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शिव भक्ति का अनोखा रिकॉर्ड! नन्हीं भाविका की जुबान पर विराजे महादेव, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज

दांत निकलने की उम्र में जिसकी जुबान पर शिव तांडव के क्लिष्ट श्लोक थिरक रहे हैं, उस नन्हीं भाविका ने अपनी तोतली आवाज से भक्ति का ऐसा 'रिकॉर्ड तोड़' समां बांधा है कि बड़े-बड़े विद्वान भी दांतों तले उंगली दबा लें.

शिव भक्ति का अनोखा रिकॉर्ड! नन्हीं भाविका की जुबान पर विराजे महादेव, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज
न्हीं उम्र, गजब का हौसला! 2 साल की भाविका ने शिव तांडव स्तोत्र पढ़कर रचा इतिहास, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज

Bhavika Sharma India Book of Records: कहते हैं प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती और राजस्थान के बोरावड़ की नन्हीं बिटिया भाविका शर्मा ने इसे सच कर दिखाया है. महज 2 साल 11 महीने की उम्र में, जहां बच्चे ठीक से बोल नहीं पाते, वहां भाविका ने 'शिव तांडव स्तोत्र' के कठिन श्लोकों का ऐसा शुद्ध उच्चारण किया कि 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' भी दंग रह गया. बोरावड़ की इस 'लिटिल वंडर' ने साबित कर दिया कि जब संस्कारों की खाद और माता-पिता का साथ मिले, तो ढाई साल की उम्र में भी नाम इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों से लिखा जा सकता है.

बोरावड़ की बिटिया का कमाल (Shiv Tandav Stotram youngest record)

राजस्थान के नागौर जिले के मकराना क्षेत्र में स्थित बोरावड़ गांव की एक छोटी सी परी ने अपनी तोतली जुबान से भक्ति का ऐसा रस घोला है कि, हर कोई 'हर हर महादेव' कह उठा है. 2 साल 11 महीने और 11 दिन की भाविका शर्मा ने भगवान शिव के प्रिय रावण रचित श्री शिव तांडव स्तोत्र के 15 जटिल श्लोकों को मात्र 4 मिनट 20 सेकंड में पूरा पढ़कर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है. 13 अप्रैल 2023 को जन्मी इस लाडली की प्रतिभा को 24 मार्च 2026 को आधिकारिक मान्यता मिली.

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संस्कारों की छांव में खिलती प्रतिभा (Nurturing Talent Under Spiritual Values)

भाविका के पिता कपिल शर्मा अपनी बेटी की इस कामयाबी का सारा क्रेडिट अपने माता-पिता और गुरुजी के आशीर्वाद को देते हैं. घर का माहौल इतना सात्विक और धार्मिक है कि मानो भक्ति वहां की हवाओं में बहती हो. वहीं, भाविका की मम्मी डॉ. नेहा जोशी पेशे से डॉक्टर हैं, पर उनके दिल में अध्यात्म कूट-कूट कर भरा है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि साइंस और अध्यात्म अलग हैं, पर भाविका की ने साबित कर दिया कि अच्छी परवरिश और पुराने संस्कारों की घुट्टी से ही ऐसी प्रतिभाएं जन्म लेती हैं.

दादा-दादी की लाडली ने बढ़ाया क्षेत्र का मान (Grandparents' Pride and Regional Success)

भाविका की इस शानदार उपलब्धि से दादा श्रवण कुमार शर्मा और दादी संतोष शर्मा की आंखों में खुशी के आंसू हैं. उनके लिए यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक रूहानी सुकून है. पूरे मकराना इलाके में जश्न का माहौल है और लोग भाविका को साक्षात 'सरस्वती' का रूप मान रहे हैं. दादा-दादी कहते हैं कि बिटिया की यह लगन आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनेगी.

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नन्हीं सी जान, बड़ा सा मुकाम (Tiny Feet, Gigantic Milestone)

देखा जाए तो इस डिजिटल दौर में जहां बच्चे फोन में उलझे रहते हैं, वहां भाविका का यह कदम सनातन संस्कृति और परंपराओं को जिंदा रखने जैसा है. डॉक्टर मम्मी और समर्पित पिता के सहयोग से इस छोटी सी बच्ची ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़ों के बस की बात नहीं होती. भाविका शर्मा की यह सफलता हमें सिखाती है कि अगर जड़ें मजबूत हों, तो फल मीठे ही मिलते हैं. राजस्थान की इस नन्हीं बिटिया ने न केवल अपने माता-पिता बल्कि पूरे देश का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है.

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