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ट्रंप की 'हार' है मुजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना! समझिए उनके चुने जाने का क्या हो सकता है असर?

मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है. इसे अमेरिका के लिए कूटनीतिक हार माना जा रहा है.

ट्रंप की 'हार' है मुजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना! समझिए उनके चुने जाने का क्या हो सकता है असर?
डोनाल्ड ट्रंप और मुजतबा खामेनेई.
IANS
  • अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी
  • दस दिनों के भीतर ईरान ने मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुनकर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है
  • मुजतबा के चुने जाने के बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले तेज कर तेल की कीमतें बढ़ा दी हैं
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तेहरान:

अमेरिका और इजरायल के हमले में 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू हो गई है. जंग के 10 दिन के भीतर ही ईरान ने नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है. अब खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. लेकिन इसके बाद मिडिल ईस्ट में टेंशन और बढ़ गया है. 

मुजतबा खामेनेई के चुने जाने के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं. बहरीन की तेल रिफाइनरी और सऊदी की ऑयल फील्ड्स को निशाना बनाया गया है. इसका नतीजा ये हुआ कि कच्चा तेल और महंगा हो गया. अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बेंट क्रूड की कीमतें 27% बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. ये 2022 के बाद सबसे ज्यादा है.

क्या अमेरिका के लिए बड़ी हार है?

मुजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर चुनाव अमेरिका के लिए हार माना जाता है. इससे ईरान ने अमेरिका को आर-पार की जंग के संकेत दे दिए हैं. ईरान ने किसी भी तरह के समझौते के बजाय टकराव का रास्ता चुनते हुए मुजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है. जानकारों का मानना है कि अमेरिका के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक हार है, क्योंकि भारी जोखिम उठाकर किए गए हमले के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया. जानकारों का मानना है कि मुजतबा का चुना जाना दिखाता है कि ईरान सिर्फ और सिर्फ बदला चाहता है.

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खामेनेई से कितने अलग हैं मुजतबा?

अब तक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई थे लेकिन अब उनके बेटे मुजतबा खामेनेई इस पद को संभालेंगे. मुजतबा को अपने पिता से ज्यादा कट्टर माना जाता है.

  • अली खामेनेई एक 'ग्रैंड अयातुल्लाह' थे और उनकी सत्ता क्रांतिकारी विचारधारा और दशकों के राजनीतिक अनुभव पर टिकी थी जबकि मुजतबा को सुरक्षा तंत्र की उपज माना जाता है. वे 'होजतोलेस्लाम' रैंक के हैं, जो अयातुल्ला से एक पायदान नीचे है. उनकी ताकत उनके भाषणों में नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे बनाए गए नेटवर्क में है.
  • अली खामेनेई सार्वजनिक रूप से सक्रिय थे और देश की नीतियों का चेहरा थे. मुजतबा अपने पिता के गेटकीपर कहे जाते थे. उन्होंने सुप्रीम लीडर के दफ्तर को एक 'कमांड हब' में बदल दिया, जो सेना और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रखता है. उन्होंने शायद ही कभी सार्वजनिक भाषण दिए हैं.
  • अली खामेनेई ने IRGC को अपने नियंत्रण में रखा था और वह सेना के ऊपर थे. माना जा रहा है कि मुजतबा को IRGC ने सुप्रीम लीडर बनाया है. ऐसे में वह कट्टरपंथी जनरलों पर ज्यादा निर्भर हो सकते हैं.
  • मुजतबा अपने पिता से भी ज्यादा कट्टरपंथी माने जाते हैं. उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौतों और सुधारवादियों का हमेशा कड़ा विरोध किया है. उनपर करप्शन और चुनाव में धांधली के भी आरोप हैं.

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