अफगानिस्तान में भय और दहशत का माहौल, तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर भी किया कब्जा

आतंकी संगठन के सामने सरकार के इतनी जल्दी हार मान जाने के बाद आतंकवादी समूह ने रविवार रात को राष्ट्रपति भवन (Presidential palace) को कब्जे में ले लिया.

अफगानिस्तान में भय और दहशत का माहौल, तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर भी किया कब्जा

तालिबान द्वारा काबुल को घेरने के बाद अशरफ गनी अफगानिस्तान छोड़ गए.

राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) के देश छोड़ने के बाद तालिबान (Taliban) ने सोमवार को अफगानिस्तान (Afghanistan) पर नियंत्रण कर लिया. आतंकी संगठन के सामने सरकार के इतनी जल्दी हार मान जाने के बाद आतंकवादी समूह ने रविवार रात को राष्ट्रपति भवन (Presidential palace) को कब्जे में ले लिया. जिसके बाद से राजधानी में भय और दहशत का माहौल है. हजारों लोग सोमवार को तालिबान के कट्टर शासन से डरे हुए थे और काबुल (Kabul) से बाहर निकलने की कोशिश में जुटे रहे. जिसके कारण एयरपोर्ट पर भारी भीड़ नजर आई. 

तालिबान द्वारा काबुल को घेरने के बाद रविवार को अशरफ गनी अफगानिस्तान छोड़कर चले गए. तालिबान ने देशव्यापी जीत दर्ज की है. जिसमें सिर्फ दस दिनों में ही सभी शहर उनके पास आ गए. 

गनी ने एक फेसबुक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, 'तालिबान ने अपनी तलवारों और बंदूकों के फैसले से जीत को हासिल किया है और अब वह देशवासियों के सम्मान, संपत्ति और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं.'

सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट के जरिये तालिबान के सह संस्थापक अब्दुल गनी बरादर ने जीत की घोषणा की. उन्होंने कहा, 'अब यह समय टेस्ट और खुद को साबित करने का है. हमें यह दिखाना होगा कि हम देश सेवा, सुरक्षा और जीवन की सुविधा सुनिश्चित कर सकते हैं.'

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अमेरिकी सेना के समर्थन के बिना सरकार गिर गई है, जिसने 11 सितंबर के हमले के बाद 2011 में हमला किया था और अल कायदा का समर्थन करने के लिए तालिबान को गिरा दिया था. हालांकि अरबों के खर्च और दो दशक सैन्य सहायता प्रदान करने के बाद भी अमेरिका अफगानिस्तान में तालिबान का सामना करने के लिए लोकतांत्रिक सरकार बनाने में विफल रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस महीने के आखिर तक अपने सभी सैनिकों की वापसी को लेकर दृढ़ थे. 

हालांकि अफगानिस्तान की सरकार के इतनी तेजी से पतन को लेकर अमेरिकी प्रशासन स्तब्ध रह गया है. सोमवार को तालिबान से डरे अमेरिकी अधिकारी और उनके अफगान सहयोगियों के साथ ही अन्य सोमवार को भागने की कोशिश में जुटे थे. अपने दूतावास के लोगों और दुभाषिये या अन्य रूप में मदद करने वालों को निकालने के लिए छह हजार सैनिकों को हवाई अड्डे पर भेजा है. हालांकि अमेरिका ने भी माना है कि हवाई अड्डे पर उसका नियंत्रण नहीं है. 

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तालिबान विरोधी मजार ए शरीफ और पूर्वी शहर जलालाबाद पर तालिबान का कब्जा होने के बाद रविवार को गनी सरकार पूरी तरह अलग-थलग हो गई. कब्जे वाले अधिकांश शहरों की तरह ही यहां भी सरकारी बलों ने आत्मसमर्पण कर दिया या फिर पीछे हट गए. जिसके बाद तालिबान ने राजधानी को घेर लिया. रविवार की रात को अचानक सरकारी सुरक्षा बलों ने अपनी चौकियों, वर्दी और यहां तक की हथियारों को भी छोड़ दिया. 

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शुरुआत में तालिबान ने आदेश दिया था कि उनके लोग राजधानी में प्रवेश नहीं करेंगे. हालांकि बाद में उनके प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने रविवार रात को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काबुल में प्रवेश किया था. तालिबान के तीन वरिष्ठ सूत्रों ने एएफपी को बताया है कि उनके लोगों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया है और वे सुरक्षा को लेकर बैठक कर रहे हैं. हालिया वक्त में काबुल में शरण लेने वाले हजारों लोगों के लिए यह मुश्किल वक्त है। उनके मन में भय और दहशत है। 



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)