
ऑनलाइन मिलेंगे पंडित जी
इंटरनेट पर आपको क्या नहीं मिलता? वह सेवाएं जिनके बारे में आपने कभी सोचा भी न होगा कि आपको इंटरनेट पर मिल सकती हैं, वे भी अब नेट पर उपबल्ध हैं। अगर आपको घर में पूजा करवानी है और आप किसी पंडित को नहीं खोज पा रहे हैं तो अब आपकी यह खोज भी इंटरनेट के जरिए आसान हो जाती है। साथ ही यह दोतरफा नफे का मामला है। यदि आप खुद पंडिताई करते हैं लेकिन ग्राहक मिलने में मुश्किल आ रही है तो आप यहां अपने लिए ग्राहक भी खोज सकते हैं।
दोतरफा नफे का सौदा...
ईटी में इस पर एक खबर छपी है जिसके मुताबिक, अब कई वेबसाइट्स खुल गई हैं जहां आप पूजा विशेष के लिए संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, यदि आप खुद पंडित हैं तो रजिस्टर कर सकते हैं। इस खबर के मुताबिक, कुछ समय पहले मोहन शुक्ला ने बड़ी अनिच्छा से अपने पिता की विरासत संभालते हुए पंडिताई का काम शुरू किया था। यह काम बड़ा मुश्किल था। काम के लंबे घंटों के बदले उन्हें महीने में बमुश्किल 10,000 रुपये मिलते थे। त्योहारों में कमाई बढ़ती तो थी, लेकिन मुंबई जैसे शहर में रहने के लिए यह पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में जब शुक्ला को एक प्राइवेट फर्म में जॉब का ऑफर मिला, उन्होंने इसे तुरंत लपक लिया।
सर्विस एग्रीगेटर्स का ही काम...
शुक्ला ने अब फिर पूजा-पाठ कराना शुरू कर दिया है। वह महीने में कम से कम 10 पूजा आयोजन संपन्न कराते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि उनका मन कैसे बदल गया? दरअसल, एक साल पहले शुरू हुए 'वेयर इज माई पंडित' नामक पोर्टल के कारण ऐसा मुमकिन हुआ। इस पोर्टल के साथ 150 पंडित सीधे तौर पर जुड़े हैं। यह पोर्टल उसी तर्ज पर काम करता है, जिस तरह ज्यादातर सर्विस एग्रीगेटर्स करते हैं।
पूजा के लिए अनुरोध हासिल होने के बाद क्लाइंट की जरूरतों और पंडित की काबिलियत के हिसाब से उन्हें बुलाया जाता है। 'वेयर इज माई पंडित' अब अकेली ऐसी वेबसाइट नहीं रह गई है। हाल के महीनों में देशभर में ऐसी कई वेबसाइट्स लॉन्च की गई हैं। चेन्नै की वेबसाइट 'प्रीस्ट सर्विसेज' कुंभकोणम के पुजारियों को मौका मुहैया कराने में काफी अहम रही है। इससे पहले ज्यादा कमाई के लिए ये पंडित ड्राइवर बन गए थे और अब फिर से अपने मूल प्रोफेशन में लौट रहे हैं।
ई-पूजा का स्कोप भी बढ़ा..
'बुक योर पंडित' के बिजनस हेड ऋषिकेश कहते हैं, 'ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिये पंडितों को अपनी पहुंच बढ़ाने, बेहतर कस्टमर हासिल करने और इनकम में बढ़ोतरी में मदद मिली है।' कुछ पंडित तो रूस और नीदरलैंड्स में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए ई-पूजा भी कराते हैं। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग ऐसे पोर्टल्स के जरिये लोकल पंडितों को की सेवाएं ले सकते हैं।
इस पोर्ट्ल पर सबसे ज्यादा कॉल गृह प्रवेश पूजा....
'पंडित ऑन डिमांड' नामक पोर्टल को सबसे ज्यादा कॉल गृह प्रवेश पूजा के लिए आती है। क्लाइंट्स से इस तरह की पूजा के लिए तकरीबन 6,000 रु लिए जाते हैं जिनमें से पंडित को 2,500 रुपये मिलते हैं। 'घर का पंडित' पोर्टल के को-फाउंडर राहुल कुमार ने बताया, 'पीक सीजन में पंडित हर हफ्ते 10 पूजा करवाते हैं।'
हालांकि पोर्टल लेते हैं काफी ज्यादा कमिशन..
