Vinesh Phogat Coach Reaction: एक ओलिंपिक का पदक छोड़ दें तो विनेश फोगाट भारत की सबसे कामयाब पहलवान मानी जा सकती हैं. पिछले तीन ओलिंपिक्स में विनेश पदक के बिल्कुल पास पहुंच गईं, लेकिन हर बार पदक उनके हाथ से फिसल गया. यही वजह है कि विनेश लॉस एंजेल्स ओलिंपिक्स 2028 को अपना अल्टीमेट टारगेट बना रही हैं. एशियाड के ट्रायल्स में हार के बाद विनेश, कुश्ती संघ के अधिकारियों और सिस्टम पर दहाड़ कर मैच से बाहर आईं. डबल वर्ल्ड चैंपियनशिप और एक गोल्ड समेत डबल एशियन गेम्स के मेडल- विनेश फोगाट का ये बायो डाटा भारत की ओलिंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक पर भी भारी नज़र आता है.
किस वज़न वर्ग में लड़ेंगी विनेश
विनेश रियो ओलिंपिक्स 2016 में 48 किलोग्राम वर्ग में लड़ीं और जब उनसे जीत की उम्मीद की जा रही थी उन्हें क्वार्टरफ़ाइनल मैच में ACL इंजरी हो गई. टोक्यो 2020 में वो 53 किलोग्राम वर्ग में लड़ने गईं. लेकिन तब भी उनके और कुश्ती संघ के बीच ठन गई. टोक्यो से लौटने के बाद कुश्ती संघ ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. पेरिस ओलिंपिक्स 2024 में विनेश 50 किलोग्राम में लड़ीं और पूर्व ओलिंपिक चैंपियन जापान की युई सुसाकि को हराकर दुनिया को दंग कर दिया. वो सिर्फ़ फ़ाइनल के लिए मैच पर उतर आतीं तो कम से कम सिल्वर मेडल पक्का था. मगर 100 ग्राम एक्स्ट्रा वज़न फिर से ने उनका मेडल छीन लिया.
लॉस एंजेल्स ओलिंपिक्स 2028 के दौरान विनेश की उम्र 33 साल होगी. तबतक इस वज़न को मेंटेन करना विनेश के लिए एक बड़ा चैलेंज होगा. ओलिंपिक्स में 50 किग्रा से लेकर 53 किग्रा, 57 किग्रा, 62 किग्रा, 68 किग्रा और 76 किग्रा वर्ग तक में ही महिला पहलवान एथलीट हिस्सा ले सकती हैं. ऐसे में विनेश के लिए अपना वज़न वर्ग तय करना और उसके मुताबिक तैयारी करना अब उनके लिए चैलेंज की लिस्ट को लंबा बनाता है.
कुश्ती संघ फिर आएगा आड़े
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और स्पोर्ट्स लॉ के विशेषज्ञ सौरभ मिश्रा NDTV से कहते हैं, “कल ही मैंने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई देखी. सुप्रीम कोर्ट ने कुश्ती संघ से कहा कि विनेश सरीखी बड़ी खिलाड़ी को रोकने की उनकी कोशिश सही नहीं है. हाई कोर्ट ने भी कहा था कि कुश्ती संघ विनेश के ख़िलाफ़ बदले की भावना दिखा रहा है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराते हुए विनेश को एशियाड ट्रायल्स की इजाज़त दे दी.”
स्पोर्ट्स लॉ स्पेशलिस्ट एडवोक्ट सौरभ मिश्रा वो ये भी कहते, “मैं हैरान था कि किसी देश का खेल संघ अपने ही खिलाड़ी को खेल से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. अपने इतने लंबे करियर में मैंने ये उदाहरण किसी दूसरे देश में नहीं देखा है.” कुश्ती सर्किट में सभी मानते हैं कि विनेश को आगे आनेवाले सभी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा. खुद विनेश कहती हैं, “मेरे लिए एक ओलिंपिक की लड़ाई तो सिस्टम से लड़ने की ही हो जाती है.”
कैंप और टूर्नामेंट के लिए लड़नी पड़ेगी लड़ाई
खेलों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता खेल संघों के ज़रिये ही तय होता है. डबल ओलिंपिक पदक विजेता सुशील को भी रियो ओलिंपिक्स 2016 के दौरान भारतीय कुश्ती संघ से बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी. सुशील की रियो ओलिंपिक्स के लिए ट्रायल्स की मांग नहीं मानी गई थी और लंदन ओलिंपिक्स 2012 का सिल्वर मेडल विजेता रियो ओलिंपिक्स 2016 में हिस्सा नहीं ले पाया. कुश्ती संघ के रवैये से साफ़ है कि विनेश के लिए अगले सभी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट मुश्किल हो सकते हैं. लेकिन विनेश जीनियस खिलाड़ी हैं. उनके मौजूदा हौसले को देखते हुए आगे की राह फिर भी मुमकिन नज़र आती है.
घर और बच्चे की ज़िम्मेदारी के बीच कुश्ती पर फ़ोकस
विनेश पिछले साल ही मां बनी हैं. उनका बेटा कृधव एक साल का है. आज की एशियाड ट्रायल्स की मुश्किल कुश्तियों के बीच भी वो बार-बार अपने बेटे को याद करती रहीं. उनकी ज़िम्मेदारियां अगले दो साल ज़ाहिर तौर पर और भी बढ़नेवाली हैं. वो खुद इस बात को मानती भी हैं. ऐसे में कुश्ती के लिए ओलिंपिक के पदक की तैयारी का फ़ोकस बनाए रखना बहुत आसान नहीं होगा.
कोच, एक्सपोज़र और टूर्नामेंट का संघर्ष
NDTV से बात करते हुए विनेश के कोच और पति सोमवीर ने कहा, “विनेश ने तकरीबन पिछले साल अगस्त से इसकी तैयारी की थी. हम वापस जाकर और ज़ोर-शोर से तैयारी करेंगे.” लेकिन ओलिंपिक्स में कामयाबी के लिए दुनिया भर के एथलीट टॉप लेवल पर जाकर अलग-अलग एक्सपर्ट्स के साथ तैयारी करते हैं. बगैर सिस्सटम के सपोर्ट के विनेश के लिए ये सब फिर से हासिल कर पाना सबसे बड़े चैलेंज में से एक होगा.
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