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भारत में 500 गुना मस्जिदें बढ़ीं, PAK में उंगलियों पर गिनने लायक मंदिर बचे... जानें किस हाल में अल्पसंख्यक

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की घटती संख्या और धार्मिक स्थलों की बदहाली बड़ी चिंता का सबब बन चुकी है. हाल ही में पाकिस्तान की एक संसदीय समिति की रिपोर्ट ने इस कड़वे सच पर मुहर लगाई है.

भारत में 500 गुना मस्जिदें बढ़ीं, PAK में उंगलियों पर गिनने लायक मंदिर बचे... जानें किस हाल में अल्पसंख्यक
  • पाकिस्तान की एक संसदीय समिति की रिपोर्ट ने वहां अल्पसंख्यकों की स्थिति के कड़वे सच पर मुहर लगाई है
  • रिपोर्ट के मुताबिक, आजादी के वक्त पाकिस्तान में करीब 1,817 मंदिर-गुरुद्वारे थे, जो अब सिमटकर 37 रह गए हैं
  • 1947 में विभाजन के वक्त पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी करीब 21% थी, जो 2025 तक घटकर 3.5% रह गई
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की बदहाली पिछले कुछ दशकों में बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है. आजादी के करीब आठ दशकों की तुलना करें तो भारत में मुसलमानों की आबादी और मस्जिदों की संख्या लगातार बढ़ी है. मस्जिदों की संख्या में तो 500 गुना का इजाफा हुआ है. वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों की आबादी तेजी से घटी है. मंदिर-गुरुद्वारे तो लगभग गायब हो चुके हैं. 

पाकिस्तान संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा

भारत में जहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों ने हर क्षेत्र में तरक्की की है, वहीं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की घटती संख्या और धार्मिक स्थलों की बदहाली एक बड़ी चिंता का सबब बन गई है. हाल ही में पाकिस्तान की एक संसदीय समिति की रिपोर्ट ने इस कड़वे सच पर मुहर लगाई है. रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को किस कदर निशाना बनाया जा रहा है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में मौजूद अधिकतर मंदिर या तो पूरी तरह से बंद हो चुके हैं या फिर उन्हें तोड़कर खंडहर में तब्दील कर दिया गया है. हिंदुओं और सिखों की घटती आबादी वहां के सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति

साल19472025
जनसंख्याकरीब 21%    करीब 3.5%
मंदिर-गुरुद्वारे181737

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी भी घटी

आंकड़ों पर नजर डालें तो 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी करीब 21% थी, जो 2025 तक घटकर महज 3.5% रह गई है. ये गिरावट न केवल आबादी में बल्कि धार्मिक स्थलों में भी साफ नजर आती है. रिपोर्ट में बताया गया है कि आजादी के वक्त पाकिस्तान में करीब 1,817 मंदिर और गुरुद्वारे थे, लेकिन अब उनकी संख्या सिमटकर केवल 37 रह गई है.

भारत में अब 3 लाख से अधिक मस्जिदें 

पाकिस्तान के उलट, भारत में मुस्लिम समुदाय लगातार तरक्की और विकास की सीढ़ियां चढ़ रहा है. 1947 में भारत की कुल आबादी में मुसलमानों का हिस्सा करीब 9.9% था, जो 2025 में बढ़कर 14.2% हो गया है. सिर्फ आबादी ही नहीं, बल्कि इबादतगाहों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है. 1947 में जहां भारत में लगभग 600 मस्जिदें थीं, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 3 लाख से भी ज्यादा हो चुकी है.

भारत में मुसलमानों की स्थिति

साल19472025
जनसंख्या9.9%    14.2%
मस्जिदकरीब 6003 लाख से ज्यादा

पाकिस्तान से ज्यादा मस्जिदें भारत में 

एक रोचक तथ्य यह भी है कि भारत में पाकिस्तान की तुलना में कहीं ज्यादा मस्जिदें हैं. 'हलाल टाइम्स' के डेटा के मुताबिक, दुनिया भर में मस्जिदों की संख्या के मामले में भारत शीर्ष देशों में शामिल है. जहां इंडोनेशिया में सबसे अधिक 8 लाख मस्जिदें हैं, वहीं भारत 3 से 4 लाख मस्जिदों के साथ दूसरे या तीसरे स्थान पर है. इसके मुकाबले पाकिस्तान में केवल 1.1 लाख मस्जिदें हैं. सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देश में भी मस्जिदों का आंकड़ा 3 लाख के करीब है. 

देश मस्जिदों की संख्या
इंडोनेशिया 8 लाख
भारत3-4 लाख 
बांग्लादेश3.5 लाख 
सऊदी अरब3 लाख
पाकिस्तान1.1 लाख
(सोर्स- हलाल टाइम्स)

पाकिस्तान में पूजास्थलों की हालत पर चिंता

लगातार उत्पीड़ने के बीच पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर अब आवाज उठने लगी है. हाल ही में इस्लामाबाद में संसदीय अल्पसंख्यक कॉकस की पहली बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में हिंदू, सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और उनकी चुनौतियों पर चर्चा हुई. समिति ने पाकिस्तान सरकार से मांग की कि देश में जितने भी पूजा स्थल बंद पड़े हैं, उन्हें तुरंत खोला जाए ताकि अल्पसंख्यक अपनी आस्था का पालन कर सकें.

हिंदुओं के लिए समिति की अहम सिफारिशें

समिति ने शिक्षा और रोजगार सेक्टर में भी बड़े बदलावों की सिफारिश की है. मांग की गई है कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति बढ़ाई जाए और सरकारी नौकरियों में उनका कोटा सुनिश्चित किया जाए. सबसे अहम बात यह है कि समिति ने स्कूलों के सिलेबस से नफरत फैलाने वाली सामग्रियों को हटाने की सलाह दी है.

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