China ECMO Miracle Story: मौत और जिंदगी के बीच की लकीर बहुत बारीक होती है, लेकिन चीन के एक 40 साल के शख्स ने तो जैसे 'यमराज' को ही 'वेटिंग लिस्ट' में डाल दिया. हुआ ये कि इस बंदे को हार्ट अटैक आया. डॉक्टरों ने बिजली के झटके (Defibrillation) दिए, खूब जोर लगाया, पर दिल था कि टस से मस नहीं हुआ. पूरे 40 घंटे बीत गए, धड़कन का नामोनिशान नहीं था, मगर डॉक्टर हार मानने को तैयार नहीं थे.
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ईसीएमओ मशीन बनी 'आर्टिफिशियल फरिश्ता' (China Heart stop 40 hours)
जब उम्मीद की सारी मोमबत्तियां बुझने लगीं, तब डॉक्टरों ने सहारा लिया 'ECMO' (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) तकनीक का. इसे आप चलता-फिरता कृत्रिम दिल और फेफड़ा कह सकते हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, यह मशीन शरीर के गंदे खून से कार्बन डाइऑक्साइड निकालती है और उसमें ताजी ऑक्सीजन भरकर वापस पंप कर देती है. इस मशीन ने उस शख्स के अंगों को तब तक जिंदा रखा, जब तक उसके असली दिल ने दोबारा 'धक-धक' करना शुरू नहीं कर दिया. करीब 20 दिनों के इलाज के बाद वो शख्स अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से बाहर निकला.

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जेब ढीली करने वाला है ये महंगा 'करिश्मा' (A very expensive life saving miracle)
कहते हैं ना कि जान है तो जहान है, पर इस जहान को बचाने के लिए जेब भी भारी होनी चाहिए. चीन में इस मशीन को सिर्फ चालू करने का खर्चा ही करीब 6-7 लाख रुपये (50,000 युआन) आता है और फिर हर दिन का किराया अलग से लाखों में होता है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि, ये बंदा सिर्फ खुशनसीब नहीं है, बल्कि इसके पास इलाज के पैसे थे, ये उसकी सबसे बड़ी खुशकिस्मती है. अस्पताल के मुताबिक, इस तकनीक ने मौत के मुंह से वापस आने की उम्मीद को 1% से बढ़ाकर 50% तक पहुंचा दिया है. हालांकि, इसमें खून के थक्के जमने और ब्लीडिंग का खतरा बना रहता है, जिसके लिए डॉक्टरों को उस्ताद होना जरूरी है.
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चीन का यह मामला साबित करता है कि मेडिकल साइंस अब उस मुकाम पर है, जहां वो रुकी हुई सांसों को भी दोबारा चलाने का दम रखती है. हालांकि, ये करिश्मा हर किसी के नसीब में नहीं होता, पर इस खबर ने दुनिया भर के डॉक्टरों को एक नई उम्मीद जरूर दे दी है.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल खबर के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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