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वो जांबाज हमास आतंकियों से आखिरी सांस तक लड़ा- कौन थे 24 साल के रैन ग्विली, जिसकी लाश इजरायल लौटी?

Last Israeli Hostage Returns: इजरायल पर हमले के दौरान हमास ने कुल 251 लोगों को या तो बंधक बनाया था या उनकी बॉडी अपने पास रखी थी. ग्विली उनमें से आखिरी है जिन्हें वापस इजरायल लाया जा चुका है.

वो जांबाज हमास आतंकियों से आखिरी सांस तक लड़ा- कौन थे 24 साल के रैन ग्विली, जिसकी लाश इजरायल लौटी?
रैन ग्विली इजरायल के एक जवान पुलिस अधिकारी थे.
  • इजरायली सेना ने गाजा से अपने अंतिम बंधक रैन ग्विली का शव बरामद कर लिया है
  • रैन ग्विली एक जवान पुलिस अधिकारी थे जिन्होंने हमास के हमले के दौरान खुद को बचाने के बजाय लड़ाई में हिस्सा लिया
  • ग्विली को परिवार और समुदाय ने 'अलुमिम का रक्षक' का नाम दिया और उनका शव अब इजरायल वापस लाया गया है

इजरायल की सेना ने कहा है कि उसने गाजा में अपने अंतिम बंधक का शव बरामद कर लिया है. यह बहुत बड़ी डेवलपमेंट है. इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना अब अपने अगले चरण के लिए जा सकेगी. उस आखिरी बंधक का नाम रैन ग्विली है. अक्टूबर 2025 में हमास के साथ सीजफायर शुरू होने के बाद से ही मास्टर सार्जेंट रैन ग्विली के शव की तलाश की जा रही थी. अब उनका शव मिल गया है.इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे "एक असाधारण उपलब्धि" कहा है.

तो कौन थे रैन ग्विली?

रैन ग्विली इजरायल के एक जवान पुलिस अधिकारी थे. जब 7 अक्टूबर, 2023 को जब हमास ने इजरायल पर अपना घातक हमला किया था जब रैन ग्विली मेडिकल लीव पर यानी छुट्टी पर थे. लेकिन घर पर रहने के बजाय 24 साल के ग्विली ने अपनी बंदूक उठाई और दक्षिणी इजरायल में जिधर हमला हुआ था, उस क्षेत्र की ओर भागे. वहां वह अपनी आखिरी गोली और सांस तक लड़ते रहे.

परिवार और समुदाय के लोगों ने उन्हें निकनेम दिया था- अलुमिम का रक्षक. ग्विली किबुत्ज़ समुदाय के पास लड़ाई में मारे गए थे और उसके शव को उठाकर हमास के उग्रवादी अपने साथ गाजा लेते गए. सोमवार को उनके शव के अवशेष को वापस इजरायल लाया गया. इजरायल पर हमले के दौरान हमास ने कुल 251 लोगों को या तो बंधक बनाया था या उनकी बॉडी अपने पास रखी थी. ग्विली उनमें से आखिरी है जिन्हें वापस इजरायल लाया जा चुका है. अब गाजा में ऐसा कोई बंधक या कोई बॉडी नहीं है.

गाजा के पास एक सैन्य अड्डे पर जब शव पहुंचा तो ग्विली के पिता यित्जिक ग्विली बोल उठे: "मुझे तुम पर गर्व है मेरे बेटे."

ग्विली को मोटरसाइकिल चलाने का बड़ा शौक था. वो उस समय नेगेव रेगिस्तानी क्षेत्र में इजरायली पुलिस की खास यासम यूनिट में गैर-कमीशन अधिकारी थे. परिवार के अनुसार हमास के हमले के समय कंधे की सर्जरी से पहले चिकित्सा अवकाश पर थे और मीटार शहर में अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे. तभी उन्हें हमले के बारे में पता चला. ग्विली हमले की ओर बढ़े और हमलावरों से लड़ने के लिए अपनी यूनिट में शामिल हो गए. उनकी टीम की संख्या बहुत कम थी क्योंकि उन्हें लगभग 40 हमास लड़ाकों का सामना करना पड़ा. "हम दोनों घायल हो गए थे," कर्नल गाइ मदार ने याद किया, जो अलुमिम के बाहर ग्विली के साथ लड़ रहे थे.

"वह मदद के लिए, लोगों को बचाने के लिए दौड़ा.."

कर्नल गाइ मदार आखिरी व्यक्ति थे जिन्होंने आखिरी बार ग्विली को जीवित देखा था. इजरायली अधिकारी कई महीने बाद ग्विली के माता-पिता को सूचित कर पाए कि हमास के हमले की दिन ही उनके बेटे की हत्या कर दी गई थी और उसका शव गाजा ले जाया गया था. ग्विली के पिता ने दिसंबर 2025 में एएफपी को बताया था, "वह मदद के लिए, लोगों को बचाने के लिए दौड़ा... भले ही वह 7 अक्टूबर से पहले ही घायल हो गया था. लेकिन वह मेरा बेटा रैन था- हमेशा आगे दौड़ता था, सबसे पहले मदद करता था." उनकी मां तालिक ग्विली ने कहा, "वह आखिरी गोली तक लड़ता रहा और फिर उसे बंधक बना लिया गया."

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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
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