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This Article is From Oct 21, 2013

कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता मंजूर नहीं : शिंदे

कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता मंजूर नहीं : शिंदे
फाइल फोटो
नई दिल्ली/श्रीनगर/वाशिंगटन:

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को कहा कि कश्मीर विवाद में भारत को तीसरे पक्ष की मध्यस्थता मंजूर नहीं है। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि भारत विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। उधर, अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उसका कश्मीर मुद्दे में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है।

शिंदे का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के रविवार को दिए गए उस वक्तव्य के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका हस्तक्षेप करे तो कश्मीर मसले का हल निकल सकता है।

गृहमंत्री ने सोमवार को कहा, "कश्मीर एक द्विपक्षीय मसला है, तीसरा देश इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। जवाहरलाल नेहरू के समय से हमारा यही रुख रहा है।"

नवाज अमेरिका के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, जहां वह राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करेंगे।

उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि यदि पाकिस्तान संघर्ष विराम संधि का सम्मान नहीं करता है तो भारत को इसका जवाब देने के लिए शक्ति का प्रयोग करना पड़ेगा।

जम्मू एवं कश्मीर सशस्त्र पुलिस के जीवन मुख्यालय पर आयोजित पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर उमर ने कहा, "मुझे तो यह नहीं समझ आ रहा कि इसमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का हाथ है या हालात उनके काबू से बाहर हो गए हैं।"

उमर ने आगे कहा, "अगर हिंसा जारी रहती है, तो इसका जवाब बलपूर्वक देने में हम सक्षम हैं। वे सांबा, रणबीरसिंहपुरा और अखनूर में हमारे गांवों को निशाना बना रहे हैं। इन इलाकों में लोगों को अपने खेतों, घरों को छोड़ना पड़ा है, इन इलाकों के स्कूल बंद पड़े हैं।"

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह पाकिस्तान द्वारा दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के पालन को सुनिश्चित कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के मंत्रियों ने सोमवार को विस्थापित लोगों के आश्रय स्थलों का दौरा किया।

उमर ने कहा, "जम्मू एवं कश्मीर में भारत किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा और दोनों देशों ने इस पर अपनी सहमति भी जताई थी।"

दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के चार दिवसीय दौरे पर अमेरिका पहुंचने से पहले ही कश्मीर विवाद को हल करने के लिए मध्यस्थता की उनकी अपील को अमेरिका ने खारिज कर दिया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका की नीति जरा भी नहीं बदली है। अमेरिका इस रुख पर कायम है कि कश्मीर दक्षिण एशिया के दो पड़ोसियों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है।

अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों को संवाद के लिए प्रोत्साहित किया जाता है लेकिन कश्मीर मुद्दे पर वार्ता की गति, दायरा और प्रकृति दोनों देश ही निर्धारित करते हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अमेरिका रवाना होते हुए लंदन में रविवार को कहा था कि भारत के नहीं चाहने के बावजूद दुनिया की शक्तियों को कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान (एपीपी) के अनुसार, उन्होंने कहा कि विश्व शक्तियों को ऐसा इसलिए करना चाहिए क्योंकि यह क्षेत्र परमाणु हथियार संपन्न है।

अधिकारी ने कहा कि ओबामा-शरीफ के बीच मुलाकात के दौरान ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और आतंकवाद के अलावा अफगानिस्तान पर चर्चा होगी। इसके साथ ही कुछ बिंदुओं पर भारत के बारे में भी बात होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान द्वारा ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में उठाए गए कदमों से हम बहुत उत्साहित हैं।"

न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और शरीफ के बीच हुई मुलाकात का हवाला देते हुए अधिकारी ने कहा कि निश्चय ही उनकी मुलाकात बहुत सकारात्मक थी।

इससे महज दो दिन पहले ही ओबामा के साथ मुलाकात के दौरान मनमोहन ने पाकिस्तान को 'आतंकवाद की धुरी' करार दिया था।

भारत की तरह ही अमेरिकी अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान से पैदा आतंकवाद शरीफ के सत्ता संभालने के बाद दोनों पड़ोसियों के बीच शांति वार्ता को पटरी से उतार सकता है।

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