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9/11 से दो दिन पहले की ओसामा बिन लादेन के सबसे बड़े दुश्मन की हत्या! तालिबान और अल-कायदा की साजिश की कहानी

9 सितंबर 2001 को अफगानिस्तान के नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख कमांडर अहमद शाह मसूद की हत्या एक आत्मघाती हमले में कर दी गई थी.

कौन थे अहमद शाह मसूद और 9/11 से ठीक पहले उनकी हत्या क्यों कराई गई थी
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9 सितंबर 2001 को अफगानिस्तान के नॉर्दर्न अलायंस के कमांडर अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी गई थी. यह घटना अमेरिका पर हुए 11 सितंबर (9/11) आतंकी हमलों से सिर्फ दो दिन पहले हुई थी. माना जाता है कि अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन ने तालिबान को फायदा पहुंचाने और अपने बड़े हमले की तैयारी के तहत मसूद को निशाना बनवाया था.

पत्रकार बनकर पहुंचे थे हमलावर

न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मसूद की हत्या उस समय हुई जब वे दो लोगों का इंटरव्यू दे रहे थे. ये दोनों व्यक्ति खुद को बेल्जियम के टीवी पत्रकार बता रहे थे और पंजशीर घाटी में उनके कैंप तक पहुंच गए थे.

सुरक्षा जांच के बावजूद वे अपने साथ एक वीडियो कैमरा लेकर आए थे, जिसमें विस्फोटक छिपाए गए थे. इंटरव्यू के दौरान ही कैमरे में धमाका हुआ और मसूद गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में उनकी मौत हो गई.

9/11 से पहले तालिबान के सबसे बड़े विरोधी थे मसूद

अहमद शाह मसूद तालिबान के खिलाफ लड़ाई में एक अहम व्यक्ति थे. उन्होंने उत्तरी अफगानिस्तान में विद्रोहियों का एक नेटवर्क बनाया था और वे तालिबान के नियंत्रण के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए थे. उनके नेतृत्व और लोकप्रियता ने उन्हें उस समूह का विरोध करने वालों के लिए भी एक अहम व्यक्ति बना दिया था.

ओसामा बिन लादेन को था खतरे का अंदेशा

कहा जाता है कि ओसामा बिन लादेन को अंदेशा था कि अमेरिका पर बड़े हमले के बाद अफगानिस्तान में तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. ऐसे में अहमद शाह मसूद अमेरिकी समर्थन से तालिबान विरोधी अभियान का प्रमुख चेहरा बन सकते थे. इसी वजह से 9/11 हमलों से ठीक पहले उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई.

CIA भी चिंतित हो गई थी

मसूद की हत्या की खबर ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को भी चिंतित कर दिया था. CIA अधिकारी गैरी बर्नटसेन, जिन्होंने बाद में 9/11 के बाद अफगानिस्तान में एजेंसी की पहली टीम का नेतृत्व किया, ने कहा था कि उन्हें लगा कि यह नॉर्दर्न अलायंस के अंत की शुरुआत हो सकती है.

हालांकि, तत्कालीन CIA डायरेक्टर जॉर्ज टेनेट का मानना ​​था कि एजेंसी के पास अफगानिस्तान में अभी भी अन्य संपर्क थे. उन्होंने बाद में लिखा, '9/11 हमलों से ठीक पहले अल-कायदा द्वारा मसूद की बेरहम हत्या ने हमारे प्लान को शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया होता, अगर हमने उत्तर में अन्य युद्ध-सरदारों (warlords) के साथ संपर्क बनाए न रखे होते.'

पाकिस्तानी खुफिया प्रमुख से हुई थी चर्चा

टेनेट ने 9 सितंबर को पाकिस्तानी खुफिया प्रमुख जनरल महमूद अहमद के साथ हुई एक बैठक को भी याद किया. अल-कायदा और तालिबान नेता मुल्ला उमर के बारे में चर्चा करते हुए, महमूद ने उमर का बचाव किया और सुझाव दिया कि CIA को बिन लादेन को सौंपने के लिए तालिबान अधिकारियों को रिश्वत देने की कोशिश करनी चाहिए. टेनेट ने बाद में लिखा, 'लंच टेबल पर वे जितने शालीन हो सकते थे, उतने ही थे, लेकिन तालिबान और अल-कायदा के मामले में वे अपनी बात से टस से मस नहीं होते थे.'

9/11 के बाद बदला पूरा समीकरण

11 सितंबर के हमलों के बाद, जब वॉशिंगटन आतंकवाद के खिलाफ अपने नए अभियान में पाकिस्तान का सहयोग चाहता था, तब महमूद ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की. इसके कुछ ही समय बाद, पाकिस्तानी इलाके में अमेरिकी सेना को भी गुप्त रूप से तैनात किया गया.

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