
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी हाल में आगरा की रैली में जिस कुर्सी पर बैठे थे, उस कुर्सी को अब कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। 21 नवंबर की विजय शंखनाद रैली के दौरान मोदी इस कुर्सी पर विराजे थे।
सबसे पहले आगरा के भाजपा लोकसभा सदस्य रामशंकर कथेरिया ने यह कुर्सी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। दो विधायक योगेंद्र उपाध्याय और जगन गर्ग ने भी कुर्सी खरीदने की पेशकश की थी। हालांकि, बाद में कथेरिया ने कहा कि उन्होंने कभी कुर्सी खरीदने की पेशकश नहीं की। उन्होंने कहा, यह मीडिया की बनाई कहानी है।
पार्टी के अन्य सदस्य कौशलेंद्र चौहान ने कहा कि वह 10 लाख रुपये चुकाकर भी कुर्सी खरीदने के लिए तैयार थे, लेकिन बाद में विचार बदल दिया। हालांकि, ब्रज क्षेत्र के भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि कुर्सी की बिक्री और खरीद से पार्टी का कुछ लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा, यह निजी मामला हो सकता है, लेकिन पार्टी का ध्यान लोगों की सेवा पर है, कुर्सी पर नहीं। इससे पहले मीडिया में कहा गया था कि कुर्सी चर्चित संपत्ति बन गई है, क्योंकि कई लोग यादगार निशानी के रूप में इसे खरीदना चाहते हैं। लेकिन बाद में भाजपा नेता प्रमोद उपाध्याय के स्वामित्व वाले टेंट एवं फर्नीचर हाउस की ओर से कहा गया कि प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन मैं किसी कीमत पर कुर्सी नहीं बेचूंगा।
भाजपा नेताओं ने नाम ने छापने की शर्त पर कहा कि झांसी की रैली में मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए सोफे को बेचने के लिए बेशकीमती बताया गया था, लेकिन इसकी बिक्री की कीमत कभी 30,000 रुपये से आगे नहीं बढ़ी और कोई खरीदार भी नहीं मिला।
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