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थाईलैंड में मिला एशिया का सबसे विशाल डायनासोर, 9 हाथियों जितना था वजन

थाईलैंड में वैज्ञानिकों ने 27 टन वजनी और 88 फीट लंबे नए विशालकाय डायनासोर ‘नागाटाइटन’ की खोज की है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया का अब तक का सबसे बड़ा डायनासोर माना जा रहा है. जानिए ज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है यह खोज.

थाईलैंड में मिला एशिया का सबसे विशाल डायनासोर, 9 हाथियों जितना था वजन
थाईलैंड में मिला 27 टन वजनी ‘दानव डायनासोर’, वैज्ञानिक भी रह गए हैरान

डायनासोर की दुनिया हमेशा लोगों को रोमांचित करती रही है. अब थाईलैंड में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे विशालकाय डायनासोर की खोज की है, जिसे दक्षिण-पूर्व एशिया का अब तक का सबसे बड़ा डायनासोर बताया जा रहा है. करीब 27 टन वजनी और 88 फीट लंबे इस डायनासोर के जीवाश्मों ने वैज्ञानिकों को करोड़ों साल पुराने पृथ्वी के रहस्यों को समझने में नई मदद दी है.

9 हाथियों जितना था वजन

वैज्ञानिकों ने थाईलैंड में एक नई विशालकाय डायनासोर प्रजाति की पहचान की है. इस डायनासोर का नाम Nagatitan chaiyaphumensis रखा गया है. इसे दक्षिण-पूर्व एशिया में अब तक मिला सबसे बड़ा डायनासोर माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डायनासोर करीब 27 टन वजनी था, यानी लगभग 9 एशियाई हाथियों के बराबर. इसकी लंबाई लगभग 27 मीटर यानी 88 फीट थी. यह लंबे गले वाले सॉरोपोड परिवार का शाकाहारी डायनासोर था.

तालाब के पास मिले थे जीवाश्म

रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, वैज्ञानिकों की टीम ने इस नई प्रजाति की पहचान थाईलैंड के उत्तर-पूर्वी इलाके में मिले जीवाश्मों से की. ये जीवाश्म करीब 10 साल पहले एक तालाब के पास मिले थे. इस रिसर्च का नेतृत्व Thitiwoot Sethapanichsakul ने किया, जो यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रिसर्च कर रहे हैं. यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

नाम के पीछे भी है खास कहानी

डायनासोर का नाम 'नागाटाइटन' दक्षिण-पूर्व एशिया की लोककथाओं के नाग से प्रेरित है, जबकि टाइटन ग्रीक मिथकों के शक्तिशाली देवताओं को दर्शाता है. इसके नाम का आखिरी हिस्सा 'चैयाफुमेंसिस' उस चैयाफुम प्रांत को दर्शाता है, जहां इसके जीवाश्म मिले थे.

टी-रेक्स से भी करोड़ों साल पुराना

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह डायनासोर करीब 10 से 12 करोड़ साल पहले धरती पर मौजूद था. यानी यह मशहूर Tyrannosaurus rex से करीब 4 करोड़ साल पहले का जीव था. आकार के मामले में भी यह टी-रेक्स से लगभग दोगुना बड़ा बताया गया है.

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अहम जानकारी

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज केवल एक नई प्रजाति की पहचान नहीं है, बल्कि इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि पुराने समय में जलवायु परिवर्तन ने डायनासोरों के विकास को कैसे प्रभावित किया. उस समय पृथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर काफी बढ़ रहा था और तापमान भी अधिक था. इसके बावजूद इतने बड़े शाकाहारी डायनासोरों का जीवित रहना वैज्ञानिकों के लिए बेहद दिलचस्प विषय है.

थाईलैंड में पहले भी मिल चुके हैं कई डायनासोर

पैलियोन्टोलॉजिस्ट सीता मानितकून के मुताबिक, थाईलैंड में डायनासोर जीवाश्मों की विविधता काफी ज्यादा है. अब तक देश में 14 अलग-अलग डायनासोर प्रजातियों के नाम रखे जा चुके हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि एशिया में डायनासोर जीवाश्मों के मामले में थाईलैंड तीसरे स्थान पर हो सकता है.

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