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Explainer: अमेरिका में एक ही दिन तीन लोगों को फांसी क्यों दी गई? 15 साल बाद फिर एक दिन में तीन मौत की सजा

अमेरिका में 15 साल से ज्यादा समय बाद एक ही दिन तीन लोगों को फांसी दी गई. तीन अलग-अलग राज्यों की ये फांसियां संयोग थीं, लेकिन बढ़ती फांसी ने अमेरिका की मौत की सजा की नीति पर बहस छेड़ दी है.

Explainer: अमेरिका में एक ही दिन तीन लोगों को फांसी क्यों दी गई? 15 साल बाद फिर एक दिन में तीन मौत की सजा
अमेरिका में तीन लोगों को एक दिन में फांसी क्यों?
AFP
  • अमेरिका में एक ही दिन में तीन फांसियां दी गईं. ये तीन अलग-अलग राज्यों के अपने मामलों से जुड़ी थीं.
  • हालांकि तीन फांसियां सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन की ओर से दी गई संघीय फांसियां नहीं थीं.
  • अमेरिका उन गिने-चुने पश्चिमी देशों में है जहां अभी भी मृत्युदंड कानून में मौजूद है.

अमेरिका में 15 साल से ज्यादा समय बाद एक ही दिन तीन लोगों को मृत्युदंड दिया गया. बीते हफ्ते ओक्लाहोमा, टेनेसी और अलबामा में तीन अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराए गए तीन कैदियों को घातक इंजेक्शन से मौत दी गई. यह कोई एक साथ लिया गया राष्ट्रीय फैसला नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग राज्यों में तय की गई फांसियों का संयोग था. लेकिन इस दुर्लभ घटना ने अमेरिका में मृत्युदंड के दोबारा बढ़ते इस्तेमाल पर बहस तेज कर दी है.

एक ही दिन तीन फांसियां इसलिए संभव हुईं क्योंकि अमेरिका में मृत्युदंड का अधिकार सिर्फ संघीय सरकार के पास नहीं है. अलग-अलग राज्यों के पास भी अपने कानूनों के तहत मृत्युदंड देने और फांसी की तारीख तय करने की शक्ति है. इस मामले में ओक्लाहोमा, टेनेसी और अलबामा ने अपने-अपने मामलों में अलग-अलग तारीख और प्रक्रिया तय की थी, जो संयोग से एक ही दिन पड़ गई.

पहली फांसी

सबसे पहले ओक्लाहोमा में 70 वर्षीय कार्लोस कुएस्टा-रोड्रिगेज को मौत दी गई. उन्हें 2003 में अपनी पत्नी ओलंपिया फिशर की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी. उन्होंने दया की अपील की थी और कहा था कि उन्हें अपने किए पर पछतावा है और वह पूरी जिंदगी मानसिक बीमारी से जूझते रहे. उन्हें ओक्लाहोमा स्टेट पेनिटेंशियरी, मैकएलिस्टर में सुबह 10.13 बजे मृत घोषित किया गया.

उनके परिवार और दोस्तों ने उनकी मौत के बाद जारी बयान में कहा कि वह उस व्यक्ति से बदल चुके थे जिसने अपराध किया था. उनके मुताबिक, उन्होंने जेल में वर्षों तक अपने परिवार और दूसरे कैदियों के प्रति प्रेम, विनम्रता और दयालुता दिखाई.

दूसरी फांसी

इसके करीब एक घंटे बाद टेनेसी में 66 वर्षीय एंथनी डैरेल हाइन्स को मौत दी गई. हाइन्स को 1985 में मोटल कर्मचारी और चार बच्चों की मां कैथरीन जीन जैक्सन जेनकिंस की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी.

हाइन्स के वकीलों ने उनकी फांसी रोकने की कोशिश की थी. उनकी दलील थी कि टेनेसी में इससे पहले एक कैदी टोनी कैरुथर्स को घातक इंजेक्शन देने की कोशिश बुरी तरह नाकाम हुई थी. अधिकारियों को नस खोजने में काफी परेशानी हुई थी और प्रक्रिया लंबी और बेहद पीड़ादायक बन गई थी.

इसके बावजूद हाइन्स को उसी तरह के प्रोटोकॉल के तहत मौत दी गई.

तीसरी फांसी

दिन की तीसरी फांसी अलबामा में शाम 6 बजे हुई. वहां 42 वर्षीय जेरेमी विलियम्स को मौत दी गई. विलियम्स को 2021 में जॉर्जिया में पांच साल की बच्ची किमैरी हॉलैंड के बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था.

