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अमेरिका ने पैसिफिक कमांड से निकाला 'इंडो' तो शशि थरूर ने उठाया सवाल- Quad के ताबूत में एक और कील?

आज से 8 साल पहले डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) किया गया था.

अमेरिका ने पैसिफिक कमांड से निकाला 'इंडो' तो शशि थरूर ने उठाया सवाल- Quad के ताबूत में एक और कील?
अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदला
  • अमेरिका ने अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम फिर बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है
  • इस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने आठ साल पहले लिए गए अपने ही फैसले को उलट दिया है
  • प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?"

विलियम शेक्सपियर ने अपने महान नाटक 'रोमियो और जूलियट' में लिखा था कि नाम में क्या रखा है. लेकिन सच्चाई यह है कि नाम में बहुत कुछ रखा है. देखिए अमेरिका ने नाम बदले का एक ऐसा फैसला लिया है जिसपर भारत सचेत हो सकता है. अमेरिका ने अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम फिर से बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है. इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है. कई जानकारों का कहना है कि कमांड के नाम से "इंडो" शब्द हटाने का मतलब यह हो सकता है कि अमेरिका अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्वाड जैसे समूहों को लेकर अपने स्टैंड में बदलाव कर रहा है.

अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है.

इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है. इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी.

बता दें कि क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं.

अमेरिका ने क्या कहा?

उस रहे सवालों के बावजूद अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ नाम बदलने का फैसला है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कमांड की संरचना, जिम्मेदारियां और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताएं पहले जैसी ही रहेंगी. यूएस पैसिफिक कमांड का क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है.

अब नाम से "इंडो" हटाने का यह कदम 2018 में किए गए बदलाव को उलट देता है. 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही इस कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड किया गया था. उस समय अमेरिका ने कहा था कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र का रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा था और उसका संबंध प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा से लगातार गहरा होता जा रहा था.

2018 में नाम क्यों बदला गया था?

बता दें कि इस कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को हुई थी. यह 70 साल से अधिक समय तक यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) के नाम से काम करता रहा. यह अमेरिका के सभी संयुक्त सैन्य कमांडों में सबसे पुराना और सबसे बड़ा कमांड माना जाता है. इसकी जिम्मेदारी में आना वाला क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ था.

2018 में इसका नाम बदला गया. तत्कालीन रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा था कि नाम इसलिए बदला जा रहा है क्योंकि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है. उस समय इस बदलाव से समझा गया कि अमेरिका इस बात को स्वीकार कर रहा है कि हिंद महासागर और दक्षिण एशिया की गतिविधियां अब प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा से गहराई से जुड़ चुकी हैं.

भारत के लिए इस कमांड का महत्व

समय के साथ यह कमांड भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया. इंडो-पैसिफिक ढांचे के तहत इस कमांड ने भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ावा दिया है. इसमें दोनों देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्र में कॉर्डिनेशन, खुफिया जानकारी एक-दूसरे को शेयर करना तथा व्यापक रणनीतिक सहयोग शामिल रहा है.

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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
आशुतोष कुमार सिंह NDTV इंडिया के साथ बतौर चीफ सब-एडिटर काम करते हैं. इससे पहले द क्विंट के साथ असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम कर चुके हैं. देहाती यादो... और पढ़ें
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