
फाइल फोटो
नई दिल्ली:
क्या आपको पता है, आप अपने साथ कितने कीटाणु लेकर रह रहे हैं। आप जिन 10, 20 और 100 रुपये के नोट को साथ में रखते हैं, जांच के दौरान उनमें हजारों तरह के कीटाणु पाए गए हैं, जो आपको बीमार.. बहुत बीमार करने के लिए काफी हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार इन कीटाणुओं से 78 प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं। तो इसका मतलब साफ है कि इन नोटों के जरिए आपके अंदर बीमारियां पहुंच रही हैं। फिर एक सवाल भी उठता है कि 'क्या पैसों की बजाय डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीदारी करना सेहत के लिए बेहतर है' ?
इंस्टिट्यूट ऑफ जेनॉमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के कुछ वैज्ञानिकों के शोध में ये तथ्य सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर नोट फंगी थे, लेकिन इनमें ऐसे बैक्टीरिया भी थे जिनके कारण पेचिस, टीबी और अल्सर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
शोध में सामने आया है कि कई मामलों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक ये सूक्ष्म जीवाणु नोटों के जरिए पहुंच जाते हैं। अध्ययन में जीवाणुओं का पता लगाने के लिए डीएनए जांच की गई। शोध करने वाले समूह के प्रमुख के मुताबिक, हम नहीं जानते कि ये जीवाणु लोगों को संक्रमित कर सकते हैं या नहीं, क्योंकि हमने उस पहलू का अध्ययन नहीं किया है।
मगर, इतना जरूर कह सकते हैं कि इस तरीके से बीमारियां जरूर फैल सकती हैं क्योंकि ये जीवाणु नोट के जरिए एक स्थान से दूसरी जगह जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे के ठेले, खोमचे, किराना दुकानों से नोटों के सैंपल इकठ्ठा किए गए थे, जहां सामान्य तौर पर छोटे नोटों का चलन ज्यादा होता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार इन कीटाणुओं से 78 प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं। तो इसका मतलब साफ है कि इन नोटों के जरिए आपके अंदर बीमारियां पहुंच रही हैं। फिर एक सवाल भी उठता है कि 'क्या पैसों की बजाय डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीदारी करना सेहत के लिए बेहतर है' ?
इंस्टिट्यूट ऑफ जेनॉमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के कुछ वैज्ञानिकों के शोध में ये तथ्य सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर नोट फंगी थे, लेकिन इनमें ऐसे बैक्टीरिया भी थे जिनके कारण पेचिस, टीबी और अल्सर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
शोध में सामने आया है कि कई मामलों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक ये सूक्ष्म जीवाणु नोटों के जरिए पहुंच जाते हैं। अध्ययन में जीवाणुओं का पता लगाने के लिए डीएनए जांच की गई। शोध करने वाले समूह के प्रमुख के मुताबिक, हम नहीं जानते कि ये जीवाणु लोगों को संक्रमित कर सकते हैं या नहीं, क्योंकि हमने उस पहलू का अध्ययन नहीं किया है।
मगर, इतना जरूर कह सकते हैं कि इस तरीके से बीमारियां जरूर फैल सकती हैं क्योंकि ये जीवाणु नोट के जरिए एक स्थान से दूसरी जगह जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे के ठेले, खोमचे, किराना दुकानों से नोटों के सैंपल इकठ्ठा किए गए थे, जहां सामान्य तौर पर छोटे नोटों का चलन ज्यादा होता है।
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