US Iran War: क्या अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 38 दिनों से जारी जंग को अब 'धर्मयुद्ध' का रूप दिया जा रहा है. जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में एक अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन को “ईस्टर का चमत्कार” बताया है और ईरान को तबाह करने की धमकी देते हुए आखिर में जिस तरह "अल्लाह की जय हो" कहा है, आलोचक सवाल उठाने लगे हैं. खास बात यह है कि जंग की शुरुआत में भी एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका के सैन्य कमांडर ईरान युद्ध में अपने सैनिकों की भागीदारी को उचित ठहराने के लिए बाइबिल में दिए "कयामत के दिन" का सहारा ले रहे हैं. चलिए पहले आपको बताते हैं कि अमेरिकी कमांडरों पर क्या आरोप लगे थे और अब ट्रंप क्या कर रहे हैं.
क्या अमेरिकी कमांडर जंग में बाइबिल को टूल बना रहे हैं?
पिछले महीने 30 डेमोक्रेटिक अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने अमेरिकी रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल प्लैट मॉरिंग से जांच करने को कहा था. उनका कहना था कि रिपोर्टें आई हैं कि अमेरिकी सेना के कुछ लोग ईरान के खिलाफ युद्ध को सही ठहराने के लिए “बाइबिल की अंतिम समय की भविष्यवाणियों” का हवाला दे रहे हैं. सांसदों ने अपने पत्र में लिखा, “जब अरबों डॉलर और अनगिनत लोगों की जान दांव पर लगी है और ट्रंप सरकार ईरान में अपनी पसंद का युद्ध लड़ रही है, तब धर्म और सरकार के बीच सख्त अलगाव बनाए रखना और हमारे सैनिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना बहुत जरूरी है.”
पत्र में आगे लिखा गया, “हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सैन्य अभियान तथ्यों और कानून के आधार पर चलें, न कि दुनिया के अंत की भविष्यवाणियों और कट्टर धार्मिक विश्वासों के आधार पर.”
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अब ट्रंप की बोली
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने रविवार को पायलट के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को “ईस्टर का चमत्कार” बताया. उन्होंने इस अभियान को धार्मिक शब्दों में पेश किया और दिखाने की कोशिश की कि यह युद्ध एक सही कारण के लिए है और ईश्वर का आशीर्वाद इसमें है. पहले आमतौर पर अमेरिका की सरकारें ईस्टर पर सिर्फ साधारण बधाई संदेश देती थीं. लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार आलोचकों ने कहा कि इस बार अधिकारियों के संदेशों ने धर्म और सरकारी नीति के बीच की सीमा को धुंधला कर दिया, क्योंकि उन्होंने युद्ध को सही ठहराने और सेना की कार्रवाई को समझाने के लिए धर्म का सहारा लिया है.
ट्रंप ने NBC के एक प्रोग्राम में कहा कि “यह रेस्क्यू ईस्टर का चमत्कार था.” इसके बाद उनके कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने भी ऐसा मैसेज दिया. (ईस्टर वह दिन है जब ईसाई मानते हैं कि ईसा मसीह मृतकों में से फिर जीवित हुए थे.)
एक तरफ तो ट्रंप ने ईस्टर का जिक्र किया तो दूसरी तरफ एक अलग मैसेज में ट्रंप ने मुस्लिम धर्म को लेकर कुछ और कहा. उन्होंने सोशल मीडिया पर धमकी दी कि वे बिजली घरों और पुलों पर हमला कर सकते हैं. उन्होंने तेहरान को गाली देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को कहा और लिखा कि ऐसा नहीं किया तो “नरक में जीना पड़ेगा.” अंत में उन्होंने लिखा, “अल्लाह की जय हो (प्रेज टू अल्लाह)”
धर्म और नीति को जोड़ने पर आलोचना
ट्रंप ने 2025 में अपने शपथ ग्रहण समारोह में कहा था कि 2024 के चुनाव अभियान के दौरान उन पर हुए हत्या के प्रयास से उन्हें बचाने में भगवान की भूमिका थी. उन्होंने कहा, “मुझे तब लगा था और अब और ज्यादा विश्वास है कि मेरी जिंदगी किसी कारण से बची. भगवान ने मुझे अमेरिका को फिर महान बनाने के लिए बचाया.”
रविवार को उनके धार्मिक शब्दों के साथ सैन्य कार्रवाई की धमकी देने पर कई लोगों ने आलोचना की है. रिपब्लिकन पार्टी की पूर्व सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने X पर लिखा कि ट्रंप ईसाई मूल्यों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार में मौजूद ईसाइयों को “युद्ध बढ़ाने” के बजाय “शांति की कोशिश” करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ईसा मसीह की शिक्षा माफी और प्रेम पर जोर देती है, यहां तक कि दुश्मनों के प्रति भी.
वहीं काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशन्स (CAIR) ने भी ट्रंप की भाषा की निंदा की. संगठन ने बयान में कहा कि “इस्लाम का मजाक उड़ाना और नागरिक ढांचे पर हमला करने की धमकी देना” लापरवाही और खतरनाक है. CAIR ने कहा कि हिंसक धमकियों के बीच “अल्लाह की जय हो” जैसे शब्दों का साधारण उपयोग दिखाता है कि धार्मिक भाषा का हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और मुसलमानों और उनके विश्वास के प्रति अनादर दिखाया जा रहा है.
ईरान पर भी ऐसा ही आरोप
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था शिया इस्लाम के उस विश्वास पर आधारित है कि धार्मिक अधिकार पैगंबर मोहम्मद की वंश से आने वाले इमामों को मिलता है. ईरान अक्सर अमेरिका को “ग्रेट शैतान” कहता है और अपने सैन्य प्रचार में धार्मिक भाषा का इस्तेमाल करता है, जहां मारे गए लड़ाकों को शहीद बताया जाता है.
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