अमेरिका और ईरान की लड़ाई के बीच खाड़ी देशों में भी जंग की लपटें पहुंची. इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल में अमेरिका और ईरान की सीजफायर की घोषणा के कुछ दिनों बाद यूएई ने ईरान के अंदर जवाबी हवाई हमले किए. इससे पता चलता है कि जंग में यूएई की भागीदारी पहले से कहीं ज़्यादा गहरी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में ईरान की कई अहम जगहों को निशाना बनाया गया. इसमें फारस की खाड़ी में लावन आइलैंड पर एक रिफ़ाइनरी, होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम और अबू मूसा आइलैंड, बंदर अब्बास का पोर्ट शहर और बड़ा असलुयेह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं.
प्रतिरोध बनकर उभरा UAE
मामले से जुड़े सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि UAE ने ईरान के खिलाफ़ एक बड़े मिलिट्री कैंपेन के हिस्से के तौर पर यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल के साथ मिलकर काम किया. ये हमले सीजफायर की घोषणा के बाद भी हफ़्तों तक जारी रहा था.
हालांकि यूएई के हमले से एक बात स्पष्ट हो चुकी है कि देश ईरान के सामने प्रतिरोध बनकर उभरा है. जहां बाकी के खाड़ी देश खुद पर हो रहे हमलों से बचने तक ही सीमित थे. तब संयुक्त अरब अमीरात ने तेहरान को हमले से प्रतिरोध का मैसेज दिया.
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