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दुनिया के सबसे महंगे शहर के चौंकाने वाले 'ताबूत जैसे घर'...देखकर ही होने लगेगी घुटन

चमकती इमारतें, रोशन आसमान और दौलत की दुनिया, लेकिन उसी शहर के एक कोने में ऐसी जिंदगी बसती है, जहां इंसान सीधा खड़ा तक नहीं हो सकता. यहां तक की सांस लेना भी किसी जद्दोजहद से कम नहीं. ये कहानी है तंगी, मजबूरी और शहर की सख्त हकीकत की.

दुनिया के सबसे महंगे शहर के चौंकाने वाले 'ताबूत जैसे घर'...देखकर ही होने लगेगी घुटन
हांगकांग के इन छोटे-छोटे अपार्टमेंटों को देखकर ही आपको घुटन महसूस होने लगेगी

16-Sq-Ft Coffin Homes: सोचिए, अगर आपका कमरा इतना छोटा हो कि आप सीधा खड़े भी न हो सकें. न हाथ फैला सकें, न आराम से करवट ले सकें. यह कोई ख्याली बात नहीं, बल्कि एक विकसित शहर की सख्त हकीकत है, जो चमक के पीछे छिपी हुई है. बाहर से रौनक, अंदर से तंगी. रोशनी से भरा स्काईलाइन, मगर हजारों लोगों की जिंदगी अंधेरी सी डिब्बों में कैद. ये कहानी है उस शहर की, जहां घर सपना नहीं, बल्कि एक महंगा इम्तिहान बन चुका है.

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दुनिया का सबसे महंगा घर बाजार (World's Most Expensive Housing Market)

हॉन्ग कॉन्ग को बीते एक दशक से दुनिया का सबसे महंगा हाउसिंग मार्केट कहा जाता है. यहां प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छूती हैं. ग्लोबल पॉपुलेशन ग्रोथ और सीमित जमीन की वजह से रिहायशी जगह की भारी किल्लत है. इसी कमी ने हजारों लोगों को ऐसे घरों में रहने पर मजबूर कर दिया है, जिन्हें 'कॉफिन होम्स' कहा जाता है. इन घरों का साइज महज 16 स्क्वायर फीट तक होता है. यानी एक बिस्तर जितनी जगह. हाल ही में यूट्यूबर Ruhi Cenet ने अपने वीडियो में इन घरों की झलक दिखाई और बताया कि, ये दुनिया के सबसे छोटे अपार्टमेंट्स में से एक हैं.

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किराया कम जगह ज्यादा बोझ (High Rent For Tiny Spaces)

हैरानी की बात ये है कि इतनी छोटी जगह का किराया भी 230 से 450 डॉलर महीना तक पहुंच जाता है. भारतीय मुद्रा में करीब 20 हजार से 45 हजार रुपये. अनुमान है कि 2 से 2.2 लाख लोग ऐसे सबडिवाइडेड या कॉफिन स्टाइल हाउसिंग में रहते हैं. पब्लिक हाउसिंग का विकल्प है, लेकिन वेटिंग पीरियड 5 साल तक लंबा हो सकता है. ऐसे में कम आमदनी वाले मजदूर, बुजुर्ग और प्रवासी लोग मजबूरी में इन्हीं तंग कमरों को अपना आशियाना बना लेते हैं.

दमघोंटू हालात और सेहत का खतरा (most expensive housing market)

इन कमरों में वेंटिलेशन की कमी, सीलन, फफूंदी और कीड़े आम बात है. गर्मियों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला जाता है. कई जगह रसोई नहीं होती, लोग बाथरूम में ही सब्जियां धोकर खाना बनाते हैं. बिजली की वायरिंग भी ओवरलोड रहती है, जिससे खतरे और बढ़ जाते हैं. ये खबर दिखाती है कि दुनिया के सबसे अमीर शहरों में भी आवास संकट कितना गंभीर है. विकास की चमक के पीछे छिपी ये सच्चाई इंसानी जिंदगी की असल तस्वीर पेश करती है. हॉन्ग कॉन्ग के कॉफिन होम्स सिर्फ एक हाउसिंग समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता की कहानी हैं. सवाल ये है कि क्या भविष्य में इन लोगों को बेहतर जिंदगी नसीब होगी?

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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