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आबादी के लिहाज से 2100 ईस्वी में कैसी दिखेगी दुनिया? भारत कैसा होगा

दशकों पुरानी 'वन चाइल्ड पॉलिसी' और आधुनिक जीवनशैली के चलते चीन में युवाओं की भारी कमी होने वाली है. आने वाले कुछ दशकों में ये स्थिति बुरी हो जाएगी.

आबादी के लिहाज से 2100 ईस्वी में कैसी दिखेगी दुनिया? भारत कैसा होगा
प्रतीकात्मक तस्वीर
NDTV

सदी का अंत होते-होते दुनिया का भूगोल भले न बदले, लेकिन जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल चुकी होगी. संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुमानों के मुताबिक, साल 2100 तक वैश्विक आबादी का संतुलन पूरी तरह से शिफ्ट हो जाएगा. वह दुनिया कैसी होगी? एक ऐसी दुनिया जहां चीन की महाशक्तिशाली आबादी सिकुड़कर आधी रह जाएगी, अफ्रीका इंसानी आबादी का नया केंद्र बनेगा और भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश तो रहेगा, लेकिन उसकी ज्यादा आबादी बूढ़ी हो चुकी होगी.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2100 में हमारी दुनिया और हमारा भारत कैसा दिखने वाला है इस आर्टिकल में समझने की कोशिश करते हैं.

भारत 'युवा' नहीं रहेगा

आज भारत दुनिया का सबसे युवा और सबसे बड़ी आबादी वाला देश है. लेकिन 2100 आते-आते यह तस्वीर काफी बदल जाएगी. भारत सदी के अंत में भी दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना रहेगा. हालांकि, दूसरे देशों के मुकाबले आज जो आबादी का एक बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है, वह तब तक काफी कम हो चुका होगा.

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर
Photo Credit: Pixabay

आज हम जिस 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' पर गर्व करते हैं, वह 2100 तक नहीं बचेगा. यानी तब युवा आबादी कम हो जाएगी. बुजुर्गों की संख्या बढ़ने और जन्म दर में गिरावट के कारण भारत तब एक युवा देश नहीं रह जाएगा. देश की वर्क फोर्स कम होगी और आश्रितों की संख्या में भारी इजाफा होगा.

दुनिया के दो अन्य बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव इस सदी के अंत तक पूरी तरह साफ हो जाएंगे. कभी दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले चीन में जनसांख्यिकीय संकट गहराएगा. 2100 तक चीन की आबादी भारी गिरावट के साथ सिकुड़ जाएगी.

जहां एक तरफ एशिया और यूरोप की आबादी थमेगी, वहीं अफ्रीकी देशों में आबादी बढ़ने की दर सबसे ज्यादा होगी. सदी के अंत तक वैश्विक आबादी को बढ़ाने में अफ्रीकी महाद्वीप की भूमिका सबसे बड़ी होने वाली है.

इमीग्रेशन बनेगा विकसित देशों का सहारा

जब किसी देश के मूल निवासियों की जन्म दर गिरने लगती है, तो वहां की अर्थव्यवस्था को बचाने का एक ही रास्ता बचता है. ये रास्ता बाहर से आने वाले लोग होते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान बताते हैं कि 2100 तक दुनिया के 62 देशों और क्षेत्रों में आबादी बढ़ने या स्थिर रहने का मुख्य कारण सिर्फ और सिर्फ 'इमिग्रेशन' यानी प्रवासन होगा. ये देश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका है.

अगर इन देशों ने अपनी इमिग्रेशन नीतियों को लचीला नहीं रखा, तो इनकी आबादी में भारी गिरावट आ सकती है. बाहरी देशों से जाकर बसने वाले लोग ही इन विकसित देशों की फैक्ट्रियों, दफ्तरों और अर्थव्यवस्था को जिंदा रखेंगे.
2100 में भारत की आबादी बुजुर्ग हो जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

2100 में भारत की आबादी बुजुर्ग हो जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Photo Credit: Pixabay

2100 ईस्वी में दुनिया के सामने क्या चुनौतियां होंगी?

संयुक्त राष्ट्र की के अनुसार, 2100 की दुनिया के सामने ये 3 बड़ी चुनौतियां होंगी. अव्वल तो पेंशन और हेल्थकेयर का संकट होगा. जब भारत समेत आधी दुनिया बुजुर्ग हो जाएगी, तो सरकारों पर पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी बोझ पड़ेगा.

लेबर शॉर्टेज भी होगी. चीन और अन्य एशियाई देशों में काम करने वाले युवाओं की कमी से ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग प्रभावित हो सकती है. एक तरफ अफ्रीका में संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा, तो दूसरी तरफ यूरोप और पूर्वी एशिया के कई देश खाली हो रहे घरों और बंद होते स्कूलों की समस्या से जूझेंगे.

सोर्स: United Nations World Population Prospects 2024

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