विलियम्स ने हत्या का अपराध स्वीकार किया था. उन्होंने अपने वकीलों को मुकदमे में अभियोजन पक्ष की कार्रवाई का विरोध नहीं करने को कहा, जूरी से सजा तय कराने का अधिकार छोड़ दिया और मौत की सजा के दौरान आमतौर पर पेश किए जाने वाले राहत देने वाले सबूत भी पेश नहीं किए. उन्होंने अपील भी नहीं की. इसी वजह से उनका मामला कई दूसरे डेथ रो मामलों की तुलना में काफी तेजी से आगे बढ़ा.

उनके अंतिम 24 घंटों में पत्नी, मां, सौतेली मां, भाई और पिता ने उनसे मुलाकात की. उन्होंने अपनी दादी और आंटी से फोन पर बात भी की. अंतिम शब्दों में उन्होंने भगवान से अपने पापों की माफी मिलने की बात कही.

बेशक अमेरिका ने जानबूझकर एक ही दिन तीन लोगों को फांसी नहीं दी गई लेकिन यह संयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गया क्योंकि एक ही दिन तीन लोगों को फांसी 15 साल से अधिक समय पहले भी साथ दी गई थीं.

इस घटना को अमेरिका में मृत्युदंड के बढ़ते इस्तेमाल की बड़ी तस्वीर के हिस्से के तौर पर भी देखा जा रहा है.

three executions in one day in America

अमेरिका में घातक इंजेक्शन के इस्तेमाल से दी जाती है मौत की सजा
Photo Credit: AFP

अमेरिका में फांसियों की संख्या क्यों बढ़ रही है?

पिछले साल अमेरिका में 47 लोगों को फांसी दी गई. यह उससे पिछले साल की 25 फांसियों से काफी ज्यादा था.

इस बढ़ोतरी में फ्लोरिडा की भूमिका सबसे बड़ी रही. 2025 में अमेरिका की कुल 47 फांसियों में से 19 अकेले फ्लोरिडा में हुईं. यानी देश की करीब 40 फीसदी फांसियां एक ही राज्य में हुईं.

2026 के मध्य तक भी फ्लोरिडा सबसे आगे रहा. उस समय तक अमेरिका में हुई 19 फांसियों में 12 फ्लोरिडा में हो चुकी थीं.

मृत्युदंड पर आंकड़े और शोध उपलब्ध कराने वाले डेथ पेनाल्टी इनफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, फ्लोरिडा की स्थिति बाकी राज्यों से अलग दिखाई देती है.

Donald Trump

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन मृत्युदंड को फिर से बहाल करने वाला आदेश जारी किया
Photo Credit: AFP

ट्रंप फैक्टर कितना महत्वपूर्ण है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से मृत्युदंड के समर्थक रहे हैं. उन्होंने इसे गंभीर अपराध करने वालों को दंडित करने और अपराध रोकने के लिए जरूरी बताया है.

अपने पहले कार्यकाल में 2020 में ट्रंप ने संघीय मृत्युदंड पर करीब दो दशक से चली आ रही रोक खत्म की थी. इसके बाद छह महीने के भीतर संघीय स्तर पर 13 लोगों को फांसी दी गई.

इसके बाद जो बाइडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल 2021 से 2025 के दौरान संघीय फांसी पर फिर रोक लागू रही.

लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन मृत्युदंड को फिर से बहाल करने वाला कार्यकारी आदेश जारी किया गया.

हालांकि इसके बाद अभी तक कोई संघीय फांसी नहीं हुई है. इसलिए बीते गुरुवार को हुई तीन फांसियां सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन द्वारा उसी दिन कराई गई संघीय फांसियां नहीं थीं. वे तीन राज्यों के अपने मामलों से जुड़ी थीं.

ट्रंप प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने फांसी के दूसरे तरीकों जैसे फायरिंग स्क्वाड को शामिल करने के लिए प्रोटोकॉल बढ़ाया, घातक इंजेक्शन को फिर अपनाया और मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं में बदलाव किए.

ट्रंप के कार्यकारी आदेश में राज्यों को कानून प्रवर्तन अधिकारियों की हत्या के मामलों में मृत्युदंड मांगने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया और अटॉर्नी जनरल को राज्यों के पास घातक इंजेक्शन की दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया.

हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक इन नीतियों का वास्तविक असर समझने में कई साल लग सकते हैं, क्योंकि मृत्युदंड के मामलों में मुकदमे और अपील की प्रक्रिया लंबी होती है.

