वाशिंगटन:
अमेरिका ने कहा है कि अगर अफगानिस्तान विद्रोही गतिविधियों से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए भारत से सीधी सैन्य मदद मांगता है तो इससे वाशिंगटन को कोई आपत्ति नहीं होगी।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने इस मुद्दे और अफगान लोगों के बारे में भारत से चर्चा की है और मुझे यहां इसमें कोई विशेष समस्या नजर नहीं आती। अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने का आग्रह किया। वह एक भारतीय समाचार पत्र की खबर से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे। इस खबर के अनुसार, अफगान सेना के कमांडरों और खुफिया अधिकारियों ने देश के अनुभवहीन सैन्यबलों को सीधी सैन्य मदद देने के लिए भारत से आग्रह शुरू कर दिया है।
इस खबर में यह भी दावा किया गया कि अफगान राष्ट्रीय सुरक्षाबल ने ढाई से सात टन तक भार ले जाने की क्षमता रखने वाले मध्यम आकार के ट्रकों के साथ कई प्रमुख सैन्य उपकरणों, पुल बांधने के उपकरणों, अभियांत्रिकी सुविधाओं, गोला बारूद एवं आयुध की मांग की है।
खबर के अनुसार, अफगानिस्तान ने भारत से अपने बलों की वायु सैन्य क्षमताएं विकसित करने के लिए सहयोग का भी निवेदन किया है, ताकि 2014 में पश्चिमी सेनाओं की वापसी के लिए अफगान सैनिकों को तैयार किया जा सके। अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और अफगानिस्तान ने एक ‘स्पष्ट सहमति’ वाली योजना विकसित की है, जिसमें अफगानिस्तान में विद्रोही गतिविधियों से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा क्षमताएं विकसित करने के लिए सहयोग मिलने की बात शामिल है।
अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए अधिकारी ने कहा, हमें लगता है कि आपसी सहमति की इस योजना के तहत काम जारी रखना महत्वपूर्ण है। पेंटागन की ओर से अफगानिस्तान में हुई प्रगति पर छमाही रिपोर्ट कांग्रेस को सौंपे जाने के बाद अधिकारी ने कहा, ‘भारत ने कई क्षेत्रों में अफगानिस्तान के साथ काफी सहयोग किया है। हमें लगता है यह काफी सकारात्मक रहा है। अखबार की टिप्पणी में कहा गया था कि भारत अफगानिस्तान में शासन प्रणाली, आर्थिक और शिक्षा क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ बड़ी ढांचागत परियोजनाओं में भी शामिल रहा है। ऐसे में भारत यहां खनिज क्षेत्र में अपने निवेश को विस्तारित कर सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने इस मुद्दे और अफगान लोगों के बारे में भारत से चर्चा की है और मुझे यहां इसमें कोई विशेष समस्या नजर नहीं आती। अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने का आग्रह किया। वह एक भारतीय समाचार पत्र की खबर से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे। इस खबर के अनुसार, अफगान सेना के कमांडरों और खुफिया अधिकारियों ने देश के अनुभवहीन सैन्यबलों को सीधी सैन्य मदद देने के लिए भारत से आग्रह शुरू कर दिया है।
इस खबर में यह भी दावा किया गया कि अफगान राष्ट्रीय सुरक्षाबल ने ढाई से सात टन तक भार ले जाने की क्षमता रखने वाले मध्यम आकार के ट्रकों के साथ कई प्रमुख सैन्य उपकरणों, पुल बांधने के उपकरणों, अभियांत्रिकी सुविधाओं, गोला बारूद एवं आयुध की मांग की है।
खबर के अनुसार, अफगानिस्तान ने भारत से अपने बलों की वायु सैन्य क्षमताएं विकसित करने के लिए सहयोग का भी निवेदन किया है, ताकि 2014 में पश्चिमी सेनाओं की वापसी के लिए अफगान सैनिकों को तैयार किया जा सके। अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और अफगानिस्तान ने एक ‘स्पष्ट सहमति’ वाली योजना विकसित की है, जिसमें अफगानिस्तान में विद्रोही गतिविधियों से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा क्षमताएं विकसित करने के लिए सहयोग मिलने की बात शामिल है।
अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए अधिकारी ने कहा, हमें लगता है कि आपसी सहमति की इस योजना के तहत काम जारी रखना महत्वपूर्ण है। पेंटागन की ओर से अफगानिस्तान में हुई प्रगति पर छमाही रिपोर्ट कांग्रेस को सौंपे जाने के बाद अधिकारी ने कहा, ‘भारत ने कई क्षेत्रों में अफगानिस्तान के साथ काफी सहयोग किया है। हमें लगता है यह काफी सकारात्मक रहा है। अखबार की टिप्पणी में कहा गया था कि भारत अफगानिस्तान में शासन प्रणाली, आर्थिक और शिक्षा क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ बड़ी ढांचागत परियोजनाओं में भी शामिल रहा है। ऐसे में भारत यहां खनिज क्षेत्र में अपने निवेश को विस्तारित कर सकता है।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Afghanistan Help, US On Afghanistan, India In Afghanistan, अफगानिस्तान की मदद, अफगानिस्तान पर अमेरिका, अफगानिस्तान में भारत