भारत में ईसाई समुदाय के लिए रविवार का दिन खुशी से झूम वाला है क्योंकि पोप फ्रांसिस केरल से ताल्लुक रखने वाले फादर कुरूयाकोसे एलियास चवारा और सिस्टर यूफरासिया को आज वेटिकन में संत घोषित किया गया।
दोनों लोगों के ‘कैननाइजेशन’, जो कैथलिक प्रक्रिया में अंतिम चरण के तौर पर जाना जाता है। इसके साथ ही सदियों पुराने सायरो मालाबार गिरजाघर से ताल्लुक रखने वाले संतों की संख्या तीन हो गई। इससे पहले साल 2008 में इसी गिरजाघर की सिस्टर अलफोंसा को संत का ओहदा मिला था।
चर्च के विद्वानों के अनुसार साइरो मालाबार चर्च रोम के साथ फुल कम्युनियन रखने वाले 22 ईस्टर्न चर्चों में से एक है। साइरो मालाबार चर्च की जड़ें पहली ईसवी सदी में केरल के तटीय क्षेत्र में ईसाई धर्म प्रचारक सेंट थॉमस की यात्रा से जुड़ी हैं।
गिरजाघर के अनुसार वेटिकन में पोप चवारा और यूफरासिया को संत घोषित किया गया। यह घोषणा सेंट पीटर्स स्क्वायर के एक विशेष प्राथना के दौरान की गई।
इस अहम क्षण का गवाह बनने के लिए केरल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, कार्डिनल एवं नन केरल से रवाना हुए थे। इस मौके पर राज्य के कैथोलिक गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना का आयोजन भी हुआ।
वेटिकन के सेंट पीटर्स स्क्वायर में विशेष प्रार्थना सभा के दौरान चवारा और यूफ्रेसिया को पोप द्वारा संत घोषित किए जाने के साथ ही केरल के सभी चर्चों में उल्लास और आध्यात्मिक उत्साह की लहर दौड़ गई, जहां बड़ी संख्या में लोग प्रार्थना सभाओं के लिए एकत्रित हुए।
केरल में दो स्थान ऐसे हैं जो चवारा और यूफरासिया से बड़ी निकटता से संबंधित हैं। ये स्थान कोट्टायम का मन्नमान और त्रिसूर में ओलूर हैं।
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