विज्ञापन

चीन की धमकी से डर गए ट्रंप? कहा- ताइवान को अभी नहीं बेचेंगे हथियार

अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा के लिए जरूरी सैन्य मदद देने के लिए बाध्य है. ऐसे में ताइवान को हथियारों की बिक्री को एक 'सौदेबाजी का मोहरा'बनाना कई लोगों को रास नहीं आ रहा है.

चीन की धमकी से डर गए ट्रंप? कहा- ताइवान को अभी नहीं बेचेंगे हथियार
ट्रंप ताइवान को चीन के साथ मोलभाव करने का जरिया मान रहे हैं. (फाइल फोटो))
AFP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के ठीक बाद ताइवान को लेकर बयान दिया है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह ताइवान के साथ होने वाले 14 अरब डॉलर के सैन्य समझौते को फिलहाल टाल रहे हैं. इस फैसले को चीन की धमकी के आगे ट्रंप के पैर पीछे खींचने के तौर पर देखा जा रहा है. क्योंकि बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि अमेरिका को ताइवान का मुद्दा अच्छे से संभालना चाहिए वरना स्थिति संघर्ष की हद तक पहुंच सकती है.  ट्रंप ने खुद माना है कि ताइवान को हथियारों की सप्लाई अब इस बात पर निर्भर करेगी कि चीन अमेरिका के साथ कैसी डील करता है.

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह ताइवान के महीनों से अटके पड़े हथियार सौदे को मंजूरी देंगे? इस पर ट्रंप ने दोटूक कहा, "मैं इसे अभी रोक कर रख रहा हूं और यह चीन पर निर्भर करता है. साफ कहूं तो यह हमारे लिए मोलभाव (नेगोशिएशन) का एक बहुत अच्छा जरिया है. आखिर यह बहुत सारे हथियार की बात है."

चीन के प्रेशर में हैं ट्रंप?

इस बयान के बाद ट्रंप प्रशासन की नीति पर सवाल उठने लगे हैं. ताइवान को लेकर चीन का रुख हमेशा से बेहद आक्रामक रहा है; वह इसे अपना ही एक हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक इस पर कब्जा करने की बात भी कहता रहा है. दूसरी तरफ, अमेरिका भले ही बीजिंग की 'वन चाइना' नीति के तहत ताइवान को एक अलग देश के रूप में मान्यता नहीं देता, लेकिन वह हमेशा से ताइवान का सबसे बड़ा समर्थक और हथियारों का सप्लायर रहा है.

अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा के लिए जरूरी सैन्य मदद देने के लिए बाध्य है. ऐसे में ताइवान को हथियारों की बिक्री को एक 'सौदेबाजी का मोहरा'बनाना कई लोगों को रास नहीं आ रहा है. ट्रंप ने पत्रकारों को संकेत दिए हैं कि उन्होंने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन चीन के भारी विरोध के कारण फिलहाल यह डील अधर में लटकी हुई है.

रिपब्लिकन सांसदों का फूटा गुस्सा

ट्रंप के इस फैसले से खुद उनकी पार्टी के सांसद और अमेरिकी कांग्रेस के रिपब्लिकन नेता बेहद नाराज हैं. बीजिंग से लौटते ही ट्रंप को अपनी ही पार्टी के भीतर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिकी सांसद लगातार दबाव बना रहे हैं कि ताइवान की सैन्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 11 अरब डॉलर से लेकर 14 अरब डॉलर तक के इस हथियार पैकेज को तुरंत मंजूरी दी जाए.

पेंसिल्वेनिया के प्रतिनिधि ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने ट्रंप के इस रुख की आलोचना करते हुए कहा, "हमें ताइवान का वैसे ही समर्थन करना चाहिए जैसे हम यूक्रेन का कर रहे हैं. ये लोकतंत्र के वे गढ़ हैं जिन्हें हमारी सुरक्षा की सख्त जरूरत है."

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com