इस तरह के पोर्टल काफी ज्यादा कमिशन लेते हैं, लेकिन पंडित इन्हें भगवान की तरफ से भेजे गए मौके की तरह देखते हैं। पंडिताई का काम करने वाले और शुक्ला के साथी समीर बाधेका ने बताया, 'वेयर इज माई पंडित जैसी वेबसाइट्स से हमें सुरक्षा मिल रही है।' इन पोर्टल्स के लॉन्च होने से पहले पंडितों का टेक्नॉलजी से संपर्क सिर्फ जस्टडायल के संग था।
दोतरफा नफे का सौदा...
ईटी में इस पर एक खबर छपी है जिसके मुताबिक, अब कई वेबसाइट्स खुल गई हैं जहां आप पूजा विशेष के लिए संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, यदि आप खुद पंडित हैं तो रजिस्टर कर सकते हैं। इस खबर के मुताबिक, कुछ समय पहले मोहन शुक्ला ने बड़ी अनिच्छा से अपने पिता की विरासत संभालते हुए पंडिताई का काम शुरू किया था। यह काम बड़ा मुश्किल था। काम के लंबे घंटों के बदले उन्हें महीने में बमुश्किल 10,000 रुपये मिलते थे। त्योहारों में कमाई बढ़ती तो थी, लेकिन मुंबई जैसे शहर में रहने के लिए यह पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में जब शुक्ला को एक प्राइवेट फर्म में जॉब का ऑफर मिला, उन्होंने इसे तुरंत लपक लिया।
सर्विस एग्रीगेटर्स का ही काम...
शुक्ला ने अब फिर पूजा-पाठ कराना शुरू कर दिया है। वह महीने में कम से कम 10 पूजा आयोजन संपन्न कराते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि उनका मन कैसे बदल गया? दरअसल, एक साल पहले शुरू हुए 'वेयर इज माई पंडित' नामक पोर्टल के कारण ऐसा मुमकिन हुआ। इस पोर्टल के साथ 150 पंडित सीधे तौर पर जुड़े हैं। यह पोर्टल उसी तर्ज पर काम करता है, जिस तरह ज्यादातर सर्विस एग्रीगेटर्स करते हैं।
पूजा के लिए अनुरोध हासिल होने के बाद क्लाइंट की जरूरतों और पंडित की काबिलियत के हिसाब से उन्हें बुलाया जाता है। 'वेयर इज माई पंडित' अब अकेली ऐसी वेबसाइट नहीं रह गई है। हाल के महीनों में देशभर में ऐसी कई वेबसाइट्स लॉन्च की गई हैं। चेन्नै की वेबसाइट 'प्रीस्ट सर्विसेज' कुंभकोणम के पुजारियों को मौका मुहैया कराने में काफी अहम रही है। इससे पहले ज्यादा कमाई के लिए ये पंडित ड्राइवर बन गए थे और अब फिर से अपने मूल प्रोफेशन में लौट रहे हैं।
ई-पूजा का स्कोप भी बढ़ा..
'बुक योर पंडित' के बिजनस हेड ऋषिकेश कहते हैं, 'ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिये पंडितों को अपनी पहुंच बढ़ाने, बेहतर कस्टमर हासिल करने और इनकम में बढ़ोतरी में मदद मिली है।' कुछ पंडित तो रूस और नीदरलैंड्स में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए ई-पूजा भी कराते हैं। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग ऐसे पोर्टल्स के जरिये लोकल पंडितों को की सेवाएं ले सकते हैं।
इस पोर्ट्ल पर सबसे ज्यादा कॉल गृह प्रवेश पूजा....
'पंडित ऑन डिमांड' नामक पोर्टल को सबसे ज्यादा कॉल गृह प्रवेश पूजा के लिए आती है। क्लाइंट्स से इस तरह की पूजा के लिए तकरीबन 6,000 रु लिए जाते हैं जिनमें से पंडित को 2,500 रुपये मिलते हैं। 'घर का पंडित' पोर्टल के को-फाउंडर राहुल कुमार ने बताया, 'पीक सीजन में पंडित हर हफ्ते 10 पूजा करवाते हैं।'
हालांकि पोर्टल लेते हैं काफी ज्यादा कमिशन..
इस तरह के पोर्टल काफी ज्यादा कमिशन लेते हैं, लेकिन पंडित इन्हें भगवान की तरफ से भेजे गए मौके की तरह देखते हैं। पंडिताई का काम करने वाले और शुक्ला के साथी समीर बाधेका ने बताया, 'वेयर इज माई पंडित जैसी वेबसाइट्स से हमें सुरक्षा मिल रही है।' इन पोर्टल्स के लॉन्च होने से पहले पंडितों का टेक्नॉलजी से संपर्क सिर्फ जस्टडायल के संग था।
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