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ईरान के लिए मंगलवार होगा 'अमंगल'? रात 8 बजे नरक बनाने को तैयार ट्रंप, उधर UN में चीन-रूस बने 'संकटमोचक'

US Iran War and Hormuz Blockade: मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव पर वोटिंग होने की उम्मीद है.

ईरान के लिए मंगलवार होगा 'अमंगल'? रात 8 बजे नरक बनाने को तैयार ट्रंप, उधर UN में चीन-रूस बने 'संकटमोचक'
US Iran War: ईरान के लिए मंगलवार होगा 'अमंगल'?
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात आठ बजे तक समझौता करने का अल्टीमेटम दिया है
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव पर मंगलवार को वोट करेगी
  • चीन और रूस ने बल प्रयोग की अनुमति देने वाले प्रस्ताव का विरोध कर इसे कमजोर कर दिया है
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ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति ने समझौता करने के लिए मंगलवार, 7 अप्रैल की रात 8 बजे तक का अल्टीमेटल दिया है. ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो वे उसे नरक बना देंगे और उसे एक रात में ही खत्म किया जा सकता है. इस धमकी के बीच मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव पर वोटिंग होने की उम्मीद है. हालांकि यहां ईरान को चीन का साथ मिला है और यह प्रस्ताव पहले की तुलना में काफी कमजोर कर दिया गया है. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वीटो अधिकार रखने वाले देश चीन ने होर्मुज खुलवाने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने का विरोध किया है. यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने राजनयिकों के हवाले से दी है.

ईरान के साथ खड़े चीन और रूस

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य हैं. इस समय परिषद की अध्यक्षता बहरीन कर रहा है. बहरीन ने इस प्रस्ताव को पास कराने के लिए कई ड्राफ्ट तैयार किए हैं ताकि चीन, रूस और कुछ अन्य देशों के विरोध को दूर किया जा सके. रॉयटर्स द्वारा देखे गए प्रस्ताव के नए ड्राफ्ट में बल प्रयोग की साफ अनुमति देने वाली बात को हटा दिया गया है.

इसके बजाय प्रस्ताव में कहा गया है कि “जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें परिस्थितियों के अनुसार आपस में मिलकर रक्षात्मक तरीके से प्रयास करने के लिए जोरदार तरीके से प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि इस जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और संरक्षित रह सके.” ध्यान रहे कि होर्मुज खुलवाने के लिए ताकत के इस्तेमाल की बात नहीं की गई है, बल्कि रक्षात्मक तरीके अपनाने की बात कही गई है.

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इन प्रयासों में “व्यापारिक और माल ढोने वाले जहाजों को सुरक्षा के साथ एस्कॉर्ट करना” भी शामिल हो सकता है.

इसके अलावा प्रस्ताव में उन कोशिशों का भी समर्थन किया गया है जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को बंद करने, रोकने या उसमें दखल देने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए की जाएं.

प्रस्ताव सफल होगा या नहीं?

रिपोर्ट के अनुसार राजनयिकों ने कहा कि कमजोर किया गया यह प्रस्ताव पास होने की ज्यादा संभावना रखता है, लेकिन अभी भी यह साफ नहीं है कि यह सफल होगा या नहीं. इसे पास होने के लिए कम से कम 9 देशों के समर्थन की जरूरत होगी और सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्य देशों- ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका- में से किसी का भी वीटो नहीं होना चाहिए. यानी चीन और रूस जब चाहे इस प्रस्ताव को गिरा सकते हैं.

बता गें कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. इसकी वजह है कि ईरान ने काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है. यह जलडमरूमध्य दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है. यहां से दुनिया का लगभग 20-25 प्रतिशत तेल और गैस यहां से गुजरता है.

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