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ट्रक ड्राइवर का बेटा आज है अरबपति, कभी अपना खून बेचकर की थी पढ़ाई

Starbucks के स्टोर को 11 से 35 हजार तक पहुंचाने वाले हॉवर्ड शुल्ट्ज की जिंदगी की कहानी प्रेरणा देती है. कभी परिवार गरीबी में डूबा था और आज हॉवर्ड शुल्ट्ज के पास 3.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति है.

ट्रक ड्राइवर का बेटा आज है अरबपति, कभी अपना खून बेचकर की थी पढ़ाई
Success Story: हॉवर्ड शुल्ट्ज की अरबपति बनने की प्रेरणादायक कहानी (फोटो- AFP)
  • कॉफी इंडस्ट्री में क्रांति लाने वाले हॉवर्ड शुल्ट्ज के पास आज लगभग $3.6 बिलियन की संपत्ति है
  • हॉवर्ड शुल्ट्ज ने पढ़ाई के लिए अपना खून तक बेचा था, वह अपने परिवार में ग्रेजुएट होने वाले पहले व्यक्ति बने
  • हॉवर्ड शुल्ट्ज ने स्टारबक्स के स्टोर को 11 से 35 हजार तक पहुंचाया और उसे एक सोशल हब बना दिया

आज जिन लोगों के पास अरबों-खरबों की दौलत है, उनमें से कुछ ने जिंदगी की शुरुआत में दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष किया था. किसी का बचपन गरीबी में बीता, किसी ने पढ़ाई के लिए अपना खून तक बेचा तो किसी को आलू के कट्टे (बोरे) से बने कपड़े पहनने पड़े. उस समय शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि यही लोग एक दिन दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल होंगे. आखिर कैसे बदली इनकी किस्मत, कैसे ये फर्श से अर्श तक पहुंचे? आज आपको बताते हैं हॉवर्ड शुल्ट्ज की अरबपति बनने की प्रेरणादायक कहानी.

हॉवर्ड शुल्ट्ज की कहानी

स्टारबक्स को पूरी दुनिया में फैलाकर कॉफी इंडस्ट्री में क्रांति लाने वाले हॉवर्ड शुल्ट्ज के पास आज लगभग $3.6 बिलियन की संपत्ति है. लेकिन एक वक्त था जब हॉवर्ड शुल्ट्ज ने पढ़ाई के लिए अपना खून तक बेचा था. वह अमेरिका के ब्रुकलिन के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में पले-बढ़े. जब शुल्ट्ज केवल 7 साल के थे, तब उनके ट्रक ड्राइवर पिता काम के दौरान घायल हो गए और उनके टखने की हड्डी टूट गई. उनके पास न तो कोई हेल्थ इंश्योरेंस था और न ही कोई मुआवजा मिला. परिवार की आमदनी बंद हो गई. उस समय उनकी मां सात महीने की प्रेगनेंट थीं और काम भी नहीं कर सकती थीं. जब बिल वसूलने वालों का फोन आता, तो शुल्ट्ज या उनके भाई-बहनों को फोन उठाकर ऐसा नाटक करने के लिए कहा जाता था कि उनके माता-पिता घर पर नहीं हैं. उन्होंने उस दौरान उन्होंने अपने माता-पिता को निराशा और बेबसी के दौर से गुजरते देखा था. 

शुल्ट्ज ने एकबार इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता उनके साथ मारपीट करते थे. अपनी किताब में शुल्ट्ज ने पिता को हारा हुआ इंसान भी कहा है, जिन्होंने सिस्टम में ढलने की कोशिश की, लेकिन सिस्टम ने उन्हें कुचल दिया. उन्होंने कहा कि कम आत्मविश्वास के कारण मेरे पिता कभी भी उस मुश्किल हालात से बाहर नहीं निकल पाए और अपनी जिंदगी बेहतर नहीं बना सके.

कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए, शुल्ट्ज ने बारटेंडर के तौर पर काम किया और यहां तक कि अपना खून भी बेचा. अपने परिवार में कॉलेज से ग्रेजुएट होने वाले पहले व्यक्ति बने.

फिर कहानी शुरू स्टारबक्स की

शुल्ट्ज 1982 में ऑपरेशन्स और मार्केटिंग डायरेक्टर के तौर पर स्टारबक्स से जुड़ने के लिए न्यूयॉर्क से सिएटल चले गए. उस समय कंपनी के सिर्फ चार स्टोर थे. 1983 में शुल्ट्ज इटली गए, जहां उन्हें मिलान के एस्प्रेसो बार का तरीका बहुत पसंद आया. ये ऐसी जगहें थीं जहां लोग घर या ऑफिस के बाहर एक-दूसरे से मिल सकते थे और साथ में समय बिता सकते थे. जब कंपनी में बदलाव नहीं करा पाए तो उन्होंने स्टारबक्स छोड़ दिया और अपनी कंपनी, 'इल जियोर्नेल कॉफीहाउस' शुरू की.

1987 में, शुल्ट्ज ने कुछ निवेशकों की मदद से स्टारबक्स को ही खरीद लिया. उन्होंने CEO का पद भी संभाला. उस समय, कंपनी के 17 स्टोर थे. शुल्ट्ज ने सोसाइटी को समझकर कंपनी को जबरदस्त तरक्की दिलाई. शुल्ट्ज ने स्टारबक्स को 11 स्टोर से बढ़ाकर दुनिया भर में 35 हजार से ज्यादा स्टोर तक पहुंचाया और अमेरिकियों ही नहीं पूरी दुनिया में एक सोशल हब बना दिया. उन्होंने तीन बार CEO के तौर पर काम किया और हाल ही में 2023 की शुरुआत में इस पद से हटे.

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