहां लोग फिल्म देखते हुए पूरा खाना भी खा सकते हैं.
सुरक्षा व्यवस्था ने भी किया प्रभावित
सैंड्रा ने भारतीय सिनेमाघरों की सुरक्षा व्यवस्था की भी तारीफ की. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर बैग चेकिंग और मेटल डिटेक्टर जैसी जांच होती है, जो उन्हें एयरपोर्ट जैसी चैकिंग व्यवस्था जैसा फील हुआ. मूवी देखने आने वाले लोगों की सुरक्षा को यहां काफी गंभीरता से लिया जाता है.
सोशल मीडिया पर लोगों किए कमेंट
सैंड्रा का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग रिएक्शन सामने आए. कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा कि भारतीय सिनेमाघरों का अनुभव वाकई अलग है. वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि हर चीज की तुलना भारत और यूरोप से क्यों की जाती है. एक शख्स ने लिखा कि क्या आपके पास दिखाने के लिए और कुछ नहीं है. आप जैसे लोग हमेशा किसी ना किसी बात को लेकर तुलना करते रहते हैं और कभी ये यूक्रेनी या कभी वो यूरोपीय चीजें दिखाते रहते हैं. वहीं दूसरे शख्स ने लिखा, हां, ऐसा ही होता है जब आपके पड़ोसी जर्मनी और फ्रांस से हो और जब पड़ोसी पाकिस्तान हो. एक तरफ आम सभ्य लोग जो तरक्की करना चाहते हैं और दूसरी तरफ कट्टर सोच वाले लोग. वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि अरे वाह, हां. किसी ने मुझे फिल्म के बीच में होने वाले इंटरमिशन के बारे में नहीं बताया था और मैं हैरान रह गया था. लेकिन यह आसान है. साथ ही, वहां के लोगों ने बताया कि कुछ समय पहले तक, हर स्क्रीनिंग से पहले राष्ट्रगान बजाया जाता था.
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