
अमेरिका ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ काम करता रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों जैसी वारदात को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहें।
अमेरिका ने यह बात ऐसे समय में कही है जब एक दिन पहले ही ऐसी रिपोर्ट आई जिसमें दावा किया गया कि अगर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय होता तो मुंबई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले को रोका जा सकता था।
अमेरिकी विदेश विभाग की उप-प्रवक्ता मैरी हार्फ ने कहा, 'पिछले छह वर्षों में, अमेरिका में खुफिया एजेंसियों ने अपने सभी सहयोगियों के साथ मिलकर काम किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम मुंबई जैसे हमले दोबारा होने से पहले ही उन्हें रोकने के लिए तैयार रहें।'
26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों के बारे में हाल में 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' में छपी एक खोजी खबर उस सूचना के बारे में थी, जो 26/11 के हमले से पहले भारत, अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों के पास थी।
इस खबर से जुड़े सवाल के जवाब में हार्फ ने कहा, 'खुफिया समुदाय ने हमारी एजेंसियों के बीच में और खुफिया समुदाय एवं अमेरिका के कानून प्रवर्तन के बीच के आपसी समन्वय और खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान में तो सुधार किया ही है, साथ ही हमारे विदेशी सहयोगियों के बीच भी इस पर सुधार हुआ है।'
द न्यूयॉर्क टाइम्स, प्रोपब्लिका और पीबीएस शृंखला 'फ्रंटलाइन' की 'इन 2008 मुंबई किलिंग्स, पाइल्स ऑफ स्पाई डाटा, बट एन अनकंप्लीट पज़ल' शीषर्क वाली विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया था कि 'मुंबई हमलों का छिपा इतिहास आतंकवाद-निरोधी हथियार के रूप में कंप्यूटर निगरानी की कमजोरी के साथ-साथ मजबूती और अवरोधन को भी उजागर करता है।'
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