फ्लोरिडा में क्या बदला?

फ्लोरिडा में गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने ऐसे कानूनों में बदलाव के लिए जोर दिया जिनसे मृत्युदंड लागू करना आसान हो सके.

2023 में राज्य ने मुकदमे के दौरान मृत्युदंड की सिफारिश के लिए जरूरी जूरी समर्थन की सीमा कम कर दी. पहले सभी 12 जूरी सदस्यों की सहमति जरूरी थी. बाद में यह संख्या आठ कर दी गई.

फ्लोरिडा में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया.

डेसेंटिस मृत्युदंड को अपराध रोकने वाला मजबूत उपाय और सबसे गंभीर अपराध करने वालों के लिए उचित सजा बताते रहे हैं.

फ्लोरिडा की एक खास व्यवस्था यह भी है कि जब किसी कैदी की अपील की संभावना खत्म हो जाती है तो राज्यपाल फांसी के आदेश पर हस्ताक्षर कर सकते हैं.

Death row gas chamber at San Quentin State Prison

सैन क्वेंटिन स्टेट जेल में डेथ रो गैस चैंबर
Photo Credit: California Department of Corrections and Rehabilitation

क्या अमेरिका में लोग अभी भी मृत्युदंड का समर्थन करते हैं?

हां, लेकिन समर्थन में गिरावट आई है.

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, गैलप के सर्वे में 52 फीसदी अमेरिकी मृत्युदंड को नैतिक रूप से स्वीकार्य मानते हैं. यह 1970 के दशक के बाद का सबसे कम स्तर बताया गया है.

मृत्युदंड के समर्थन में गिरावट सिर्फ जनमत में नहीं दिखती, बल्कि अदालत में सुनाई जाने वाली मौत की सजाओं में भी बड़ी गिरावट आई है.

1990 के दशक में अमेरिकी जूरी हर साल 300 से ज्यादा मौत की सजाएं सुनाती थीं. 2025 में यह संख्या सिर्फ 23 रह गई.

इसका मतलब यह है कि भले ही कुछ राज्य पहले के मामलों में अब ज्यादा तेजी से फांसी दे रहे हों, लेकिन नए मामलों में जूरी पहले की तुलना में मृत्युदंड देने से काफी ज्यादा हिचक रही हैं.

फिर एक ही समय में फांसियां बढ़ क्यों रही हैं?

एक तरफ अमेरिकी समाज और जूरी के बीच मृत्युदंड के समर्थन में लंबे समय से गिरावट देखी जा रही है. दूसरी तरफ कुछ राज्यों ने पुराने डेथ रो मामलों को तेजी से आगे बढ़ाकर फांसी की संख्या बढ़ाई है.

इसलिए मौजूदा वृद्धि को यह समझकर नहीं देखना चाहिए कि पूरे अमेरिका में अचानक मृत्युदंड के प्रति समर्थन बहुत बढ़ गया है. उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि बढ़ोतरी कुछ खास राज्यों, खासकर फ्लोरिडा, की नीतियों और पुराने मामलों में फांसी लागू करने की गति से भी जुड़ी है.

फांसी देने का तरीका भी विवाद का विषय क्यों है?

मृत्युदंड को लेकर विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि किसी दोषी को मौत की सजा मिलनी चाहिए या नहीं. यह सवाल भी बड़ा हो गया है कि अगर राज्य किसी व्यक्ति को मौत देता है तो उसे किस तरीके से दिया जाए.

अमेरिका में 1980 के दशक की शुरुआत से घातक इंजेक्शन सामान्य तरीका रहा है.

लेकिन दवा कंपनियां मृत्युदंड के लिए अपनी दवाओं के इस्तेमाल का विरोध करती रही हैं. इससे घातक इंजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की उपलब्धता को लेकर समस्याएं पैदा हुई हैं.

इसके जवाब में कुछ राज्यों ने दूसरे तरीके अपनाने शुरू किए. दक्षिण कैरोलिना ने 2025 में फायरिंग स्क्वाड के जरिए मृत्युदंड देना शुरू किया.

अलबामा ने भी नाइट्रोजन गैस के इस्तेमाल की ओर काफी हद तक रुख किया था. लेकिन जून में एक संघीय न्यायाधीश ने इस तरीके पर रोक लगा दी क्योंकि इसे असंवैधानिक माना गया. इसके बाद इस मामले में बदलाव आया और गुरुवार को अलबामा में जेरेमी विलियम्स को घातक इंजेक्शन दिया गया.

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