- सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन वह सामने नहीं आए हैं
- ईरान में सत्ता को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स एक प्रमुख ताकत बनकर उभरा है
- अन्य विकल्पों में सादिक लारिजानी और मोहम्मद बागेर गालिबाफ जैसे नेता भी उभरते दिख रहे हैं
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 17 दिन बीत चुके हैं. इस दौरान अमेरिका और इजरायल ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को चुन-चुनकर खत्म कर रहे हैं. खामेनेई के बाद ईरान के दूसरे सबसे ताकतवर शख्स अली लारीजानी और बासिज फोर्स के प्रमुख गुलाम रजा सुलेमानी भी मारे जा चुके हैं. बुधवार को इजरायल ने ईरान के खुफिया मामलों के मंत्री इस्माइल खातिब को भी खत्म करने का दावा किया. सवाल ये है कि ईरान को अब चला कौन रहा है? सत्ता की असल बागडोर किसके हाथ में है?
ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को औपचारिक रूप से सुप्रीम लीडर घोषित किया जा चुका है. हालांकि अपने पिता और कई रिश्तेदारों की मौत के बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. बुधवार को दूसरी बार मुजतबा का सार्वजनिक बयान आया, लेकिन वह नहीं दिखे. इस स्थिति से उनके गंभीर रूप से घायल होने का शक गहरा गया है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स - IRGC
ईरान में सत्ता को लेकर अनिश्चितताओं के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) एक प्रमुख ताकत बनकर उभरा है. अपनी विशाल सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक पहुंच और विकेंद्रीकृत कमांड स्ट्रक्चर की बदौलत आईआरजीसी अपने नेतृत्व को लगे झटकों को सहने में सक्षम है. सरकार के हाशिए पर होने की अटकलों के बीच, IRGC एक मिलिट्री जुंटा की तरह स्वायत्त रूप से युद्ध की रणनीति तय कर रहा है.

1 फरवरी 2026 को ईरानी संसद के सदस्य आईआरजीसी की वर्दी में 'अमेरिका की मौत' के नारे लगाते दिखे थे. Photo Credit: AFP
सादिक लारिजानी
ईरान में सत्ता के अन्य विकल्पों पर नजर डालें तो सादिक लारिजानी का नाम मजबूती से उभर रहा है. सादिक ईरान के दिवंगत सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी के भाई हैं और फिलहाल एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल के चेयरमैन हैं. इजरायल में मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रेसिडेंट यीगल कारमोन के मुताबिक, सादिक लारिजानी एक स्वीकार्य चेहरा हो सकते हैं, क्योंकि IRGC को कोई कट्टरपंथी चेहरा चाहिए होगा. ऐसा चेहरा जो सेना के साथ मिलकर, उससे तालमेल बनाकर काम कर सके.
मोहम्मद बागेर गालिबाफ
ईरान में सत्ता की रेस में मोहम्मद बागेर गालिबाफ का नाम भी लिया जा रहा है. गालिबाफ ईरानी संसद के स्पीकर हैं. वह IRGC में वायुसेना के पूर्व कमांडर रहे हैं. वह सरकारी टीवी पर अक्सर "अमेरिका-इजरायल की मौत" के नारे लगाते दिखते रहे हैं. ऐसे में मिलिट्री बैकग्राउंड और अमेरिका-इजरायल विरोधी छवि उन्हें कट्टरपंथियों और सेना के बीच लोकप्रिय बनाती है.
अंतरिम लीडरशिप काउंसिल
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने आधिकारिक तौर पर सरकार चलाने के लिए एक लीडरशिप काउंसिल बनाई है. इस काउंसिल में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, वरिष्ठ मौलवी अलीरेजा आराफी और न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई शामिल हैं. हालांकि असल ताकत किसके पास है, इसे लेकर एकराय नहीं दिखती. IRGC के कमांडर अहमद वाहिद ने मुजतबा खामेनेई के नाम को आगे बढ़ाया था, जबकि कई नरमपंथी गुट ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी, हसन खुमैनी और अलीरेजा अराफी जैसे अपेक्षाकृत मध्यमार्गी नेता की पैरवी कर रहे थे.
तो क्या फंस जाएगा अमेरिका?
विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष में ईरानी लीडरशिप खत्म होने से ईरान का भविष्य और अधिक कट्टरपंथ की तरफ बढ़ सकता है. जॉन हॉपकिंस स्कूल ऑफ एडवांस इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर वली नासिर कहते हैं कि लारिजानी के उत्तराधिकारी का फैसला आईआरसीजी ही करेगा. हर नए लीडर की हत्या के साथ ईरान का नेतृत्व और अधिक उग्र होगा. इससे न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र का भविष्य अंधकारमय हो सकता है. ऐसे में अमेरिका के लिए इस संघर्ष से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो सकता है.
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